तारक मेहता का उल्टा चश्मा का चुदक्कड़ परिवार

सोढ़ी पूरे उत्साह में आकर ज़ोर से पिल पड़ा और सोफे पर बैठे बैठे ही रोशन की गांड में लंड को ज़ोरों से अन्दर बाहर करने लगा.

“तू तो खरेखर गांडो ज छे सोढ़ी … आह … आह …!” सोढ़ी के बड़े लंड को अपनी गांड में ज़ोरों से अन्दर बाहर होने के कारण सिसकारियां भरते हुए रोशन बोली.
“ओये सोनिये! अब तो ये सोढ़ी तुझे रोज़ पेलने वाला है … आहूं … आहूं … आहूं …”

रोशन की गांड में लंड डाले हुए ही अपने दोनों हाथ हवा में उठाए हुए सोढ़ी भांगड़ा करने लगा.

“हवे शांत था ने ..!” ऐसे ही सोढ़ी के लंड पर अपनी गांड ऊंची नीची करते हुए रोशन ने उसका भांगड़ा बंद करवाते हुए कहा.
“ओह सोनिये, तू कहती है तो बंद कर देते है भांगड़ा वांगड़ा ..” सोढ़ी रोशन की कमर पकड़ते हुए बोला.

धकापेल गांड चुदाई चलने लगी.
रोशन को बड़ी मस्ती सूझ रही थी. वो सोढ़ी के हाथों से अपने मम्मे मिंजवाती हुई गांड लंड पर ऊपर नीचे पटक रही थी.

अब वो अपनी गांड मरवाते हुए अपने चरम पर पहुंचने को थी. उससे रहा नहीं गया और उसने रोशन के लंड पर बैठे बैठे ही अपनी ड्रेस ऊपर की ओर उठाते हुए निकाल फेंकी.

रोशन पूरी तरह नंगी हो गई थी और बड़े ही मज़े से सोढ़ी का लंड अपनी गांड में अन्दर बाहर करवा रही थी.

दूसरी ओर सोढ़ी, रोशन की गांड मारते मारते ही उसके बोबों को अपने पहाड़ी जैसे हाथों से कभी दबोचता, तो कभी एक एक करके दोनों बोबे चूसता.

उधर रोशन भी अपनी चुत में उंगली करती हुई खुद को चरम पर पहुंचाने में लगी थी.

“सोढ़ी मेरा होने वाला है.” अपने ही बोबों को अपने हाथों से दबाते हुए रोशन बोली.
“कोई बात नहीं डार्लिंग, मेरे लंड पर ही अपना गाढ़ा निकाल दे और मैं तेरी ही गांड में मेरा रस निकाल देता हूँ. कसम से इस लॉकडाउन ने तो मज़ा ही मज़ा करा दिया. डार्लिंग अब हम रोज़ जब भी मौका मिलेगा, तब चुदाई का खेल खेलेंगे. बस तू गोगी पुत्तर को जल्दी सुला दिया कर … आह … आह … ले!

ये कहते हुए सोढ़ी ने अपना सारा माल रोशन की गांड में निकाल दिया और उसी वक़्त रोशन ने भी अपनी चूत से ढेर सारा पानी सोढ़ी के लंड पर उड़ेल दिया.

वे दोनों थक गए थे और अभी भी रोशन बिना कपड़े पहने सोढ़ी के लंड पर ही बैठी थी.
वो सोढ़ी के सीने पर अपना सर रखकर कभी सोढ़ी की छाती की घुंडियों से खेलने लगती तो कभी उसकी छाती के बालों से खेल रही थी.

सोढ़ी रोशन की गांड को अपने दोनों हाथों से सहला रहा था कि तभी अचानक गोगी अपने कमरे से बाहर निकला.

कपड़े के नाम पर उसने महज़ एक छोटी सी चड्डी पहन रखी थी, जिसमें से उसका खड़ा लंड साफ दिखाई दे रहा था.
शायद वो अपनी मम्मी की चुदाई देख कर मजा ले रहा था.

“अरे गोगी पुत्तर तू उठ गया?” रोशन अपने नंगे जिस्म को सोढ़ी के लंड पर बैठे बैठे ही चादर से लपेटते हुए बोली.
“हां मम्मी, बहुत भूख लगी है.”

रोशन के सामने ही गोगी ने अपने नंगे पेट पर हाथ फिराते हुए बोला जबकि रोशन का ध्यान तो उसके खड़े हुए लंड पर था.

“ओ तेरी, सोढ़ी तुझसे चुदने के चक्कर में मैं तो भूल ही गयी कि मैंने गोगी डिकरा के लिए पकोड़े तलने रखे थे.”

अपने बेटे गोगी के सामने ही रोशन चुदने की बात बोल पड़ी.
फिर उसको अपनी भूल का अहसास हुआ.

‘गोगी डिकरा, तू ज़रा अन्दर जाएगा, तो मैं कपड़े पहन लेती हूँ. फिर मैं तेरे लिए मस्त मस्त खाना बना देती हूं.’

रोशन ने अपनी गांड को सोढ़ी की गोद में थोड़ा एडजस्ट किया और दूसरे हाथ से अपने मम्मों पर चादर को थोड़ा एडजस्ट करते हुए गोगी को जाने को कहा.

‘नहीं मम्मी, आप मेरे सामने ही पहन लीजिये न!’ गोगी अब भी वहां खड़ा खड़ा अपने पेट पर हाथ फिराते हुए बोला.

गोगी की नज़र बिल्कुल अपनी मां के नंगे कंधों और नंगे पैरों पर थी और उसकी आंखें चादर के भीतर से उसकी नंगी मां के जिस्म की कल्पनाएं कर रही थीं.

‘शु बोल्यो गोगी?’ रोशन हर बार की तरह अपनी पारसी ज़ुबान में बोली लेकिन इस बार उसकी आवाज़ में थोड़ी सख्ती थी.

“अरे कुछ नहीं मम्मी, मैं तो मज़ाक कर रहा था, अगर आपका और पापा का हो गया हो तो आप कपड़े पहन लेना, तब तक मैं सुसु करके आता हूँ.” गोगी अपने खड़े हुए लंड की ओर इशारा करते हुए बोला.

रोशन अपने गोगी पुत्तर के बड़े लंड को उसकी चड्डी के ऊपर से ही अपनी आंखों से मापने की कोशिश करने लगी.
फिर गोगी अपने रूम में मूतने चला गया.

गोगी के जाते ही रोशन सोढ़ी की गोद से उठी और अपनी छोटी सी ड्रेस उठाकर पहनने की कोशिश करने लगी.

लेकिन सोढ़ी ने रोशन को कपड़े पहनने से रोक लिया.

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