दारू पार्टी में चुदाई पार्टी हो गयी

लंड गीला था तो मैंने कमर पकड़कर जोर से दबाया तो लंड भाभी की गांड के छेद में घुस गया।
वो चीखने लगी तो मैंने उसके मुंह को हाथ से दबा लिया और दूसरे से उसकी चूचियों को दबाने लगा।

थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हुआ तो मैंने लंड को ढीला किया और जोर का धक्का लगाया।
वो गूं … गू … करने लगी और मैंने लंड को भाभी की गांड में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

उसकी गान्ड बहुत टाइट थी। अब वो गांड आगे पीछे करने लगी।
मैं समझ गया और मैंने अपना लन्ड बाहर निकाल लिया और झटके से घुसा दिया।

अब लंड ने गांड में जगह बना ली थी। अब मैं उसके ऊपर आ गया और सटासट … सटासट अंदर-बाहर करने लगा।
उसकी सिसकारियां आह्ह … आह्ह … करके निकलने लगीं।

मैंने चुदाई की रफ्तार बढ़ा दी।
अब उसकी टाइट गांड में मेरा लौड़ा ढीला पड़ने लगा और झटकों के साथ लंड ने वीर्य की धार छोड़ दी।
उसकी गान्ड वीर्य से भर गयी तो मैंने लंड निकाल लिया और उसके मुंह में डाल दिया।

मेरे लंड को भाभी ने चूस कर साफ़ कर दिया और हम दोनों चिपक कर लेट गए।
फिर बातें करते करते दोनों सो गए।

सुबह 5 बजे मेरी नींद खुली तो बिस्तर पर तीनों नंगे जिस्म पड़े थे।
मैं बाथरूम में गया और पेशाब करके रूम में आ गया।

मैंने दो पैग बनाए। पंकज बहुत बड़ा दारूबाज था। एक पैग मैंने कच्ची नींद में पंकज को पिला दिया और छोटा पैग पीकर बिस्तर पर आ गया।

धीरे धीरे मैं रूपा की चूत को चाटने लगा; उसकी चूचियां दबाने लगा।
फिर मैंने उसकी चूत में जीभ घुसा दी तो वो जाग गई।

मैंने जीभ से जल्दी जल्दी चोदना शुरु कर दिया।
रूपा आह्ह आह्ह … करते हुए सिसकारने लगी। अब वो मेरे सिर को अपनी चूत में दबाने लगी और मैं जीभ घुसाकर गपागप गपागप चोदने लगा।

उसका शरीर अकड़ गया और चूत ने पानी छोड़ दिया।

अब मैं बिस्तर पर लेट गया और वो खुद लंड को मजा लेकर चूसने लगी। वो गपागप लोलीपॉप के जैसे मेरे लौड़े को चूसने लगी।

मैं उसके बूब्स मसलने लगा; कभी उसकी पीठ में हाथ फेरने लगा।

उसने लंड को चूसकर तैयार कर दिया।
मैंने उसे बिस्तर से नीचे उतार दिया और झुका दिया।

अब मैंने उसकी गान्ड पर लंड दबाया तो लंड फिसलता हुआ चूत में घुस गया। फिर मैंने झटके मारना शुरू कर दिया और उसकी चूत को चोदने लगा।

रूपा भाभी को अब दर्द नहीं हो रहा था और वो आराम से लंड ले रही थी।
अब उसकी चूत खुल गई थी जो पंकज नहीं खोल पाया था।

तभी मैंने लंड निकाल लिया और उसकी गान्ड में थूक भर दिया।
उसने मेरे लौड़े पर अपना भी थूक लगाया और गांड पर लंड को रख लिया।
मैंने जोर लगाया और लंड अंदर चला गया।

वो एक बार तो चीखी मगर मैंने लंड को तेजी से अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया और उसकी आवाज को सुनकर भी नहीं रूका।

धीरे धीरे लंड ने अपनी जगह गांड में बना ली और रूपा का दर्द कम हो गया।

मैंने लंड निकाला और थूक लगाया और गांड में फिर से घुसा दिया.
अब लंड सटृ से अंदर चला गया।
मैंने लंड फिर निकाल लिया और फिर घुसाया।
ऐसा जल्दी जल्दी 4-5 बार किया तो अब गांड का छेद पूरा ढीला हो गया और लन्ड आसानी से अंदर बाहर करने लगा।

अब रूपा खुद गांड मटकाने लगी।

फिर मैंने उसे बिस्तर पर घोड़ी बनाया और गांड में लंड डालकर चोदने लगा।
अब रूपा भी बराबर से गांड आगे पीछे करने लगी और लंड को जवाब देने लगी।

रूपा ने बताया कि शादी के पहले उसके गांव के सरकारी डॉक्टर ने उसकी गान्ड में लन्ड घुसा दिया था। उसे बहुत दर्द हुआ था। तब से उसने कभी गांड में लंड नहीं डलवाया था।

अब तो उसकी गान्ड और चूत दोनों छेदों को मेरे लौड़े ने खोल दिया था।

तब मैंने उसकी गान्ड से लंड निकाल लिया और उसे बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और उसके ऊपर आ गया।

मैंने उसकी चूत में लन्ड घुसा दिया और तेज़ तेज़ झटके मारने लगा।
अब लंड सटासट सटासट अंदर बाहर होने लगा था। मैंने रफ्तार बढ़ा दी और तेज़ी से चोदने लगा।

मेरा लंड अंदर उसकी बच्चेदानी में टकराने लगा। उसकी सिसकारियों से मेरा जोश और बढ़ने लगा।

लन्ड को मैंने चौथे गियर में डाल दिया और सटासट … सटासट … चोदने लगा।

5 मिनट तक मैंने बिना रुके जमकर भाभी को चोदा और फिर हम दोनों का पानी एक साथ निकल गया।
मैं लंड डालकर ऐसे ही लेटा रहा।

थोड़ी देर बाद हम दोनों अलग हो गए।

अब उजाला हो गया था। हम दोनों बाथरूम जाकर साथ नहाये। रूपा ने लंड चूस चूस कर साफ़ किया और फिर हमने एक दूसरे को साबुन लगाया।

नहाने के बाद दोनों कपड़े पहनकर रूम में आ गए।

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