बस में जवान लड़के ने आंटी की चूत गीली कर दी- 2

बीच में वो अपने कंधे को मसल कर मेरी कांख का रस अपने कंधे पर समेट रहा था.
कांख पर चलती उसके कंधे की उस गति का आनन्दमय भाव मैं सिर्फ भीड़ के भय से अपने अन्दर समेटे हुए थी.

अपने बाएं हाथ में फोन लेकर उसने शायद मैसेज में कुछ लिखा और मोबाइल को तिरछा करके मेरी तरफ घुमाया.
मैंने थैले में रखे अपने पर्स से चश्मा निकाला और उस पर फूंक मार कर अपने उभरे वक्ष के ब्लाउज के ऊपर उसे पौंछा.

चश्मा लगा कर जब मैंने देखा, तो उसने मैसेज बॉक्स में लिखा हुआ था.

‘नाम?’

मैंने पर्स से अपना फोन निकाला और इसी क्रिया में मैंने अपना थैला उसके बैग से चिपका दिया.
अब मैं नाभि से नीचे घुटनों तक अपने थैले से ढकी थी और वो कमर से जांघ के थोड़ा ऊपर तक बैग से ढका था.

मैंने फोन अपने दाएं हाथ में पकड़ा और अपना बायां हाथ नीचे घुसाकर उसकी जांघ पर टिका दिया.
जब मेरा हाथ उसकी गर्म नाजुक जांघ पर छुआ, तो उसके चेहरे के भाव विस्मय बोधक हो गए.

मुझे इस हरकत की प्रतिक्रिया यह मिली कि उसका हाथ मेरी साड़ी और पेटीकोट के ऊपर से दोनों जांघों के बीच गरमायी और भभकती योनि पर आ गया.

अब उसका दायां हाथ मेरे शरीर पर था और मेरा बायां हाथ उसके शरीर पर.

नीचे के इन हाथों का खेल एक दूसरे का बदन पर चल रहा था और ऊपर मोबाइल हाथ में लिए दोनों हाथों से जो बातें हो रही थीं, उनका खेल मन पर चल रहा था.

मैंने जवाब अपने फोन के मैसेज बॉक्स में लिख कर हाथ थैले पर टिकाकर उसको दिखाया.

‘संजना … और तुम्हारा?’

इस प्रश्न का जवाब उसके ऊपरी हाथ से पहले निचले हाथ ने दिया.
उसकी मध्यमा उंगली, मेरी साड़ी और पेटीकोट में घुसती हुई मेरी योनि की फैली दरार में घुसने की कोशिश करने लगी.

उंगली तो कपड़े रूपी दीवारों के कारण घुसने में नाकाम रही, पर साड़ी की मोटी सलवटों और पेटीकोट के कपड़े सहित उंगली की मोटाई किसी मध्यम आकार के लिंग के समान हो गई.
उस मोटी उंगली और मेरे कपड़ों के मेल से बना कृत्रिम लिंग, मेरी फैली योनि को छेदने में कामयाब रहा.

मेरे पेटीकोट का कपड़ा किसी मोटे कपड़े के बने कंडोम की भांति लग रहा था, जिसका सूखापन योनि के टपकते रस से गीला होता हुआ मुझे महसूस हो रहा था.

इसी दौरान ऊपरी हाथ ने अपना जवाब दिया ‘तरुण सिंह … क्या हम दोनों नम्बर अदल बदल सकते हैं?’

चश्मे से आंखों पर जोर देकर मैंने उसका मैसेज पढ़ा और उसी के अंदाज को अपना कर ऊपरी हाथ से पहले मैंने निचले हाथ से जवाब दिया.
अपने बाएं हाथ में उसका लिंग पकड़ कर पूरी ताकत से दबा दिया.

ये हरकत अगर अकेले में हुई होती, तो शायद वो चीख पड़ता. पर यहां वो सिर्फ अपने होंठों भींच पाया.
लिंग को ढीला छोड़कर मैंने अपनी तर्जनी उंगली उसके लिंग के छिद्रित भाग पर ले आई.
अपनी उंगली की टपोरी को उसके चारों और घुमाने लगी और छिद्र पर दबाव देने लगी.

इस शारीरिक प्रतिक्रिया के अलावा मेरे दिमाग में यह चल रहा था कि कहीं ये गलत तो नहीं हो रहा है?
हम दोनों ने कहां से शुरू किया था और कहां जा रहे है? नंबर दे दिए, तो कहीं कोई बड़ी प्रॉब्लम खड़ी ना हो जाए.

इसी ऊहापोह के बीच उसकी मासूम सी सूरत पर छाई निश्चल मुस्कान ने मेरे सारे बड़े बड़े सवालों के जवाब एक पल में दे दिए. और बिना कुछ ज्यादा सोचे समझे मैंने अपने मोबाइल के इन बॉक्स में नंबर लिख कर उसको बता दिया.

नंबर मिलते ही उसके चेहरे की चमक ही बदल गई और उसने तुरन्त मेरे नंबर को अपने फोन में सेव किया.

फोन अपनी कमीज़ की जेब में रख कर मेरे कान में धीरे से फुसफुसाया- मेरा स्टॉपेज 5-7 मिनट में आने वाला है.

इन शब्दों का मेरे मन पर या यूं कह दूँ कि मेरी वासना पर गहरा आघात लगा.
मैं इस पल में जिंदगी भर जीने को तैयार थी.

अब मैंने उसके लिंग पर अपनी घूमती उंगली की गति बढ़ा दी और बीच बीच में लिंग को आगे पीछे रगड़ने लगी.
लिंग मुख पर उसका लसलसाता रस मेरी उंगली पर लग रहा था.

मैंने अपना पूरा हाथ लिंग मुख पर फिराया और तौलिए जैसे उसके लिंग रस को पैंट के ऊपर से हाथ पर पौंछने लगी.

वो झड़ा नहीं था, पर गरमाहट से जो रस टपक रहा था, वो लगभग मेरे पूरे हाथ पर लग गया था.
ऐसा नहीं था कि समय सीमा सुनकर सिर्फ मैं ही आतुर थी; उसके भी हाथ का जोर मेरी गहरी योनि पर बढ़ता जा रहा था. लग रहा था जैसे वो अपना पूरा हाथ उस छेद में घुसा देगा.

उंगली के बने लिंग को उसने पूरा अन्दर बैठा दिया था. पेटीकोट और साड़ी दोनों ही योनि में घुसकर छिद्र नुमा दिखाने लगी थीं.
अब वो सिर्फ उस छिद्र में जोर जोर से अपनी उंगली अन्दर बाहर कर रहा था. उधर बना कृत्रिम छिद्र को मेरी योनि छिद्र मानकर वो उसमें हर धक्के से और गहरी चोट करते जा रहा था.

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