बस में जवान लड़के ने आंटी की चूत गीली कर दी- 2

योनि से बह रहा लसलसा रस उसकी उंगली पर मेरे पेटीकोट और साड़ी से छनकर पहुंच चुका था.

कंडक्टर चिल्लाया- शंभू नगर आने वाला है. शंभू नगर वाले आगे आ जाओ.

ये सुनकर उसने मेरी तरफ मुस्कान भरी नजरों से देखा, मैंने भी मुस्कुरा कर उसके लिंग पर जोरदार जकड़न देकर उसे जाने की इजाजत दे दी.
बदले में उसने कृत्रिम छेद में इतना जोर का झटका मारा कि वो मेरे योनि छिद्र में झटके से आगे सरक गया और मैं दर्द से कराह गई.

उसने खुद को समेटा और बैग को अपनी कमर से नीचे की तरफ आगे लंड को ढकते हुए लटका लिया.
फिर वो मेरी ओर हाथ हिलाता हुआ दरवाजे पर पहुंच गया.

वहां खड़ा वो मुझे ताके जा रहा था, जवाब में मैं भीड़ से निडर, उसकी आंखों में अपनी आंखें गड़ाए निहारे जा रही थी.

आखिर बस रुकी और वो मेरी तरफ हाथ हिलाता हुआ झट से नीचे उतर गया. मैंने जवाब में जो हल्का हाथ हिलाया, वो शायद उसने देखा भी नहीं था.

क्षण भर में वो मेरे बगल में बस की खिड़की के नीचे था. अपने दाएं हाथ की पूरी मध्यमा उंगली जिस पर अभी भी मेरा योनि रस रोड लाइट में चमक रहा था, उसने नशीले अंदाज में अपने मुख में लेकर चूस लिया.

मैं देखकर दंग रह गई कि ये वही उंगली थी, जिस पर मैं अपना योनि रस छोड़ रही थी. वो मेरा पूरा योनि रस एक बार में चाट गया.

पहले तो मैं थोड़ा झिझकी, पर इसे उत्सुकता कहूं … या कामवासना पर जवाब में मैंने भी अपने बाएं हाथ को उसे दिखाकर जीभ निकालकर पूरी हथेली चाटी. रस अब तक सूख चुका था, पर जीभ लगते ही उसमें वही लसलसाहट आ गई.

यह मेरी 44 साल की जिंदगी का पहला अनुभव था, जब मैं किसी मर्द का रस चाट रही थी.
पूर्ण रस ना सही, पर यह उसी का आगाजी रूप था.

इस स्वाद को मैंने एक एक उंगली में जीभ घुसा कर चाटा. पूरी चिपचिपी हथेली को मैं चाट रही थी.

तभी आवाज आई- चलो उस्ताद.

बस चल पड़ी, वो हाथ हिलाए मुझे विदा दे रहा था और मैं जवाब में हाथ हिलाए इसी उधेड़बुन में थी कि क्या यह यहीं खत्म हो जाएगा या ये सिर्फ एक शुरूआत है.

आगे की सेक्स कहानी फिर कभी लिखूंगी, जब तरुण से मुलाक़ात होगी.

आपको मेरी ये मेच्योर लेडी सेक्स कहानी कैसी लगी, प्लीज़ मुझे मेल कीजिएगा, पर कुछ पाने की उम्मीद न रखें.

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