बहन की चुत चुदाई के बाद ग्रुप सेक्स का चस्का

मैंने अपनी बेहन की आंखों में देखा तो समझ गया कि ये मुझे खुला ऑफर दे रही है कि रात को कमरे में आकर मुझे चोद लेना.

पर मैंने कुछ नहीं कहा और अपने कमरे में जाकर सो गया.

फिर जब रात गहरा गई, तो मैं उठा और दबे पांव बेहन के कमरे में चला गया.

वो सो रही थी, उसने सलवार सूट पहना हुआ था.
मैंने दरवाजे की कुंडी लगाई और बेहन के पास जाकर उसकी चूची पकड़ कर मसल दी.
वो मेरी इस हरकत से एकदम से हड़बड़ा कर उठी.

मैंने उसके मुँह पर हाथ रख दिया ताकि वो चिल्लाने न लगे.

वो मुझे अपने सामने देख कर बोली- आ गए.
मैंने कहा- हां, अब जल्दी से कपड़े उतार दे और मेरे लंड को चुत चोदने दे.

वो नाटक करने लगी- भाई आज मेरी चूत बहुत दुख रही है, तुम बाद में कर लेना.
मैंने कहा- मैं आज तुम्हारी चुत का भोसड़ा बना कर ही छोडूंगा, ताकि किसी से फिर न चुदवा पाओ.

वो मेरी तरफ देखने लगी.

मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए, वो अपने कपड़े उतरवाते समय कुछ नहीं बोली.
तो मैं समझ गया कि इसका खुद से मन है कि ये मुझसे चुदवा ले; फालतू के नखरे कर रही थी.

मैंने उसे नंगी किया और अपना लंड बाहर निकाला कर उसके मुँह में डाल दिया.
वो मेरा लंड मजे से चूसने लगी.

उसके बाद मैंने उसे चित लिटाया, तो वो किसी पारंगत रंडी के जैसे अपनी चुत खोलकर लेट गई और उसने अपनी दोनों टांगें हवा में उठा कर मुझे इशारा किया.

मैं अपनी बेहन की टांगों में बीच में आ गया और उसकी चुत पर लंड सैट कर दिया.

उसने अपने हाथ से मेरे लंड के सुपारे से अपनी चुत के दाने को घिसना शुरू किया और मेरी आंखों में वासना से देखने लगी.

मुझे रहा नहीं गया तो मैंने उसी पल एक जोर का धक्का दे मारा. मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी बुर में घुसता चला गया.

वो दर्द से अपने दांत भींच कर खुद को चिल्लाने से रोकने लगी.
मैंने उसकी आंखों में दर्द देखा, तो रुक कर उसकी चूचियां मसलने लगा.

वो कुछ पल बाद शांत हो गई और कराहते हुए बोलने लगी कि भाई तुम्हारा लौड़ा इतना मोटा है, मुझे पहले मालूम होता, तो मैं तुम्हारा लौड़ा ही ले लेती. मुझे किसी और लौड़ा चूसने की जरूरत ही नहीं होती.

हम दोनों धकापेल चुदाई का मजा लेने लगे.

कुछ देर बाद मैं झड़ने को हुआ तो मुझे याद आ गया कि इसकी चुत में रस टपकाया तो गड़बड़ हो जाएगी.

मैंने लंड चुत से खींचा और उसके मुँह में लगा दिया.
मेरी बेहन मजे से मेरा लंड चूसने लगी.

मैंने अपने लंड का रस अपनी बेहन के मुँह में ही निकाल दिया. उसने भी मेरी रबड़ी खा ली और मुझे अपने सीने से चिपका कर चूमने लगी.

कुछ देर बाद हम दोनों फिर से गर्मा गए और मैं फिर से अपनी बेहन की चुत चुदाई में लग गया.

इस तरह उस रात मैंने तीन बार उसकी चुत चोदी और अपने कमरे में आ गया.

ये सिलसिला रोज चलने लगा.

एक दिन मेरी बेहन ने मुझे गांड मारने के लिए बोला. तो मेरी समझ में आ गया कि ये पीछे से भी चुद चुकी है.

मैंने उससे पूछा- क्या मिथुन ने तेरी गांड भी मारी है?
वो हंस दी और उसने हां कहा.

मैंने उस दिन उसकी गांड में लंड पेला और बीस मिनट तक उसकी गांड मारी.
अब हम दोनों चुदाई में एकदम खुल गए थे और एक दूसरे को गाली देते हुए चुदाई का मजा लेते थे.

एक दिन अपनी बेहन को चोदते समय मैंने उसे गाली दी- साली, एक दिन तेरे दोनों छेद में लंड पेल का तुझे मजा दूंगा.
वो हंस कर कहने लगी कि क्यों तेरे पास दो लंड होने वाले हैं क्या? मेरे दोनों छेदों में तू एक साथ लंड कैसे डालेगा!

मैं कुछ नहीं बोला, मेरे मन में तो था कि किसी तरह इसकी चुत और गांड दोनों को एक साथ बजाया जाए.

फिर वो खुद ही कहने लगी- मिथुन को बुला ले … फिर तुम दोनों एक साथ मेरी चुदाई कर लेना.
मैं भी समझ गया कि मेरी रंडी बेहन को एक साथ दो लौड़े से चुदाई का मन है.

मैंने उसकी बात को मान लिया और उसने दूसरे दिन दोपहर में खेत में मिथुन को बुला लिया.

मिथुन और मैंने बेहन को गर्म किया और उसने भी हम दोनों के लंड चूसे.

फिर मिथुन ने मेरी बेहन की चुत में लंड पेल कर उसे अपने ऊपर ले लिया.
मैंने पीछे से अपनी बेहन की गांड में लंड पेल दिया.

हम तीनों ने उस दिन थ्री-सम सेक्स का मजा लिया.

इसके बाद हम तीनों का खेल चलने लगा. मगर मेरी बेहन की चुत की आग बढ़ती ही जा रही थी.

एक दिन उसने कहा कि मुझे और लंड चाहिए … जाओ मेरे लिए और लंड का इंतजाम करो.

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