मेरी बीवी दो पराये मर्दों से चुदवा आयी

अब हम एक दुकान पर गयी। चादर वाला बंदा चला गया लेकिन वो दूसरा बंदा वहां पर भी पीछे पीछे आ गया। अब मेरे पीछे आकर वो लंड को ऐसे ही गांड पर लगाता रहा। अब इतनी देर से लंड मेरी गांड पर लग रहा था तो मेरी फुद्दी गीली होने लगी।

मैंने उसको पीछे मुड़कर देखा तो वो डर गया और धीरे से प्रीत के पीछे जाकर खड़ा हो गया और उसकी गांड पर लंड को लगाने लगा।
प्रीत उसके लंड के मजे अपनी गांड पर ले रही थी।

अब मैं तरसने लगी थी। मुझे मेरे कुंवारेपन वाले दिन याद आ रहे थे। फिर हम सूट लेकर डॉक्टर की दुकान पर गये।

प्रीत ने पहले से ही वहां पर अपनी चुदाई का प्रोग्राम सेट किया हुआ था।
उसने मुझे वो बाद में बताया कि उसने डॉक्टर को फोन कर दिया था।

जब हम डॉक्टर के यहां पहुंचे तो वहां पर पहले से ही एक दो मरीज बैठे हुए थे।

उनको जल्दी जल्दी से दवा देकर उसने हमें अंदर बुला लिया।
इतने में ही वो बन्दा जो हमारा पीछा कर रहा था अब वो भी दुकान में आ गया और डॉक्टर उसको देख कर बोला- अरे भई गुज्जर सिंह, क्या हाल है?

फिर उसने मुझे देखा और बोला- हाल तो बहुत बढ़िया है।
उसके बाद वो डॉक्टर को लेकर अंदर चला गया।

अंदर जाकर दोनों ने पता नहीं क्या बात की कि वो दोनों हंसते हुए आये और प्रीत को डॉक्टर ने अंदर बुला लिया।

डॉक्टर प्रीत को कहने लगा कि गुज्जर को तेरी फ्रेंड की फुद्दी चोदनी है।
प्रीत ने मना कर दिया कि वो नहीं देगी यहां। अगर गुज्जर को करना है तो मेरे साथ ही कर ले।

डॉक्टर बोला- नहीं, तू नहीं। तेरी फ्रेंड की चाहिए है गुज्जर को। अगर तूने अपनी फ्रेंड की फुद्दी नहीं दिलवायी तो मैं तेरे वीडियो लोगों को दिखा दूंगा।

उसके बाद प्रीत मेरे पास आई और उसने सारी बात बतायी।
पहले मैं मना करने लगी लेकिन अंदर से मेरा मन भी कर रहा था।
फिर प्रीत के कहने पर मैंने हां कर दी।

डॉक्टर ने अपनी दुकान का शटर गिरा दिया और बाहर दुकान बंद होने का बोर्ड लगा दिया।

फिर प्रीत मुझे ऊपर डॉक्टर के बेडरूम में ले गयी। वो डॉक्टर ने अपने आराम करने के लिए बनाया हुआ था।

वो बंदा भी हमारे पीछे पीछे आ गया।
हम दोनों बेड पर बैठे थे और वो दोनों कुर्सी पर।

फिर डॉक्टर ने हम दोनों को एक दूसरे को किस करने के लिए कहा। हम दोनों किस करने लगे।

होंठों से होंठों को मिलाकर हम किस कर रहे थे और धीरे धीरे हम दोनों गर्म होने लगीं।
अब हम दोनों एक दूसरे के मम्मों को भी दबा रही थीं।

हम दोनों को देखकर वो दोनों भी गर्म हो गये।

अब उन दोनों ने अपने अपने लंड को बाहर निकाल लिया था और हिलाने लगे थे।
जब मैंने डॉक्टर और गुज्जर के लंड को देखा तो देखती ही रह गयी।

गुज्जर का लंड बहुत बड़ा था। एकदम गोरा और लाल टोपा था उसके लंड का। डॉक्टर का लंड आपके लंड जितना था। जान बुरा मत मानना मेरी बात के लिए।

मैंने कहा- अरे तू आगे बता, मैं तेरी बातों का मजा ले रहा हूं। आगे बोल क्या हुआ फिर?

सिमर बोली- फिर वो दोनों हमारे पास आ गये। गुज्जर ने मेरे मुंह में लंड दे दिया और डॉक्टर ने प्रीत के मुंह में लंड दे दिया।

गुज्जर का लंड मेरे मुंह में नहीं जा रहा था। धीरे धीरे करके उसने धकेलते हुए सारा लंड मेरे मुंह में दे दिया।
मेरे मुंह से म्म्म… ऊऊ .. चूप … चूप … की आवाज आ रही थी।

दस मिनट तक चुसवाने के बाद डॉक्टर ने अब प्रीत के मुंह से लंड निकाला और मेरे मुंह में दे दिया।
गुज्जर ने अपना लंड प्रीत के मुंह में दे दिया।

अब डॉक्टर मेरे मुंह में धक्के मार रहा था- कप्प … कप्प … गप्प … गप्प … गुलप … गुलप … करके मेरे मुंह से आवाज हो रही थी।
पांच मिनट तक डॉक्टर का लंड चूसने के बाद मैं फिर से गुज्जर का लंड चूसने लगी।

प्रीत भी मेरे साथ ही गुज्जर का लंड चूसती रही।

फिर डॉक्टर ने प्रीत को खड़ी कर लिया और उसके होंठों को चूसने लगा। होंठ चूसते हुए वो धीरे धीरे उसके कपड़े उतारने लगा।
कुछ ही देर के अंदर प्रीत को उसने नंगी कर दिया।

फिर गुज्जर ने मुझे भी नंगी कर दिया और हम दोनों अब बेड पर नंगी पड़ी हुई थीं।
गुज्जर ने मेरे पैर पकड़ लिये और चाटने लगा।

मेरे पैर का अंगूठा अपने मुंह में लेकर चूसने लगा; धीरे धीरे चाटता हुआ वो मेरी फुद्दी तक पहुंच गया।
वो मेरी गर्म चूत को चूसने लगा; फिर मेरी चूत के साथ साथ गोरी गोरी गांड के छेद में भी जीभ डालने लगा।

मेरी चूत और गांड की तारीफ करते हुए वो दोनों को चाटता रहा।

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