मेरी बीवी दो पराये मर्दों से चुदवा आयी

फिर प्रीत को पता नहीं क्या हुआ कि वो चीखने लगी। उसको दर्द होने लगा और वो एक तरफ जाकर बैठ गयी।

प्रीत ने दर्द होने का नाटक किया था। वो मुझे दो लंड दिलवाना चाहती थी। ऐसा उसने जाबूझकर किया, और वो भी उस डॉक्टर के कहने पर!
अब वो दोनों लंड सिर्फ मेरे लिए थे।

गुज्जर मेरी चूत को चाट रहा था।
मैं बस सिसकार रही थी- आह्ह … मर गयी … ओह्ह … अम्म्म … आह्ह … ओह्ह … गॉड … चोदो … मुझे चोदो प्लीज।

मैं सिसकार रही थी कि डॉक्टर ने अपने होंठ मेरे होंठों में फंसा दिये।
मेरी आवाज बंद हो गयी।

अब मुझसे सब्र नहीं हो रहा था। अब गुज्जर मेरी फुद्दी और गांड के छेद पर लगातार अपने लंड का टोपा रगड़ने लगा। अब मुझे और ज्यादा मजा आने लगा।

डॉक्टर मेरे होंठों को चूसता रहा। फिर गुज्जर ने एक झटका मारा और उसके लंड का टोपा अंदर घुस गया चूत में!
मैं दर्द के मारे तड़प उठी।

तो मैं गुज्जर को रोकने लगी लेकिन डॉक्टर ने मेरे हाथ पकड़ लिये।
उसने मेरे मुंह में लंड दे दिया।
गुज्जर ने एक और झटका मारा और मेरी फुद्दी को चीरता हुआ उसका लंड पूरा अंदर चला गया।

अब मेरी चूत का बुरा हाल था।
गुज्जर का मोटा लंड मेरी चूत में फंसा हुआ था। धीरे धीरे वो धक्के लगाने लगा।

पांच मिनट तक धीरे धीरे चुदने के बाद अब मुझे भी मजा आने लगा।
डॉक्टर मेरे मुंह को चोदने लगा।

फिर धीरे धीरे गुज्जर ने धक्के तेज कर दिये। दस मिनट तक ऐसे ही चुदाई करने के बाद गुज्जर ने पोजीशन बदल ली।

वो नीचे लेट गया और मैं उसके ऊपर बैठ गयी।
फिर पीछे से डॉक्टर मेरी गांड पर थूक लगाया और लंड मेरी गांड के छेद में अपना लंड पेल दिया।

मेरी चीख निकल गयी- ओह्ह … मर गयी … आआआह।
मैंने डॉक्टर से कहा कि धीरे धीरे कर लेकिन वो चोदता रहा। उधर गुज्जर नीचे से चोदता रहा। वो साथ साथ मेरे होंठों को भी चूसता रहा।

मुझे बहुत मजा आ रहा था। अब मैं स्वर्ग का झूला झूल रही थी।
इतना मजा मुझे आज तक नहीं आया था जितना मजा फुद्दी और गांड में लंड लेकर आ रहा था।

उधर प्रीत अपनी चूत में उंगली देकर मजा ले रही थी।

20 मिनट की चुदाई के बाद डॉक्टर का माल मेरी गांड में निकल गया क्योंकि गुज्जर ने उसको मेरी चूत में लंड नहीं देने दिया।

गुज्जर अब तक चोद रहा था। मैं भी गुज्जर के ऊपर बैठी हुई उससे फुद्दी मरवा रही थी।

वो भी पूरे जोश के साथ धक्के मार रहा था। उधर प्रीत ने डॉक्टर का लंड चाट चाट कर साफ कर दिया था।
फिर गुज्जर ने पोजीशन बदली। मैं नीचे लेटी और गुज्जर ने मेरी टांगें उठाकर मेरी गांड में लंड पेल दिया।

मैं आआ … ओओ … ईई … मर गयी … ओह्ह … आह्ह … चोद … आह्ह … चोद … और चोद … आह्ह आह्ह … करते हुए चुदने लगी।
पूरे रूम में पच … पच … चप … चप की आवाज हो रही थी।

प्रीत और डॉक्टर दोनों मिलकर मेरे पैर चाट रहे थे। मुझे बहुत मजा आ रहा था।

35 मिनट की चुदाई के बाद गुज्जर ने मुझे बेड पर बिठाया और मेरे मुंह में लंड देकर सारा माल अंदर निकाल दिया।

उसके लंड का माल बहुत ही गाढ़ा था। मेरा पूरा मुंह भर गया।

प्रीत मेरे पास आकर मुझे किस करने लगी। फिर उसने मेरे मुंह को साफ किया।

फिर मैंने प्रीत से कहा कि टाइम क्या हो गया है तो वो कहने लगी कि 1.30 बज गया है।

फिर हम दोनों ने जल्दी जल्दी अपने कपड़े साफ किये और मुंह धोया।
मैंने गुज्जर को गले लगाया और फिर नीचे आकर डॉक्टर ने आस पास देखकर दुकान का शटर उठा दिया।

हम दोनों बाहर आ गयीं। बाजार में गाड़ी खड़ी हुई थी।

फिर मैं 2.30 बजे तक यहां आ गयी। अब तुम बताओ कि तुम क्या करना चाहते हो? मुझे अपने साथ रखना चाहते हो या तलाक देना चाहते हो?

मैंने सोचकर सिमर से कहा- मैं तेरी गलती माफ कर सकता हूं अगर तू मेरा एक काम करेगी तो?
वो बोली- मैं तैयार हूं।
मैंने उसको कसम दी कि वो मना नहीं करेगी।

मैंने कहा- अपनी बहन अमनदीप की सील मुझसे तुड़वा दे।
वो एक बार तो सोचने लगी और फिर बोली- ठीक है, मैं अमनदीप की सील तुमसे तुड़वाने के लिए तैयार हूं।

दोस्तो, इस तरह से मेरी बीवी मेरी साली की चुदाई भी मुझसे करवाने के लिए तैयार हो गयी।
आगे की कहानी मैं आपको अगले अंक में बताऊंगा।

आपको मेरी देसी वाइफ की चुदाई स्टोरी कैसी लगी इस बारे में जरूर बताना।

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