यार के दोस्त से भी चुद गई मैं

अरविन्द ने मुझसे कहा- बेबी डरो मत, मुझ पर भरोसा करो. मैं कभी भी तुम्हें किसी भी बुरी स्थिति में नहीं फंसने दूंगा … तुम्हें मजा आएगा. प्लीज हम दोनों पर भरोसा करो.

बस इतना कहकर उन्होंने मेरे बदन से चादर खींच ली और मेरी चूत को किस करने लगे.
मैंने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन उनके उस दोस्त ने मुझे बेड की तरफ धक्का दे दिया और मेरी गर्दन पर किस करने लगा. वो मेरे गालों और मेरे बूब्स को चूसने में लग गया.

मैंने दो मिनट तो आनाकानी की, लेकिन फिर मैंने सोचा कि जैसे एक से चुदने के मजा लेना है, तो दो से क्या घिस जाएगा. ये सोचते ही मुझे मजा आने लगा और मैंने अपने बदन ढीला छोड़ दिया.

अब वो दोनों मेरे बदन को खूब जमकर चूस चूम रहे थे. सहला रहे थे और मसल रहे थे.

मैं उन दोनों के बीच में अकेली नंगी पड़ी थी. वो दोनों पूरी मस्ती से मेरे जिस्म का जमकर भोग लगा रहे थे. एक हुस्न की परी को दो मर्द जमकर चूस और चाट रहे थे.

फिर अरविन्द ऊपर की ओर आ गए और उनका वह दोस्त नीचे मेरी चूत की तरफ चला गया.
वो मेरी चूत के अन्दर तक अपनी पूरी जीभ डाल कर चुत चाटने लगा.

मेरी टांगें खुद ब खुद खुलती चली गईं और मैं अपनी चुत चुसाई का न केवल मजा लेने लगी बल्कि अपनी गांड उठा कर उसके मुँह में अपनी चुत भरने लगी. इधर अरविन्द ऊपर आकर मेरे माथे पर किस करने लगे और अपने दोनों हाथों से मेरे मम्मों को दबाने लगे.

फिर उनके दोस्त ने धीरे धीरे अपना लंड बाहर निकाला और मेरी चूत पर सटा कर लंड का सुपारा मेरी चुत की फांकों में घिसने लगा.

मुझे बड़ी व्याकुलता हो रही थी कि ये आदमी जल्दी से मेरी चुत में लंड पेल कर मुझे चोदना शुरू कर दे.

मैंने अपनी कमर उठा कर उसके लंड को चुत में लेने की कोशिश की, तो उसी समय उसने धीरे से धक्का लगा दिया.

मेरी चूत इस समय इतनी ज्यादा गीली और रसीली हो चुकी थी कि उसका पूरा लंड एक बार में ही अन्दर तक घुसता चला गया.

उसका लंड इतना मोटा था कि मैं चिल्ला उठी और मैंने अरविन्द को अपने दोनों हाथों से अपनी ओर खींच कर उस दर्द को सहने की कोशिश करने लगी.

धीरे धीरे लंड चुत में अन्दर बाहर करते हुए उसका दोस्त मेरी चूत में धक्के लगाने लगा और मेरे जिस्म का मजा लेने लगा.
वह कभी मेरी कमर और मेरे पेट पर हाथ फिराता तो कभी मेरी जांघों पर किस करता.

इधर अरविन्द मेरे दोनों बूब्स को बारी बारी से खींच खींच कर चूस रहे थे.
हम तीनों उस अवस्था में थे कि हमें चुदाई का भरपूर मजा आ रहा था.
मुझे तो इतना अच्छा लग रहा था और मैं सोच रही थी कि मेरी जिंदगी में हर समय इसी तरह की अवस्था बनी रहे.

कुछ ही देर में मुझे अपनी चरम सीमा आते हुए महसूस होने लगी. मैं उन दो मर्दों के जिस्म की गर्मी सह नहीं पाई और मेरी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया.
मैं अपने जिस्म को अकड़ाते हुए पूरी झड़ चुकी थी.

मुझे झड़ता देख कर उनका वो दोस्त भी मेरी चूत में ही झड़ गया और उसने अपने लंड का सारा वीर्य मेरी चूत में भर दिया और निढाल होकर मेरे ऊपर लेट गया.

इसी दौरान अरविन्द थोड़ा पीछे हो गए थे और मुझे पूरी तरह से चुदाई के बाद का मजा लेने दे रहे थे.
अशोक ने थोड़ी देर मेरे ऊपर ऐसे ही लेटने के बाद मेरे साइड में पलटी ले ली.

अब अरविन्द की बारी आ गई थी. अरविन्द ने बिस्तर की चादर के सिरे से मेरी चूत को साफ किया और अपना लंड हिलाते हुए मेरे ऊपर चढ़ गए.

उन्होंने बिना मुझे गर्म किए मेरी चूत में लंड पेल दिया. मैंने उनको हटाने की कोशिश की … क्योंकि मैं अभी-अभी झड़ी थी और पूरी तरह से गर्म भी नहीं हुई थी.

लेकिन अरविन्द नहीं माने और मेरी चूत में ऐसे ही धक्के लगाने लगे.

मेरे मुँह से बहुत तेज तेज आवाजें निकल रही थीं … क्योंकि मैं उनके धक्के सहन नहीं कर पा रही थी.

मुझे ऐसे चीखते हैं और चिल्लाते देख अरविन्द को भी मजा आने लगा था. उन्होंने और तेज तेज धक्के लगाने शुरू कर दिए.
अब तक उनके लंड ने मेरी चूत में अपनी जगह बना ली थी.

मैंने उसी समय अपनी दोनों टांगों से उनको जकड़ लिया ताकि वह तेज धक्के ना लगा सकें. मगर वो मेरे ऊपर चढ़े थे और उनका लंड मेरी चुत में चल रहा था. भले ही धक्के तेज नहीं लगे, मगर उनका लंड मेरी चुत के चिथड़े उड़ाता रहा.

कुछ देर बाद वो भी झड़ गए और उन्होंने भी अपने लंड का सारा वीर्य मेरी चूत में निकाल दिया. मैं भी दो लंड से चुदने के बाद एकदम थक गई थी और अपने बदन को निढाल छोड़कर एकदम सीधी लेट गई. मेरी तेज तेज हांफी चल रही थी और मेरी चूत में हल्का सा दर्द भी हो रहा था.

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