विधवा मौसी का प्यार और चुत गांड चुदाई

विडो सेक्स कहानी मेरे साथ मेरी मौसी की चुदाई की है. एक दिन मौसी ने बीमारी के बहाने मुझे अपने घर बुलाया. फिर उन्होंने अपना जिस्म दिखाकर मुझे गर्म किया. अन्तर्वासना के सभी दोस्तों को मेरा प्यार भरा नमस्कार. मैं विनोद फिर से अपनी एक नई सेक्स कहानी के साथ हाज़िर हूँ. जैसा कि मैंने आप लोगों को अपनी सेक्स कहानी सांवली सी एक लड़की सेक्स की दीवानी में बताया था कि पहले मैं सोचता था कि इन्टरनेट पर मिलने वाली सेक्स कहानियां शायद काल्पनिक होती हैं. लेकिन पिछले कुछ दिनों पहले की एक और घटना ने मुझे ये मानने पर मज़बूर कर दिया कि दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है. बस थोड़ी सी हिम्मत हो तो आप किसी को भी चोद सकते हो.. या किसी से भी चुदवा सकती हो. मेरी ये विडो सेक्स कहानी भी कुछ इसी तरह की है. मेरा ये साल बहुत ही ज़्यादा मस्त गया है. मैंने कभी जीवन में इसकी कल्पना भी नहीं की थी. ये सेक्स कहानी मेरी और मेरी माता जी की चचेरी बहन यानि मेरी मौसी की है. मेरी मौसी की उम्र लगभग 52-53 साल की होगी और वो मेरे ही शहर में रहती हैं. उनके दो बेटे हैं. मौसा जी का देहांत 10 साल पहले ही हो चुका है. मेरी मौसी के दोनों बेटे बाहर नौकरी करते हैं और मौसी अकेली ही रहती हैं. सभी लोग अपने अपने काम में व्यस्त रहते हैं, तो किसी से भी ज़्यादा मिलना-जुलना नहीं हो पाता है. मौसी कभी कभी इतवार को मेरे घर आ जाती हैं और सारा दिन यहीं रुकती हैं. वो मुझे अक्सर ताना देती रहती हैं कि तुझे तो अपनी मौसी का ख्याल ही नहीं है, कभी हाल चाल भी नहीं लेता. मैं बोल देता कि मौसी क्या करूं, सारा दिन ऑफिस में काम करके थक जाता हूँ और इतवार को बीवी और बच्चों के काम निपटाने में ही बीत जाता है. हम लोगों की जिंदगी ऐसे ही चल रही थी. अब तक मेरे मन में मौसी के लिए कोई ख्याल नहीं थे क्योंकि वो उम्र में मुझसे काफी बड़ी थीं और उनके एक 5 साल का पोता और 3 साल की पोती भी थी. हां जब मैं कालेज में था और मौसी जवान थीं .. तब मैं उनको बहुत पसंद करता था. उनका नाम लेकर अक्सर हस्तमैथुन भी कर लेता था लेकिन मेरी उनको छूने की कभी हिम्मत नहीं हुई, ना ही कभी उन्होंने ऐसा कुछ किया, जिससे मुझे लगे कि वो मुझे पसंद करती हैं या मेरे साथ सेक्स करना चाहती हैं. दोस्तो, जैसा कि मैंने आप लोगों को बताया कि मेरी मौसी अकेली ही रहती हैं. उनके घर में और कोई भी नहीं रहता है. एक दिन मैं ऑफिस में ही था कि मेरी मौसी का फोन आया और उन्होंने बोला कि आज वो कुछ थकी हुई सी फील कर रही हैं और तबीयत भी सही नहीं लग रही है. मैंने बोला कि मैं घर से किसी को भेज देता हूँ. उन्होंने बोला कि क्यों सबको परेशान करेगा, तू ही चला आ. मैंने अपने ऑफिस से आधा दिन की छुट्टी ले ली और फ़ौरन ही मौसी के घर पहुंच गया. जैसे ही मैंने डोरबेल बजाई तो मौसी ने दरवाज़ा खोला. ऐसे देखने में तो वो बिल्कुल सही लग रही थीं, उन्होंने उस समय गाउन पहना हुआ था. मैंने अन्दर आकर पूछा- क्या हुआ मौसी? वो बोलीं- तू बैठ, मैं चाय बनाकर लाती हूँ. मैंने कहा- नहीं मौसी, आप रहने दो, मैं ही बना देता हूँ. तो वो बोलीं- तू बैठ न … मैं बनाकर लाती हूँ. मैं आराम से बैठ गया और मौसी चाय बनाकर ले आयीं. चाय की ट्रे को रखने के लिए मौसी जैसे ही झुकीं, तभी अचानक से मेरी नज़र उनके गाउन के गले से दिखतीं उनकी बड़ी-बड़ी चुचियों पर जा पड़ी. उस पल वो भी मुझे तिरछी नज़रों से देख रही थीं. जैसे ही मैंने उनकी तरफ देखा, तो वो मुस्करा दीं और मेरे बगल में ही बैठ कर चाय पीने लगीं. मैंने फिर से पूछा कि क्या हुआ मौसी? तो वो बोलीं- कुछ नहीं शरीर में थोड़ा सा दर्द है और सिर में भी. अकेले कुछ मन भी नहीं लग रहा था तो सोचा तुझे ही बुला लूँ. मैंने बोला- आप लेट जाओ, मैं आपके सिर में बाम लगा देता हूँ और पैरों में मालिश कर देता हूँ. वो बोली- हां, ये ठीक रहेगा. मौसी लेट गईं और उन्होंने अपने गाउन को घुटनों तक सरका लिया. मैंने पहली बार मौसी की नंगी टांगें देखी थीं, बहुत ही गोरी और सुडौल टांगें थीं. उनको देख कर मेरा लंड खड़ा होने लगा था लेकिन फिर मैंने अपने आप पर काबू किया और मालिश करने लगा. मौसी ने अपनी आंखें बंद कर लीं और उनकी सांसें थोड़ी भारी होना शुरू हो गई थीं. मैंने उनसे बात करना शुरू कर दिया, तो वो केवल हां या ना में ही जवाब दे रही थीं. मुझे ये नहीं पता था कि उनके मन में कुछ और ही चल रहा था.

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