विधवा मौसी का प्यार और चुत गांड चुदाई

तभी जैसे मैंने उनकी दुखती रग पर हाथ रख दिया.
मैंने उनसे पूछा- मौसी आप अकेले कैसे समय काटती हो?

वो बोलीं- क्या करूं बेटा … तेरे दोनों भाई अपने परिवार के साथ बाहर चले गए हैं. तेरे मौसा जी के जाने के बाद तो मैं बिल्कुल अकेली पड़ गई हूँ.

इतना कह कर वो रोने लगीं और उठ कर मेरे गले से लग कर बोलने लगीं- कभी कभी मैं बहुत अकेली फील करती हूँ.

मौसी अभी भी मेरे सीने से लगी रो रही थीं. मैंने भी उनको गले से लगा कर पकड़ रखा था.

फिर वो मुझसे कसकर चिपक गईं और उनकी चुचियां मेरे शरीर से रगड़ रही थीं … या ये कहो कि मेरे और उनके शरीर के बीच में दबी हुई थीं.

उनके शरीर की गर्मी से मेरा लंड खड़ा होने लगा था.
वो भी शायद यही चाह रही थीं. मेरे लंड थोड़ा सा उनके जांघ से टच हो रहा था.

तभी उन्होंने मुँह ऊपर उठा कर अपने होंठ मेरे होंठों से चिपका दिए और मुझे चूमने लगीं.

मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था लेकिन फिर भी मैंने अपना मुँह हटाते हुए कहा- मौसी आप ये क्या कर रही हो … मैं आपके बेटे के बराबर हूँ.

मौसी ने कहा- बेटा, आज मुझे मत रोको, तुम्हारे मौसा जी के जाने के बाद मैंने आज तक अपनी जिंदगी अपने लिए नहीं जी है. सभी अपनी अपनी दुनिया में मस्त हैं. मैं जानती हूँ कि तुम्हारी उम्र के आदमी भी बाहर सेक्स करने के सपने देखते हैं. हालांकि मैं उम्र में तुमसे बड़ी हूँ, लेकिन मेरा ये वादा है कि तुमको किसी भी जवान औरत से ज़्यादा सुख दूंगी.

मैंने कहा- आप मेरी मौसी हैं.

मौसी- तुम बस ये समझो कि आज हम दोनों के बीच में कोई रिश्ता नहीं है. बस मैं एक औरत हूँ और तुम एक मर्द हो. ये औरत तुमसे थोड़ी सी खुशी चाहती है बस. बेटा मैं चाहती तो अपने ऑफिस में किसी मर्द को पटा लेती या कोई किराये का मर्द बुला सकती थी. लेकिन मुझे पता है कि इस सब से मैं बदनाम हो जाऊंगी. अब आगे तेरी मर्ज़ी है कि तू अपनी मौसी का साथ देता है या उसको ऐसे ही तड़पते हुए छोड़ देगा. फ़ैसला तेरे हाथ में है. मैं बदनाम होना नहीं चाहती और अपनी प्यास भी मिटाना चाहती हूँ. अगर तू मेरा अपना होकर मेरा साथ नहीं देगा, तो कौन देगा!

तभी मैं बोला- नहीं मौसी, मैं आपको वो सारी खुशियां दूंगा, जो आप चाहोगी. मैं आपको अपनी पत्नी की तरह प्यार करूंगा. आख़िर घर वाले घर वालों के काम नहीं आएंगे, तो कौन आएगा!

ये सुनकर मौसी बहुत खुश हो गईं और हम दोनों एक दूसरे से कस कर चिपक गए. एक दूसरे के होंठ चूसने लगे.
मैं अपने एक हाथ से मौसी की चुचियां दबा रहा था और मौसी अपने एक हाथ से मेरा लंड सहला रही थीं.
जिससे मुझे बहुत मजा आ रहा था.

कुछ देर बाद वो मेरे लंड को मुँह में भर कर चूसने लगीं. तब मैंने कहा- मौसी, मुझे भी तो अपना दूध पिलाओ.

उन्होंने अपनी नाइटी एक ही झटके में उतार दी. उनकी बड़ी बड़ी चूचियां मेरी आंखों के सामने बिल्कुल नंगी थीं.
मैं मौसी के मम्मों को बहुत जोर से दबाने लगा. उनकी बड़ी बड़ी चूचियां हाथ में नहीं आ रही थीं.

मैं अपने दोनों हाथ से उनकी एक चुची दबा रहा था और एक चूची के निप्पल को दांत से काट रहा था, जिससे उनको भी बहुत मजा आ रहा था.

मौसी ने मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.
अब तो मुझे अपने आपको रोकना बहुत ही मुश्किल हो गया था … क्योंकि किसी भी आदमी का लंड जब कोई औरत अपने नर्म और मुलायम होंठों से चूसती है, तो बहुत मजा आता है. यहां तक कि उसकी सिसकारियां भी निकलने लगती हैं.

मैंने अपना संयम बनाए रखने की बहुत कोशिश की. पर आखिर उन्होंने लंड चूस चूस कर मेरा पानी निकाल ही दिया और फ़िर वहीं चादर से मेरा लंड पौंछ दिया.

फिर वो अचानक से मुझे छोड़ कर बाथरूम में गईं और अपनी चूत को अच्छे से साबुन लगा कर धोकर आ गईं.

उसके बाद वो बिस्तर पर लेट गईं. उनके पेट की वजह से उनकी चूचियां दाएं बांए हिल रही थीं.

मैंने उनकी चूत पर एक चुम्मा लिया.
वो जोर से सिसक पड़ीं.

मैंने उनकी चूत चुसाई शुरू कर दी और कुछ ही देर में मौसी की चुत चूस कर उनको एक बार झाड़ दिया.

कुछ पल निढाल रहने के बाद मौसी की आंखों में ख़ुशी दिखने लगी.
वो मुस्कुराते हुए कहने लगीं- अब मुझे चोदो राजा … मेरी चूत तेरे हवाले है.

मैंने उनको बिस्तर पर हाथ रख कर नीचे खड़ा किया और पीछे से उनकी चूत में लंड फंसा कर एक जोरदार धक्का दे मारा.

मौसी ‘आह्हह आआह्ह ..’ की आवाज़ करते हुए बिस्तर पर ढुलक गईं और मैं धक्के लगाने लगा.

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