विधवा मौसी का प्यार और चुत गांड चुदाई

मैं बहुत जोर जोर से उनकी चूत चुदाई कर रहा था और वो भी अपने चूतड़ों को आगे पीछे करके चूत चुदाई का मजा ले रही थीं.

जब मैं उनको पीछे से चोद रहा था, तब उनकी भारी गांड देख कर मैंने उसी वक्त सोच लिया था कि उनकी गांड ज़रूर मारूंगा.

उस दिन दो घंटे में मैंने मौसी को 3 बार चोदा और हम दोनों थक कर नंगे ही एक दूसरे से चिपक कर लेट गए.

थोड़ी देर बाद मौसी धीरे धीरे मेरे लंड को सहलाने लगीं और अचानक ही उन्होंने मेरे लंड को जोर से दबा दिया.

मैं हड़बड़ा कर उठ गया और मौसी की तरफ़ देखने लगा. उनका हाथ अभी भी मेरे लंड पर था.

तब मैंने कहा- मौसी मैंने आपको 3 बार चोदा, अभी मन नहीं भरा क्या?
मौसी हंस कर बोलीं- बेटा, तेरी जवानी के साथ ही मुझे भी जवानी आ गई है. तूने ऐसी जमकर चुदाई की है कि मेरी सालों की प्यास जाग गई है.

मैं भी मौसी की तरफ वासना से देखने लगा.

मौसी ने कहा- चलो … अब नहा लो, फ़िर मैं तेरे लिए नाश्ता बना देती हूँ.
मैंने कहा- आप भी मेरे साथ नहाएंगी?
मौसी ने कहा- नहीं.

पर मैं उनका हाथ पकड़ कर बाथरूम में खींच ले गया और शॉवर खोल दिया.
मौसी की बड़ी बड़ी दूध से भरी चूचियों को मैं अपने हाथ से दबाने लगा.

वो अपने हाथ को मेरे लंड पे ले गईं और लंड को जोर से मसल दिया.
मैंने कहा- मौसी लंड को साबुन लगा कर मलो.

मेरी मौसी मेरे लंड पर साबुन मलने लगीं और थोड़ी देर में ही ढेर सारा झाग बन गया.
मौसी ने कहा- बेटा, तू भी तो मेरी चूत को साफ़ कर दे.

मैंने भी साबुन उठा कर उनकी चूत पर रगड़ना शुरू किया और थोड़ी देर में ही उनकी चूत भी झाग से भर गई.

वो बोलीं- बेटा, अब अपना झाग से भरा हुआ लंड मेरी बुर में पेल दो.

मैं हंसने लगा क्योंकि मेरा इरादा तो कुछ और ही था, मैंने कहा- अभी थोड़ा और मजा ले लो मौसी.

मैं उनकी चुची को मुँह में भर कर चूसने लगा. उनकी चुची चूसने में मुझे बहुत मजा आता था क्योंकि मौसी की चूचियां बहुत बड़ी बड़ी थीं.

फ़िर मैं अपने हाथ को पीछे से उनकी गांड पर ले गया और सहलाने लगा. धीरे धीरे अपनी एक उंगली उनकी गांड में डाल दी.

तब मौसी उचक पड़ीं और बोलीं- बेटा क्या इरादा है … कहीं मेरी गांड तो नहीं मारनी है!
मैंने कहा- मौसी आप सही सोच रही हैं. मैं आपकी गांड ही मारना चाहता हूँ.

मौसी ने हाथ जोड़ कर कहा- नहीं बेटा मुझ पर दया करो, मैंने आज तक कभी गांड नहीं मरवाई है और मैं गांड नहीं मरवाऊंगी.
मैंने कहा- आप मेरे लिए इतना भी नहीं कर सकती हो, बस यही प्यार है आपका?

इस बात पर मौसी ठंडी पड़ गई थीं.

फ़िर वे बोलीं- अच्छा तुम पहले अपनी उंगली मेरी गांड में डाल देना, जिससे मेरी गांड में लंड जाने की थोड़ी सी जगह हो जाए.
मैंने कहा- ठीक है.

मैं मौसी की गांड पर अपना हाथ ले जाकर सहलाने लगा. फ़िर मैं मौसी की गांड को चूमने लगा और कभी कभी दांत से हल्के से काट भी लेता.

मैंने साबुन उठा कर उनकी गांड पर बहुत सारा झाग बनाया और उनकी गांड के छेद में धीरे धीरे अपनी उंगली अन्दर बाहर करने लगा.
मौसी ‘आआह आआह्हह ..’ कर रही थीं.

इसी बीच मैंने अपने लंड पर भी साबुन लगा कर चिकना कर लिया.

अब मैं अपने लंड का सुपारा मौसी की गांड पर टिका कर घिसने लगा और धीरे से धक्का दे मारा.
मेरी विडो मौसी की चीख निकल गई- आआह्ह मर गईईई … राअम्मम्म रे … ऊफ़्फ़ बाहर कर लो बेटा … बहुत दर्द हो रहा है.

मैंने लंड फंसाए हुए कहा- मौसी अभी थोड़ा सहन कर लो … फिर आपको बहुत मजा आएगा.
मौसी चुप हुईं तो मैंने एक और करारा धक्का दे मारा.

मौसी फिर से कराह पड़ीं- आह्हह माअर डाल ज़ालिम … क्या आज मार के ही दम लेगा क्या!

मैं उनकी गांड में अपना पूरा मूसल पेल कर धकापेल झटके मारने लगा.
थोड़ी देर बाद मौसी को मजा आने लगा और फ़िर मैं कुछ देर बाद झड़ने लगा.

मैंने अपनी मौसी की गांड मार ली थी और अब तो मौसी के सभी छेद रमा हो गए थे.

मौसी और मैं काफ़ी देर तक नंगे ही एक दूसरे से लिपटे रहे.

फिर मैं कपड़े पहनते हुए बोला- मौसी अब मैं चलता हूँ.
मौसी ने मुझे गले से लगा लिया और बोलीं- बेटा आज तूने मुझे जो मज़ा दिया है, उसके लिए मैं हर रात तड़पती हूँ. अब अपनी मौसी को कभी अकेला मत छोड़ना … दो तीन दिन के बीच में मेरी प्यास बुझाने आते रहना.

मैंने कहा- ठीक हैं मौसी आपकी परेशानी मैं दूर नहीं करूंगा, तो कौन करेगा.
फिर मैंने उनके होंठों को चूमा और वापस अपने घर आ गया.

Pages: 1 2 3 4

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *