बन गयी सत्यम की दुल्हन

मैं- अब क्या करना है, कहिये?
सत्यम- एक वचन दो?
मैं- बोलिए.
सत्यम- सदा मेरी रहोगी ना. अब तुम्हें गांड मराने की आदत पड़ जायेगी तो तुम किसी और से तो नहीं मरवाओगी ना?
मैं- पता नहीं, अब क्या होगा, और आपकी बनकर क्यों रहूँ. क्या आप मेरे पति हैं?
सत्यम- हाँ मैं तेरा पति हूँ, तू मेरी पत्नी है.
मैं- हिश्, कहाँ हुई हमारी शादी?

अचानक सत्यम को जाने क्या हुआ, वो बोले- चल मैं पहले तुझसे शादी करता हूँ.
मैंने बहुत कहा कि अरे मैं तो मजाक कर रही हूँ. पर वो नहीं माने. उन्होंने मुझे थोड़ा ठीक से तैयार किया. अपनी बीवी का एक बड़ा दुपट्टा लेकर मेरे सिर और चेहरे को ढक दिया.

हम रास्ते से दो पुष्पहार और मिठाई लेकर मन्दिर पहुंचे. उन्होंने मुझे कह दिया था कि मैं कुछ बोलूं नहीं और निगाहें नीचे ही रखूं. मैं बिल्कुल लड़की लग रही थे. मन्दिर के पंडितजी से सत्यम ने कुछ बात की. पंडित जी ने सहमति में सिर हिलाया. कुछ मन्त्र पढ़े. सत्यम ने मेरे गले में माला डाली और मैंने उनके गले में. सत्यम ने दुपट्टे के नीचे से मेरी मांग में सिंदूर भरा. पंडित जी को दक्षिणा दी. मिठाई का प्रसाद बांटा. मुझे थामकर सत्यम मन्दिर से बाहर आये और ऑटो में बैठाकर अपने घर ले आये.

मेरी शादी हो गयी. मैं सत्यम की ब्याहता बन गयी. मैंने घर आकर सत्यम के साथ भोजन किया.
मेरी गांड तो वो पहले ही मार चुके थे. पर विवाह के बाद यह पहला मिलन था.

सत्यम ने मुझे बेड पर बैठाया. फिर मेरा घूंघट हटाया और मुंह दिखाई में मुझे एक सोने का हार दिया. यह उनकी बीवी का था. मैंने झुककर उनके चरण स्पर्श किये.
सत्यम ने कहा कि वो मेरे साथ ठीक उसी तरह से सुहागरात मनाएंगे जैसे उन्होंने उनकी पहली बीवी चांदनी के साथ मनाई थी.

उन्होंने पहले मेरे पैरों को चूमा. पंजों के हर भाग पर चूमते हुए वो आगे बढ़े. मेरी उम्र अठारह वर्ष से ऊपर हो गयी थी लेकिन मेरे शरीर पर बाल नहीं थे. पूरा शरीर लड़कियों की तरह चिकना था. पंजे एक बाद वो पैरों को चूमते हुए जाँघों तक आये. फिर मेरे सारे कपड़े निकालकर उन्होंने मेरे शरीर पर कोई दस हजार चुम्बन किये होंगे. केवल मेरे लंड और उसके आसपास के भाग को छोड़कर उन्होंने सब जगह चूमा. अब भी मेरा लंड खड़ा नहीं हुआ था. मुझे अच्छा लगा.

सत्यम ने बताया कि चांदनी को दो घंटे तक तो वे चूमते ही रहे थे.
फिर उन्होंने बताया कि चांदनी बहुत शरमा रही थी. मैं भी शरमाने की एक्टिंग करने लगा.

उसके बाद उन्होंने अपने कपड़े खोल दिए. उनका लंड कल से भी बड़ा लग रहा था. आज उनकी झांट के बाल कटे हुए थे. मेरा हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया और पूछा- कैसा लगा?
मैंने कहा- बहुत अच्छा है.
उन्होंने कहा- चांदनी के साथ पहली बार तो मैं मुंह में ही झड़ गया था.

मैं उनकी भावना समझ गया और लंड चूसने लगा. पंद्रह मिनट तक चूसने के बाद वे जोर जोर से धक्के लगाने लगे. और अगले ही मिनट मुंह में झड़ गये.
मैंने कहा- क्या मैं आपकी चांदनी से कम हूँ जी?
सत्यम मुस्कुरा दिए.

मैंने सत्यम को पानी लाकर दिया… सत्यम ने मुझे अपनी गोद में बैठा लिया और अपने भूतकाल के बारे में बताते हुए मेरे निप्पल मसलते रहे.
थोड़ी देर में उनका लंड फिर तैयार हो गया.
उन्होंने मुझे उलटा लिटा दिया और पैर चौड़े कर दिए.
मेरी गांड की तारीफ़ करते हुए तेल डाला. छेद कल ही खुल चुका था, उन्होंने अपना लंड मेरी गांड पर रखा और दो तीन झटके में पूरा अंदर उतार दिया. आज ज्यादा दर्द नहीं हुआ. चूँकि सत्यम अभी झड़े थे अतः दूसरा दौर लम्बा चला. बीस पच्चीस मिनट तक उन्होंने मेरी गांड मार कर मजा लिया.

मैंने भी उनका भरपूर सहयोग किया, मैं भूल गया था कि मैं एक छोटे से कस्बे से निकलकर भोपाल पढ़ने आया हूँ. मेरी दुनिया ही बदल गयी. उस रात मुझे सत्यम ने मेरे कमरे में नहीं आने दिया. रात में चार बार मेरी गांड मारी. मुझे वाकई लगा कि मैं उनकी बीवी हूँ.

दूसरे दिन उन्होंने मुझे पांच सौ रूपये दिए और समझाया कि मैं दो जिन्दगी जियूं. जब मैं उनके साथ रहूँ तो उनकी बीवी बनकर रहूँ और जब मैं कमरे पर रहूँ या कॉलेज में रहूँ तो विद्यार्थी बनकर रहूँ. सेक्स भी करूं और पढ़ूं भी.

शुरू में मुझे यह कठिन लगा. लेकिन दस पन्द्रह दिन तक रोज गांड मरवाने के बाद मैंने दोनों जिन्दगी शुरू कर दी. मैं चंदा भी रही और चंद्रप्रकाश भी.

यह थी मेरी चंद्रप्रकाश से चंदा बनने और चंदा से सत्यम की बीवी बनने की कहानी. एकदम सच्ची कहानी है. आगे सत्यम के साथ मेरा और कैसा जीवन चला. सत्यम के अलावा कैसे और कौन दो सौ मर्द मेरी जिन्दगी में आये. यह सब मैं अगली कहानी में बताऊँगी.

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