वासना भरी भाभी की चूत की चुदाई

तभी उसने कहा- आओ रुतुल, अंदर आ जाओ.
हम दोनों अंदर चले गए. हम यहां-वहां की बातें करने लगे.

मैंने कहा- घर पर कोई नहीं है क्या?
वह बोली- हम सब लोग मुम्बई गए हुए थे मेरे भाई के यहाँ. उसके बाद मेरे पति वहाँ से सीधे दिल्ली चले गए काम के लिए. बच्चे अपने मामा के यहाँ पर रुक गये और मैं अकेली ही यहाँ आ गई.

फिर वह मेरे लिए पानी लेकर आई.
मैंने कहा- आप तो लंच करने के लिए कह रही थीं. क्या सिर्फ पानी ही पिलाओगी?
उसने कहा- ठीक है. हम लंच करते हैं. तुम वहां टेबल पर आ जाओ.

वाकई में उसने लंच बहुत अच्छा बनाया था. हमने साथ में लंच किया.
मैंने कहा- आप सच में खाना बहुत ही अच्छा बनाती हो.
वह बोली- मुझे ‘आप’ मत कहा करो. ऐसा लगता है जैसे मैं बुड्ढी हो गई हूँ। मुझे ‘तुम’ कहकर बुलाया करो.
मैंने कहा- ओके, तुम खाना बहुत अच्छा बनाती हो.

वह खड़ी होकर मुझे थोड़ा सा और खाना परोसने के लिए उठी और मेरी प्लेट में खाना डालने लगी तो उसका पल्लू दाल के अंदर गिर गया.
उसने कहा -शिट…

उसके बिना बाजू वाले ब्लाऊज़ में उसके बूब्स मेरे सामने ही थे. मेरा मानसिक संतुलन बिगड़ रहा था. उसके बूब्स जो उसके ब्लाउज से आधे बाहर निकलने वाले थे तो मेरी नज़र वहीं पर जाकर रुक गई.
वह भी मुझे देखने लगी. वह बोली- क्या देख रहे हो?
मैंने कहा- कुछ नहीं.
उसने कहा- मैं अभी चेंज करके आती हूँ।

जब वह चेंज करके आई तो उसने हल्के पिंक कलर की नाइटी पहन रखी थी जिसमें से उसके अंडरगार्मेंट्स साफ-साफ दिखाई दे रहे थे. अब तो मेरा हाल और भी बुरा होने लगा था.
हमने लंच खत्म किया और मैंने उससे कहा- ठीक है, अब मैं चलता हूँ. लंच के लिए थैंक्स. लंच बहुत ही अच्छा बना था.
उसने कहा- तुम्हें अभी कुछ काम है क्या?
मैंने कहा – नहीं.
वह बोली- तो फिर थोड़ी देर और रुक जाओ ना, मैं आइसक्रीम भी बनाकर ले आई हूँ। थोड़ी सी खाकर चले जाना.

पहले तो मैंने मना कर दिया फिर कहा- ठीक है, मैं रुक जाता हूँ।
मैं वहीं सोफे पर बैठकर टीवी देखने लगा.

उसके घर का ऐ.सी. भी ऑन था क्योंकि बाहर बहुत गर्मी पड़ रही थी. वैसे सच कहूँ तो मुझे भी बाहर इतनी गर्मी में जाने का मन नहीं हो रहा था. तभी वह कांच के दो ग्लास में आइसक्रीम लेकर आ गई.
एक ग्लास उसने मेरे हाथ में दिया और दूसरे से वह खुद खाने लगी. मैंने उससे कहा कि यह भी बहुत अच्छी है.
वह बोली- कौन?
मैंने कहा- आइसक्रीम.

वह बोली- मैं तो सोच रही थी तुम मेरे बारे में बात कर रहे हो.
मैंने कहा- तुम भी बहुत अच्छी हो.
वह पूछने लगी- तुम्हें मेरे अंदर क्या अच्छा लगता है?
उसकी यह बात सुनकर मैं मुस्कराने लगा तो वह बोली- मैं जानती हूँ तुम्हें मेरे अंदर क्या अच्छा लगता है.
मैंने कहा- क्या जानती हो तुम?
वह बोली- जब मेरी साड़ी दाल में गिर गई थी तो तुम क्या देख रहे थे. क्या तुम्हें वे अच्छे लगे?
मैंने अनजान बनते हुए कहा- क्या?
वह बोली- झूठ मत बोलो, मुझे सब पता है. तुम मेरे बूब्स देख रहे थे. क्या तुमको मेरे बूब्स अच्छे लगते हैं.

उसने फिर पूछा- क्या तुम उनको पूरा देखना चाहते हो?
मैं तो हैरान रह गया. मुझे समझ नहीं आया कि क्या कहूँ।
मैंने कहा- जब कोई सामने से दिखाएगा तो कौन गधा होगा जो नहीं देखना चाहेगा.

उसने आइसक्रीम टेबल पर रखी और अपनी नाइटी के बटन खोल कर नीचे करने लगी. उसने अपनी ब्लैक ब्रा भी निकाल दी. मैं तो उसको देखता ही रह गया कि ये क्या हो रहा है. उसका साइज़ लगभग 36 के आस-पास तो होगा ही.
वह मेरे सामने दो मज़ेदार रसीले बूब्स खोले हुए बैठी थी.
उसने कहा- अब बताओ कैसे लगते हैं तुम्हें?
मैंने कहा- ये तो कमाल के हैं … क्या मैं इनको छूकर देख सकता हूं?
वह बोली- यह भी कोई पूछने की बात है. टच करने के लिए ही तो दिखाए हैं.

मैं खड़ा होकर उसकी बगल में बैठ गया और उसके बूब्स को दबाने लगा. उसने अपनी आंखें बंद कर लीं और मुझे पागलों की तरह किस करने लगी. मैं भी उसको बांहों में लेकर किस करने लगा.
हमारी दोनों की जीभ आपस में एक होती जा रही थी. मैं उसके बूब्स को दबा रहा था और उसकी पूरी बॉडी को सहला रहा था.

धीरे-धीरे मैंने एक हाथ उसकी पैंटी के ऊपर लगाकर देखा तो वह पूरी गीली हो चुकी थी. मैंने कहा- तुम्हारी पैंटी तो गीली हो चुकी है.
वह बोली- जब से बाइक पर तुम्हारा टच हुआ है तब से मेरी चूत में खुजली हो रही है. गीली नहीं होगी तो और क्या होगा.
वह बोली- चलो अब कपड़े उतारो.
मैंने कहा- तुम खुद ही उतार लो

Pages: 1 2 3