भानू और मैंने काकी को चोदा

फिर उसने मुँह ऊपर उठाया और काकी को चूमने लगा और चूमते-चूमते उसने एक हाथ से काकी के लहंगे का नाड़ा खोल दिया और लहंगे को हल्का सा नीचे खींचा तो काकी का लहंगा नीचे गिर गया। फिर काकी ने अपने पैरो से लहंगे को एक साईड में कर दिया, अब काकी केवल लाल रंग की पेंटी में थी और काकी का पेट थोड़ा बाहर निकला हुआ था और उनकी नाभि काफ़ी गहरी थी। फिर 2-3 मिनट तक एक दूसरे को चूमने के बाद काकी और भानू अलग हुए और फिर काकी नीचे हुई और भानू की धोती उतार दी। उसने बड़ा कच्छा पहना हुआ था जैसा अक्सर गाँव के लोग पहनते है। फिर काकी ने कच्छे के ऊपर से ही भानू का लंड दो तीन बार सहलाया और भानू ने आँखें बंद कर ली। फिर काकी ने एकदम से एक ही झटके में उसका कच्छा नीचे कर दिया और उसका लंड तनतनाता हुआ बाहर आ गया।

उसका लंड बड़ा था कम से कम 8 इंच का होगा, लेकिन पतला था फिर काकी ने उसका लंड सहलाया और वो आँखें बंद करके मज़े ले रहा था। फिर काकी ने उसका लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी। फिर 2-3 मिनट तक काकी खुद चुसती रही। फिर भानू अपने दोनों हाथ काकी के बालों पर ले गया और उन्हें सहलाने लगा और बीच बीच में उनके मुँह को आगे पीछे भी करता। फिर 10 मिनट तक लंड चूसने के बाद उसने काकी को खड़ा किया और फिर दोनों ने 2-3 लिप किस किए और वो काकी को गेहूँ की बोरीयों के ढेर के पास ले गया और उन्हें बोरीयों के सहारे खड़ा कर दिया। अब उन दोनों की पीठ मेरी तरफ थी और काकी बूब्स टिकाकर और बोरीयाँ पकड़ कर खड़ी थी। फिर उसने काकी की पेंटी घुटनो तक नीचे की और घुटनो के बल बैठकर उनकी गांड और चूत चाटने लगा। फिर वो उनकी चूत में उंगली करके उनकी चूत चाटता रहा। अब काकी भी अपनी आँखें बंद करके मस्त हो रही थी और आहें भर रही थी, आह अहह आ उम्म्म्मममममम आआहह, अब काकी ने अपनी गांड हिलानी चालू कर दी।

भानू : सेठानी आपकी चूत इतनी मीठी है कि इस पर से अपनी जीभ हटाने का मन ही नहीं करता है।

काकी : अया हहह्ह्ह्हह उम्म्म्ममम तो कौन कह रहा है कि जीभ हटा, बस तू तो चाटता जा।

भानू : सेठानी अभी हुकुम चोद कर गये है, तो अभी तो मेरा लंड आपको संतुष्ट कर ही नहीं पायेगा।

काकी : अरे तू उसकी बात छोड़, उउउम्म्म्मममम, वो किसी भी औरत की अहहहह जान निकाल सकता है। अंजू की भी क्या किस्मत है? (अंजू मेरी माँ का नाम है) रोज़ ऐसा तगड़ा लंड लेती होगी।

भानू : जब हुकुम आते है आप कौन सा मौका छोड़ते हो, अपनी गांड पेश कर देते हो।

काकी : तू, आआहह उउम्म्म्मम अपने काम पर ध्यान लगा, ये हमारे देवर भाभी के बीच की बात है।

दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

भानू अब खड़ा हो गया और अपना लंड काकी की चूत पर रगड़ने लगा। फिर काकी ने उसका लंड अपने हाथ में पकड़ा और अपनी चूत के छेद पर लगा दिया। फिर भानू ने एक ज़ोरदार झटका मारा और उसका लंड काकी की चूत में घुस गया। फिर 2 मिनट तक वैसे ही खड़े रहने के बाद और उनके कंधे और गर्दन पर चूमने के बाद, भानू ने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। अब काकी ने भी आहें भरनी शुरू कर दी, लेकिन धीरे ही, आआअहह उफफफफफफफ्फ़ हुउूऊहह, वो धीरे-धीरे तेज़ धक्के मारने लगा और 3-4 मिनट में ही छूट गया और अपना लंड बाहर निकाल लिया। मेरी तो हंसी निकल गयी कि इतना बड़ा लंड और 10-15 मिनट भी नहीं रुक पाया। अभी तो मेरा भी पानी नहीं निकला था। फिर काकी ने साईड में पड़ी अपनी चुन्नी उठाई और अपनी चूत में से उसका पानी साफ करने लगी। मुझे उम्मीद नहीं थी कि वो इतनी जल्दी झड़ जायेगा। फिर उसके बाद में एकदम से अन्दर गया तो काकी सामान्य थी और मुझे देखकर बोली कि आ गया मुझे चोदने। मेरे तो पैरों तले जमीन ही खिसक गई थी और में हैरान होकर काकी को देख रहा था। तभी काकी बोली कि चिंता मत कर, भानू ने मुझे सब कुछ पहले ही बता दिया है, चल अब नंगा हो जा और आ जा हमारे साथ। फिर मैंने अपने कपड़े खोले और काकी से लिपट गया।

फिर भानू बोला कि हुकुम मुझे माफ़ करना तो मैंने कहा कि कोई बात नहीं, मुझे तो काकी की चूत चाहिये थी और वो मुझे मिल गई। फिर काकी ने कहा कि अब ज्यादा देर मत करो और मुझे डबल लंड का मजा दो। फिर काकी ने मेरा लंड चूसा और मैंने उनकी चूत चाटी। फिर हम दोनों ने मिलकर काकी को चोदा। उस एक महीने में हम तीनों ने मिलकर बहुत मजे लिये ।।

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