बॉस की गरम सेक्सी बीवी-1

उसने कपड़े उतार दिये थे और फिल्मी स्टाईल में ही एक टॉवल से खुद को लपेट लिया था। नीचे वह क्या पहने थी क्या नहीं.. यह तो वही जाने लेकिन नितम्ब से नीचे उसकी गोल पुष्ट टांगे जांघों से ही नंगी थीं और ऊपर कंधे, बांहों के साथ सीना भी इस हद तक तो खुला था कि उसकी क्लीवेज दिख रही थी।

“चलो शुरू करो.. वह अलमारी में वैक्स हीटर, वैक्स, वैक्स स्ट्रिप्स, टैल्कम पाउडर, स्ट्रिंजर और कोल्ड क्रीम रखी है, सब यहाँ टेबल पे रख लो और समझ लो कि एक चीज़ तो यह कि वैक्स हल्का गर्म ही लगाना है तो उसके लिये स्पेटुला पे बहुत हल्की लेयर ले कर एकाध सेकेंड हवा में रख कर फिर स्किन पे गिराते ही फ़ौरन फैलानी है.. देर नहीं करनी है कि स्किन जल जाये।”
“अब मैं कौन सा एक्सपर्ट हूँ?”
“नहीं हो तो हो जाओ.. जल गया तो समझ लेना फिर!” वह धमकी देते हुए मेरे सामने बैठ गयी।

मन ही मन उसे फिर गालियाँ देते मैंने वह सारा सामान उठा कर सामने राखी छोटी टेबल पे सजा लिया। वैक्स हीटर को लगा कर उसने जितना वैक्स बताया मैंने उसमे डाल दिया और उसे ऑन कर दिया। स्ट्रिप्स के पैकेट से एक स्ट्रिप निकाल ली और स्पेटुला संभाल लिया।

“पहले हाथ पे करना फिर ऊपर और बैक की तरफ और फिर पैर करना।” उसने आदेशात्मक स्वर में कहा।

हालाँकि यह कोई मेरा पसंदीदा काम नहीं था लेकिन फिर भी ठरकी मन की बात थी कि इतना सोच लेना ही काफी था कि मुझे उसे स्पर्श करने का मौका मिल रहा था तो मैंने थोड़े ध्यान से उसने जैसे बताया वैसे करना शुरू किया।

पहले थोड़ा पाउडर लगा देता, फिर स्पेटुला से वैक्स लेकर उसकी स्किन पे बालों के रुख के हिसाब से फिराता, फिर स्ट्रिप से उसे दबाता और अगले पल में उखाड़ देता। इसके बाद स्ट्रिंजर मल कर कोल्ड क्रीम लगा देता।
फिर एक हाथ साफ़ हो गया तो दूसरा हाथ थाम लिया। फिर दोनों हाथ के बाद कंधे, ऊपरी सीने और पीठ के ऊपरी हिस्से को साफ़ किया और फिर नीचे दोनों पैरों को घुटनों से साफ़ कर दिया।

“अब बगलों के करो।” वह टेबल पर लेटती हुई बोली और दोनों हाथ ऊपर उठा लिये।

उसकी बगलों में कोई बहुत ज्यादा बाल नहीं थे लेकिन साफ करने लायक तो थे ही। वहां इस्तेमाल होने वाले डिओ या परफ्यूम की सुगंध मेरे ठरकी मन में हलचल मचाती मेरे सामान को खड़ा किये दे रही थी। लेकिन फिर भी पूरी तरह एकाग्र रहते, पूरी तन्मयता से मैंने उसकी वैक्सिंग कर दी।

“देखा.. कैसे एक ही बार में मैंने तुम्हें एक्सपर्ट बना दिया।” अब इसका क्रेडिट भी उसी ने ले लिया।
“हो गया न.. इसे हटाऊं फिर?”
“वहां के भी बनाओगे क्या?” उसने मेरी आँखों में झांकते हुए पूछा और मेरा दिल धड़क के रह गया।

मैं अटपटाया सा उसे देखने लगा जैसे फैसला न कर पा रहा होऊं कि हां कहूँ या न और मेरे असमंजस को देख वह एकदम हंस पड़ी- इतना सोच क्या रहे हो.. मेरे प्राइवेट पार्ट को देखने और छूने का मौका मिल रहा है, वह कम है क्या?

“वहां रिस्क भी ज्यादा होगी।”
“जाहिर है.. नाजुक अंग है तो थोड़ी एहतियात से करना।” उसने मेरी स्वीकृति की परवाह किये बगैर बंधी हुई टॉवल को पेट तक उठा दिया।
और तब मुझे पता चला कि उसने नीचे चड्डी नहीं पहनी हुई थी।

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