बस में मिली अप्सरा का साथ

फिर मैने उसे कहा मेरा नाम विजय है. और आपका तो उसने कहा मेरा नाम निकिता जैन है और गोरखपुर की रहने वाली हू. फिर उसने मुझे बहो में ले लिया. मैने उसका ड्रेस धीरे धीरे निकाल कर उसके बॉडी को किस करने लगा. पहले उसके बूब्स को खूब चुसता रहा और साथ ही एक उंगली उसके बुर में डाल कर अंदर बाहर करने लगा, और धीरे धीरे यूस्क पेट से होते हुए उसके बुर तक पहुच गया. क्या खुशबू थी उसकी बुर की… एक दम चिकना बुर था उस्का.

धीरे धीरे मैं उसका बुर चूसने लगा. करीब 5 मिनिट बाद उसने कहा विजय अब इंतेज़ार नही होता डाल दो अपना लंड मेरी चुत में. और मैं धीरे से अपना लंड उनके बुर में पेल दिया. और धीरे धीरे उनको चूसने लगा… क्या गरम गरम बुर था उसका. बहुत मज़ा आ रहा था उनको चूसने में. हमारी चुदाई करीब 20 मिनिट तक चली. और हम इसी तरह छुदाई करते रहे तीन दिन तक. पोज़िशन बदल बदल कर.

फिर उसने मुझे .5000 रूपीस दिया और कहा अब तुम देल्ही जा सकते हो. अब हम दोबारा कभी नही मिलेंगे. मैने थॅंक यू कहा और वाहा से चला गया देल्ही अपने काम के तलाश में. अगर मेरी कहानी अछी लगी तो प्लीज़ मुझे मैल करे. पर मुझे नौकरी की तलाश है, अगर कोई मुझे जॉब देना चाहेगा या चाहेगी प्लीज़ रिप्लाइ करिएगा. थॅंक यू फॉर रीडिंग माय स्टोरी. कहानी पढ़ने के बाद अपने विचार नीचे कॉमेंट्स मे ज़रूर लिखे, ताकि हम आपके लिए रोज़ और बेहतर कामुक कहानियाँ पेश कर सके – डीके

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