चाची ने मेरी वासना जगा कर चूत चुदवाई

मैं उनके साथ चिपक कर लेट गया. मैंने कुछ देर चाची के होंठों को किस किया बूब्स पिए और एक हाथ उनकी चुत पर ले गया, मैंने देखा कि चाची की पेंटी में कुछ मोटा सा लगा हुआ है.

मैंने पूछा तो उन्होंने बताया कि एमसी चल रही है, पैड लगा हुआ है.. आखिरी दिन है.

मैंने जैसे ही उसमें उंगली डाली, उफ कितनी गर्म और चिकनी चिपचिपे पानी से भरी हुई थी. मैंने कुछ देर चाची की चूत में उंगली की. अब चाची से बर्दाश्त नहीं हो रहा था. उन्होंने कहा कि पूरा हाथ डाल दे.
मैंने अपनी तीन उंगलियां चूत में डाल कर अन्दर बाहर करना चालू कर दीं. वो तो चाह रही थीं कि पूरा हाथ ज़बरदस्ती उनकी चूत में घुसेड़ दूँ, पर तीन उंगलियों से ज़्यादा अन्दर नहीं डाल सका. इतने में मुझे लगा कि किसी के करवट लेने की आवाज़ सी महसूस हुई. मैंने चाची को किसी तरह समझाया कि हम बड़े चाचा के घर हैं, किसी ने देख लिया तो बुरी तरह फंस जाएंगे. अपने को कंट्रोल में करो चाची.

फिर मैं डर के कारण जल्दी से उठ कर अपने बेड पर आकर रज़ाई में घुस गया. पर लाइट जलाना भूल गया था.

सुबह 5 बजे चाचा उठे उन्होंने लाइट जलाई और वॉशरूम चले गए. फिर धीरे धीरे हम सब उठ गए. छोटी चाची मुझसे नज़र नहीं मिला पा रही थीं और मैं भी शर्मा रहा था. हम सबने नाश्ता किया. नाश्ते के समय बड़े चाचा ने पूछा कि लाइट किसने बंद की थी?
तो छोटी चाची ने तुरंत कहा कि वो मुझे अजीब सा लग रहा था. लाइट में नींद नहीं आती मुझे.. इसलिए मैंने लाइट ऑफ कर दी थी.
मैं उनकी तरफ देखता रह गया था.

उसके बाद बड़े चाचा काम पर चले गए. कुछ देर बाद छोटे चाचा चाची को लेने आ गए थे.
वो मुझसे बोले- चल कुमार, हमारे घर भी घूम कर चले जाना.
मैंने कहा- ठीक है चाचा.

चाचा आगे चल रहे थे, मैं और चाची पीछे पीछे चल रहे थे. चाची ने धीरे से मुझसे कहा कि कुमार मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ, कहो तो पाँव पकड़ती हूँ, प्लीज़ ज़िंदगी में ये बात किसी को मत बताना, जो हमारे बीच कल रात हुआ था. नहीं तो मैं किसी को मुँह दिखाने के लायक नहीं रहूंगी, मेरी ज़िंदगी बर्बाद हो जाएगी. पता नहीं मुझे कल क्या हो गया था.

चाची की बात सुनकर मुझे अजीब सा लगा कि रात को ये मुझसे चुदने के मूड में थीं और अब पता नहीं ये ऐसा क्यों कह रही हैं. तब भी मैंने सोचा कि शायद इनको आत्मग्लानि महसूस हो रही होगी. तो मैंने सहज भाव उनको आश्वस्त करते हुए कहा- चाची चिंता मत करो.. मैं आपको प्रॉमिस करता हूँ, ये बात मैं कभी किसी को नहीं बताऊंगा.

फिर हम छोटे चाचा के घर पहुंचे. चाय पानी पी कर मैं वहां से चला गया. जाते वक़्त चाची की आंखों में एक अजीब सी उदासी और खिंचाव महसूस हो रहा था, जैसे उन्हें मेरा जाना ठीक नहीं लग रहा हो. मन तो मेरा भी नहीं था चाची को छोड़कर जाने का, लेकिन मुझे अपने घर वापस आना पड़ा.

अब मुझे रोज़ चाची की याद आने लगी, पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था. अब मैं रोज़ रात में.. और कभी कभी दिन में भी उनके बूब्स, चुत और किस को याद करके मुठ मार लेता था. मैं बस किसी भी तरह चाची को चोदना चाहता था, पर क्या करूँ.. कुछ समझ नहीं आ रहा था.

खैर दिन गुजरते गए.. पर चाची की जवानी मेरे दिलो दिमाग में बस सी गई थी.

अपनी स्कूल की पढ़ाई के बाद मैंने ओपन कॉलेज से फार्म भरा, तो मैं अब घर पर ही रहता था. कॉलेज जाने की ज़रूरत नहीं होती थी.

एक दिन घर में बात हो रही थी कि चाचा चाची बच्चों को छुट्टियां मनाने के लिए अपने यहां बुला रहे हैं. इस पर मेरी मम्मी ने मुझसे पूछा कि कुमार क्या तू जाएगा चाचा के यहां रहने.. क्योंकि तेरी बहनों पर तो टाइम नहीं है.
यह सुनते ही मेरे मन में लड्डू फूटने लगे. मैंने तुरंत कह दिया- हां मम्मी, मैं उनके घर जाकर रहूँगा.

इस तरह मैं अपना एक बैग लेकर छोटे चाचा के यहां रहने चला गया.

उनके घर मैं दोपहर को पहुंचा, डोरबेल बजाई तो चाची दरवाजा खोलते ही मुझे देखती रह गईं. उन्हें शायद यकीन नहीं आ रहा था कि मैं उनके दरवाजे पर उनके सामने खड़ा हूँ. वो भी बैग लेकर उनके यहां रहने के लिए आया हूँ. वो बहुत खुश हुईं. हम दोनों अन्दर आ गए, चाचा ऑफिस गए हुए थे और उनका बेटा स्कूल गया था.

घर में अन्दर पहुंचते ही हम दोनों ने एक दूसरे को गले से लगाया और कुछ देर चिपके रहे. उसके बाद मैंने उनके गाल, होंठ और गर्दन पर किस किए. आज इस वक्त हम दोनों को किसी का डर नहीं था. हम दोनों अकेले थे. चाची शर्मा भी रही थीं क्योंकि हम दिन में बिल्कुल उजाले में पूरे होशोहवास में थे. वो भी एक चाची और भतीजे के बीच सब हो रहा था, जो शायद जल्दी से कहीं नहीं होता होगा.

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