मोनू मेरे चूतड़ दबाते हुए बोला दीदी कपड़े उतार दो बहुत मजा आएगा

नहीं नहीं दीदी मुझे तो बहुत मजा आया, मोनू बोला.

ओह्ह भाई मैं तो डर गई थी, यह कहते ही मैंने उसका लंड फिर से पकड़ लिया और दबाने लगी.

मोनू मुझसे लिपट गया और मुझे हर जगह किस करने लगा. वैसे तो हमारा खेल शुरु हो गया था जैसा मैं चाहती थी, पर यहां थोड़ा रिस्की था. वैसे तो अंधेरा था पर मैं मोनू पर लंड जोर जोर से मसल ने लगी, जिससे वह और बेचैन हो गया मुझे पता चल रहा था. अब यह मुझे बिना चोदे नहीं छोड़ेगा.

इसलिए मैं बोली चल मोनू अब घर चलते हैं, .यहां हमें कोई देख सकता है. बाकी काम घर जाकर करते हैं.

बस दीदी थोड़ी देर रुक जाओ मुझे बहुत मजा आ रहा है, मोनू ने मुझे रोकते हुए कहा.

पर मैं घर की तरफ चल पड़ी, मोनू भी मन मारकर मेरे पीछे पीछे घर की और चल पड़ा. मोनू सारे रास्ते मुझे सेक्स के बारे में बातें करता रहा, शायद वह बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो चुका था.

कुछ ही देर में हम घर आ गए और हम अपने रुम में चले गए और अपनी बुक खोलकर स्टडी करने लगे..

पर मेरे दिमाग में तो मोनू का लंड घूम रहा था और उधर मोनू भी मुझे बार बार मुस्कुरा कर देख रहा था, रात हो चुकी थी मम्मी डैडी भी सो गए थे. वह उठा और अपने रूम की कुंडी लगा दी, मेरी तरफ मुड़कर मुस्कुराने लग गया और बोला चलो दीदी वही करते हैं अब.

आपकी बात सुनकर मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई है, पर अब हमें कोई टेंशन नहीं थी, क्योंकि मॉर्निंग तक हमें कोई तंग नहीं कर सकता था.

मैंने कहा मोनू कपड़े तो चेंज कर लें और सिर्फ पजामा ही डालना उपर.

मोनू ने कहा हां दीदी आप भी बदल लो.

मैं एक काफी छोटा सा शोर्ट डाल दिया था कि वह जल्दी से ऊपर हो जाए और मेरी चूत एकदम सामने आ जाए.

और मोनू ने भी अपना पजामा डाल दिया था, उसने मेरी तरफ देखते हुए अपनी दोनों बाहें फैला दी और मुझे मुस्कुराते हुए बुलाने लगा, मैं भी जाकर उसकी बाहों में समा गई और वह मुझे चूमने लगा. उसका लंड मेरी चूत पर लग रहा था, जो मुझे साफ साफ महसूस हो रहा था.

मेने मोनू का पजामा नीचे खिसका दिया और उसका मस्त झूमता हुआ लंड बाहर निकाल लिया, मेरे लिए अब लंड पकड़ना बहुत आसान हो गया, मोनू अपने हाथों से मेरे दोनों चूतड़ दबा रहा था. और मैं उसके उसका लंड पकड़ कर ऊपर नीचे करने लगी.

मुझे अब समझ आ गया था कि मोनू मेरी तरह भोला बनने की एक्टिंग कर रहा था.

उसने कहा दीदी इसमें तो बहुत मजा आ रहा है यार..

मैंने कहा हां वह तो है तू भी और जोर से दबा पीछे से, अब मैं भी उससे खुलने लग गई, और उसका पूरा साथ देने लगी.

मोनू बोला दीदी आपका सुसु कहां है वह खड़ा नहीं हुआ?

मैं हंसने लगी और बोली भाई हमारा यह डंडा नहीं होता जैसे तुम्हारे यह बूब्स नहीं होते, समझा.

तभी वह बोला अरे हां दीदी आपके मस्त बूब्स भी तो है..

कहते ही उसने अपने हाथ मेरे कुर्ती में डाल दिए और मेरे बूब को ढूंढने लग गया. मुझे इस में बहुत मजा आ रहा था. मैंने भी बड़े आराम से अपने दोनों बूब्स उसके हवाले कर दिए और उससे अपने बूब्स दबवाने लगी.

जोर से दबाओ ना, मैंने मस्त हो कर कहा.

क्यों दीदी उसे क्या होगा? और मेरे बूब्स के निप्पल पकड़ कर घुमा लिए मैं मस्ती में झूम पड़ी..

मोनू जैसे तुम्हें अपने डंडे में मजा आता है ना बस वैसे ही मुझे अपने बूब्स में मजा आता है, मैंने थोड़ा शांत होकर उसका जवाब दिया.

अच्छा इतना मजा आता है, चलो दिखाओ अपना डंडा फिर. यह कहते ही उसने मेरी चूत पर अपने हाथ रख दिए और अपनी एक्टिंग चालू रखी, उसे अच्छे से पता था कि ऐसा कुछ नहीं होता, पर फिर भी वह लगा हुआ था. आराम से मेरी जगह बहुत नाजुक है, उसके हाथ मेरी चूत पर घूम रहे थे. वह मेरा डंडा ढूंढ रहा था. और उसे वह कभी नहीं मिलने वाला था. तभी उसने अपनी उंगलियां मेरी चूत में घुसा दी और मेरे मुंह से आह्ह्ह औऊ अह्ह्ह निकल गई मैं, पूरी मस्त हो चुकी थी.

भाई मैं खड़े खड़े थक चुकी हूं चल बेड पर चलते हैं, वहां आराम से करेंगे मैंने कहा.

उसने कहा ठीक है दीदी.

दीदी कपड़े उतार दो बहुत मजा आएगा, मैंने भी उसकी बात मान ली और सारे कपड़े उतार दिए. और मन ही मन सोचने लगी कि अब नाटक करने का कोई फायदा नहीं है वरना चुदाई में कोई मजा नहीं आएगा.

मोनू एक बात सच सच बताओ.

उसने कहा हां ही बोलो दीदी.

मैने कहा – क्या तुमने किसी लड़की को चोदा है?

मोनू डरते हुए बोला नहीं दीदी.

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