मोनू मेरे चूतड़ दबाते हुए बोला दीदी कपड़े उतार दो बहुत मजा आएगा

यह कैसे होता है कैसे करते हैं?

मैंने कहा अरे मेरे प्यारे भाई मैं किसी को कुछ बताऊंगी थोड़ी ना, बताना सच.

मोनू कुछ सोचने लग गया और थोड़ी देर बाद बोला नहीं दीदी चलो अपनी मस्ती करते हैं.

अरे तेरा लंड तो साफ साफ बता रहा है कि उसने किसी चूत का पानी पिया हुआ है, बोलना. मैंने उस पर जोर देते हुए पूछा.

वो शरमाते हुए बोला, हां दीदी आपकी ही फ्रेंड है वह मुझसे प्यार नहीं करती बस चुद्वाती है.

मैंने कहा चल आ जा यह देख मेरी चूत भी चुद सकती है.

मोनू ने कहा अरे दीदी फिर इतना पहले नाटक को क्यों किया?

यह तो मैंने बस तुझे खोलने के लिए किया, चल मुझे छोड़ दे अब, मैंने मीठे लफ्जों में कहा.

मोनू भी शर्म छोड़ कर मुझे लिपट गया और किस करने लगा. मैंने भी उसके होंठों में होंठ में डाल कर किस किया और उसकी जीभ मुंह में लेकर चूसने लगी. अब उसने मुझे गोदी में उठाया और बिस्तर पर लेटा दिया. मैं उस को नीचे कर दिया और खुद उसके पास बैठकर लंड को हाथ में लेकर मसलने लगी. उसको बहुत मजा आने लग गया और वह मुह से सिसकियां भरने लगा, मैंने मुस्कुराकर चूत को लंड पर रखा और धीरे से उसके लंड पर चूत रखकर घुसा दीया. मेरी चूत में से पानी निकल रहा था, जिसकी वजह से लंड आसानी से अब मेरी गुफा में जा रहा था. और मेरी चूत को आराम मिल रहा था, मैं अपनी गांड उठा उठा कर लंड को अपनी बच्चेदानी तक उतार रही थी. और अब मोनू भी अपनी गांड नीचे से हीला कर मुझे चोद रहा था.

मैंने अपनी चूत को हीलाने से रोक दिया और मोनू से पूछा लंड गांड में भी चला जाता है?

मोनू ने कहा पता नहीं दीदी, मैंने आज तक ऐसा कुछ नहीं किया..

चल करते हैं मैंने उसे जवाब दिया.

मोनू के सामने में अपनी गांड को खोलकर झुक गई और उसे अपनी गांड के दर्शन कराएं वह भी मेरी गोल गांड को देखकर पागल हो गया और अपना लंड मेरी गांड पर रख लिया पर गांड टाइट होने की वजह से लंड गांड में जाने को तैयार ही नहीं हो रहा था.

मैंने कहा मेरी गांड पर तेल लगा और फिर चोद.

उसने ऐसे ही किया और मेरी गांड पर उंगली से तेल लगाकर गांड में घुसा दी, जिससे मुझे दर्द हुआ पर गांड को चुदाने की प्यास में दर्द भी अनदेखा कर दिया. फिर अचानक ही मेरी गांड में लंड चलता हुआ महसूस हुआ और मुझे लंड के घुसने का दर्द महसूस होने लगा. और उसके लंड को भी अंदर आने में जरा सी तकलीफ हो रही थी.

कहां मोनू बस कर फट जाएगी और कोशिश हम कल करेंगे.

उसने मेरी बात मानते हुए अपना सुपाड़ा गांड में से निकाल दिया और निकलते ही मेरी चूत में घुसा दिया और जोर जोर से मेरी चुत फ्री स्टाइल में चोदने लगा. मैं घोड़ी बनी हुई अपनी चूत चुदवा रही और उधर मोनु मेरी चूत मारता रहा, और मेरे बूब्स को पकड़कर मसलता रहा. उसकी ऐसी चुदाई से अब मेरा निकलने वाला था इसलिए मैं भी अपनी गांड हिलाकर लंड को बच्चेदानी तक लेने लगी और अगले ही पल जड़ गई. मेरे मुंह से आहाह औऊ हहह ई औऊ ओह्ह उऔउ ऐईउ उईइ जैसी लंबी सिसकियां और आवाज निकली और मैंने उसे पीछे कर दिया.

मोनू ने कहा दीदी मेरा तो हुआ नहीं..

मैंने उसको खड़ा किया और उसके लंड को मुंह में ले कर चोदने लगी. उसका पानी अगले ही पल मेरे मुंह में निकल गया और फिर भी मैं उसके सुपारी को चुस्ती रही. जब तक उसके पानी की एक एक बूंद तक खत्म नहीं हुई. अब मोनू मुझसे लिपट कर सो गया खराटे लेने लग गया. मैं मुस्कुराई और उसे किस कर के मोनू के बिस्तर पर आकर सो गई और सपनों में खो गई.

दोस्तों यह थी मेरी देसी कहानी यह सुनहरे पल जो मैंने आपको भी बताएं. आपको कैसे लगे मुझे जरूर बताना.

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