चुदक्कड़ भाभी सेक्स स्टोरी

अब मैंने भाभी को घोड़ी बनाया और अपना लंड उनकी चुत में पीछे से डाल दिया. अभी आधा लंड ही गया था कि भाभी की चीख निकल गई और बाहर निकालने को कहने लगीं.

मैंने उनकी बात ना सुनते हुए एक और झटका मारा और पूरा लंड भाभी की चुत में घुसा दिया. भाभी आंखों में आँसू आ गए.
भाभी- प्लीज इससे बाहर निकालो, बहुत दर्द हो रहा है.
मैं- कुछ नहीं होगा, बस थोड़ा सा सब्र करिए.. आप तो वैसे भी लंड लेने की अभ्यस्त हैं.

थोड़ी देर बाद मैं धीरे धीरे अपना लंड अन्दर बाहर करने लगा. अब तो भाभी भी साथ दे रही थीं. वे अपनी गांड पीछे धकेल कर मेरे लंड के जर्क का साथ दे रही थीं. मैंने चुदाई की स्पीड बढ़ा दी और तेज़ी से धक्के मारने लगा.

भाभी भी अपनी गांड उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगीं. वे बोल रही थीं- आह.. और जोर से चोदो.. फाड़ दो मेरी चुत को.

मुझे तो इतना मज़ा आ रहा था कि बता नहीं सकता. बीस मिनट तक लगातार चोदने के बाद मेरा काम होने वाला था.

मैंने भाभी के मम्मों को मसलते हुए कहा कहा- पानी किधर निकालूँ?
भाभी ने कहा- मेरी चुत के अन्दर ही निकालो. मैं तुम्हारा रस अन्दर तक महसूस करना चाहती हूँ.

थोड़ी देर के बाद मेरे लंड ने पिचकारी मारनी चालू कर दी और भाभी की चुत अपने रस से भर दी. झड़ने के बाद मैं वहीं पर भाभी की कमर पर लेट गया. मैंने देखा कि भाभी बहुत खुश दिख रही थीं
भाभी- सच में आज तुमने वो मज़ा दिया है, जो मुझे कभी नहीं मिला. तुम जब चाहो, मुझे चोद सकते हो.
“मतलब उस आदमी की छुट्टी हो गई भाभी?”
“हां अब उससे नहीं चुदूँगी.. तुम्हारा लंड मस्त है.”

मैंने भाभी के दूध दबाए और चुम्मी लेकर कपड़े पहनने लगा.

भाभी मेरी पक्की जुगाड़ बन गई थीं.

तो दोस्तो, यह मेरी पहली चुदाई की कहानी है.. एकदम सच्ची है. मुझे जरूर बताएं कि आपको कैसी लगी.

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