मेरी चुद्कद दीदी का लिव-इन रीलेशन

मैने कहा ठीक है दीदी.

तभी मैने दीदी को एक न्या फोन गिफ्ट कर दिया और जीजा जी को एक शर्ट क्यूंकी दीदी अपनी न्यी लाइफ शुरू कर रहे थे, साथ ही उन्हे मैने सर्प्राइज़ दिया जेसे ही उन्होने रूम ओपन किया उधर एक पलंग रखा था. दीदी को मैने वो पलंग गिफ्ट कर दिया .

उसी दिन देर रात की बात..

वैसे तो उपर वाला फ्लोर खाली रहता था लेकिन दीदी के जाते ही वाहा . शुरू हो गयइ. रात को मुझे दीदी और जीजा जी ने सोने ही नही दिया.

उपर वाले कमरे से ज़ोर ज़ोर से आवाज़े आ रही थी अहह अहह आहह यअहह. दीदी का कांड हो रहा है.

अगले दिन सुबह जब मैं त्यार होकर जॉब पे जाने लगा तो देखा के दीदी और जीजा जी अभी तक उठे नही है और उठते भी क्यू सारी रात कॉन्सा सोए है यह दोनो.
मैं जेसे ही घर के निकला काफ़ी लोग मुझे देख कर मुस्कुराने लगे काफ़ी मुझे बधाइयाँ भी दे रहे थे दीदी की शादी केसे की कोर्ट मॅरेज से.

मैने कहा नई दीदी लिव इन रीलेशन में है श्याम जीजू के साथ तो काफ़ी लोग कहते क्या बुराई थी हममे चाहे शादी करा देता मैं तो लड़ पड़ा और चला गया वाहा से.

देर शाम को घर आया तो देखा दीदी और जीजा जी सारा दिन घर पर ही थे और मेरे घर जाते ही जब मैं डिन्नर करने बैठा दीदी की फिर से आवाज़े शुरू अहह यअहह उम्म्म्मममम अहह. कभी आवाज़े एक दम ज़ोर से आए कभी धीरे धीरे उस दिन भी सारी रात मुझे डिस्टर्ब किया इन्होने.

अगले दिन मैने देखा के एक ट्रक वाला दो आदमियों के साथ दीदी के घर एक न्या पलंग लेकर जा रहा है. मैने उनका पीछा किया उपर क्या दीदी बैठे हुए थे.

जीजा जी से मैने पूछा के यह क्या न्या बेड क्यू लाए हो मैं भी तो देकर गया ही था.

तो उन्होने कहा के कल रात को पलंग टूट गया.

अचानक ही मैने जीजा जी को कहा के ज़ोर कम लगाओ और वो हस्स पड़े मैं दीदी को मिल्कर अपने काम पर चला गया.

उसी दिन रात को जब मैं घर आया तो अपने रूम की बाल्कनी से देखा के जीजा जी नीचे खड़े थे और उनके कुछ 5 दोस्त घर में आए और उपर चले गये.

मैने कहा के आज आवाज़े नही आएँगी क्यूंकी दीदी मेहमान नवाज़ी में व्यस्त होएंगी.

पर मैं ग़लत था उन आदमियों के अंदर जाने के 15-20 मिनिट बाद ही दीदी की आवाज़े नही दीदी की चीखे शुरू हो गई.

दीदी ज़ोर ज़ोर से स्क्रीम कर रही थी मुझे उस दिन पछतावा हुआ के दीदी आज भी पुरानी वाली ही रंडी है और श्याम ने दीदी को लिव-इन रीलेशन में ला कर मेरे ही अपार्टमेंट में धंधा शुरू कर दिया है दीदी का.

मैं अपनी ग़लती पे बोहत शर्मिंदा था और बस दीदी के बारे ही सोच रहा था के केसे हैवानो के जैसे पेल रहे है वो लोग दीदी को..

अगले दिन सुबह जब मैं उठा तो सुना के आज आवाज़े आनी शुरू नही हुई, आज मैने सोचा के आज आवाज़े नही आने दूँगा और पहले ही उनको उठा के किसी बहाने दीदी को शॉपिंग पे ले जाउँगा. मैं चुप चाप एक सीडी के सहारे उपर चढ़ गया और दीदी के बेडरूम का दरवाज़ा हल्का सा खोला और देखा के.

जीजा जी ने दीदी के मूह में अपना लंड दिया हुया है, दीदी ज़मीन पर घुटनो के बल नंगी बैठी हुई थी और जीजा जी भी नंगे थे.

मैं देख कर हैरान रह गया के दीदी के बेडरूम में कॉंडम के पॅकेट बिखरे पड़े थे, क्यूंकी कल जीजा जी के दोस्त जो आए थे.

दीदी की आवाज़ इसलिए नही आ रही थी, क्यूंकी उनके मूह में जीजू का विशाल लंड था दीदी भी प्रोफेशनल रंडी की तरह उसे चुस्ती रही.

फिर जीजा जी ने दीदी को उठा लिया और बेड पे लिटा कर दीदी की टांगे खोल दी, मैं दीदी की चूत देख कर हैरान रह गया. क्यूंकी वो पहले से ज़्यादा खुल चुकी थी, दीदी जब मेरे साथ रहती थी तो चूत थी अब वो खुल खुल के भोसड़ी बन चुकी थी.

जीजा जी ने दीदी की चूत में उंगलिया देखर अपना हाथ हिलाना शुरू किया और दीदी की चीखो का राज़ मेरे सामने था दीदी की आवाज़े अब मैं सामने से सुन रहा था अहह अहह.

फिर जीजा जी ने दीदी की भोसड़ी को चाटना शुरू किया और दीदी ने अपनी आखें बंद करके जीजा जी के सिर पर अपना हाथ रखा.

जीजा जी ने दीदी की भोसड़ी पर थूक फेंका और अपने हाथ से उससे रगड़ कर अंदर डाल दे दिया. फिर जीजा जी ने अपना लंड पकड़ा और दीदी की चूत पे रख कर रगड़ने लगे और एक दम से अंदर धकेल दिया.

दीदी ने पीछे से बेड पकड़ रखा था और बस दीदी ने आवाज़े निकालनी शुरू की चोदो और चोदो आअहह आहह आह ह.

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