चुदासी चाची के मोटे चूचे और गांड

और मैं किचन में दूर से देखने लगा कि चाची की साड़ी उसकी गांड को टाइट कसे हुए थी और कमर का हिस्सा साफ नज़र आ रहा था. गोरा, मक्खन जैसा जिस्म था चाची का. चाची को देखते-देखते मुझसे कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था और मैंने किचन में जाकर पीछे से उनकी कमर में हाथ डाल दिया. चाची एकदम से चौंक गई.
बोली- पागल है क्या … अंकुर देख लेगा.
मैंने कहा- आप उसकी चिंता मत करो, मैंने उसको पढ़ाई करने के लिए ऊपर भेज दिया है.

चाची बोली- बेटा, मैं तेरी चाची हूँ।
मैंने अपना एक हाथ चाची की कमर पर फिराते हुए उसके पेटीकोट के अंदर से उसकी चूत पर रख दिया. हाथ रखते ही मुझे पता चल गया कि मेरी चाची पहले ही चुदासी हो चुकी है और उसकी गवाह उनकी गीली पैंटी थी.
मैंने चाची से कहा- चाची, यह तो आग उगल रही है.
चाची ने शरमाते हुए कहा- बेटे का लंड अपनी गांड पर महसूस करने के बाद तो किसी की भी चूत गीली हो जाएगी.

मैंने वहीं पर चाची की गर्दन को चूमना शुरू कर दिया. एक हाथ से उसकी चूत और दूसरे हाथ से उनके चूचे को सहलाने लगा. चाची की जवानी आग में जलने लगी. मेरी चाची की चुदास भड़क उठी थी.
चाची की सांसें तेज़ हो चुकी थीं. मैं चाची की गर्दन को चाट रहा था और उनकी पीठ को चाटते हुए मुझे ऐसा लग रहा था जैसे चाची कोई बिन पाऩी के फड़फड़ाती हुई मछली हो.

मैंने चाची के ब्लाउज़ की डोरियों को अपने मुंह से खोल दिया और चाची को ऊपर उठा कर किचन की स्लैब पर बिठा दिया. उनका ब्लाउज उतार कर मैंने चाची के चूचों को ब्रा के ऊपर से दबाना शुरू कर दिया.
चाची की कामुक आवाज़ें किचन में गूंजने लगी स्स्स … उउम्म्ह… अहह… हय… याह…
चाची के चूचे कड़क हो गए थे.

मैंने चाची की ब्रा को उतार कर उसके एक चूचे को तो मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. और साथ ही दूसरे चूचे को दबाना शुरू कर दिया.

धीरे-धीरे मैंने चाची के पेट को चाटते हुए उनके पूरे पेट को गीला कर डाला और फिर मैं नीचे की तरफ बढ़ने लगा. मैंने चाची के पेटीकोट को उसकी जांघों तक चढ़ा कर उनकी जांघों को सहलाना शुरु कर दिया. अपनी दोनों उंगलियों से चाची की चूत को दबाया और फिर मैंने अपनी दोनों ही उंगलियों को चाची की चूत में डाल दिया.

मेरी इस हरकत पर चाची की सिसकारी निकलना शुरू हो गई और चाची ने मेरे बालों को पकड़ कर मेरे होठों को चूसना शुरू कर दिया. चाची पागल हो चुकी थी. उसकी चूत पानी छोड़ने लगी थी. मैं भी चाची की चूत से खेलने में लगा हुआ था. मैंने चाची की चूत की मसाज करना शुरू कर दिया था.

जब चाची से और ज्यादा बर्दाश्त नहीं हुआ तो चाची ने मुझसे बेडरूम में चलने के लिए कह ही दिया. अपनी बांहों में लेकर मैंने चाची को बेडरुम में ले जाकर उनके बेड पर पटक दिया. अंदर जाकर मैंने रूम को लॉक कर लिया और चाची के पैरों से फिर शुरूआत कर डाली.
मैंने चाची के पैर को अपनी छाती पर रख दिया. वह लेटी हुई थी, मैं उसके पैरों के नीचे बैठा हुआ था. पैरों की उंगलियों को मुंह में लेकर चूस रहा था. चाची अपनी आंखें बंद करके बड़बड़ाने लगी थी.

उसके मुंह से निकल रहा था- रोहन बेटा, चोद दे अपनी चाची को … तेरे चाचा से तो चोदा नहीं जाता है. तेरी चाची की चूत बहुत प्यासी है बेटा. चोद दे इसको!
इतना सुनते ही मेरी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ गई और मैं उसकी उंगलियों को चूसते हुए उसकी जांघों को चाटते हुए उसकी चूत तक पहुँच गया था. अभी मैं उसकी चूत के अगल-बगल में ही चाट रहा था. मैं चाची को और ज्यादा तड़पाना चाहता था. चाची बेड की चादर को नोचने में लगी हुई थी. चाची की चूड़ियों की आवाज़ मुझे पागल कर रही थी.

फिर मैंने उसकी नाभि में अपनी जीभ डाल दी. अपनी जीभ से मैं चाची की नाभि को ही चोदने लगा. साथ ही साथ मैं अपने हाथों से चाची के निप्पलों को खींच कर दबा रहा था. मैंने अब एक उंगली चाची के मुंह में डाल दी और चाची मेरी उंगली को लंड समझ कर चाट रही थी.
वह बोली- चोदेगा आज … या ऐसे ही तड़पा कर मुझे मार डालेगा?

मैंने नीचे बढ़ते हुए उसकी चूत पर फिर से जीभ लगा दी. चूत पर मुंह लगते ही चाची चहक उठी. उसके मुंह से गज़ब की कामुक सिसकी निकल गई. मैं भी खिलाड़ी था. मैंने अब चाची की चूत की फांकों को खोलकर उसकी चूत के अंदर अपनी जीभ डाल दी. चाची का आनंद सातवें आसमान पर था. उसके हाथ मेरे बालों में आ चुके थे. चाची मेरे बालों को सहला रही थी. मैं कुत्ते की तरह चाची की चूत को चाट रहा था. चाची अपने होठों को चबा रही थी.

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