कॉलेज के सीनियर से पहली चुदाई

4 बजे मैं और रजनी तैयार हो गईं, रजनी ने तो वाइट शॉट्स और वाइट टॉप पहनी थी जिससे उसके बैक से ब्रा की स्ट्रिप दिख रही थी और उसकी टॉप पीछे से स्ट्रिप वाली थी। उसके ऊपर एक लॉन्ग जैकेट टाइप डाली हुई थी एकदम कयामत लग रही थी। मैंने तो एक मिड्डी जो वन पीस होती है घुटने तक होती है वो, ब्लैक कलर की डाली हुई थी और रेड लिपस्टिक, हल्का काजल, बाल खुले हुए, मैं भी कयामत से कम नहीं लग रही थी।
रजनी- क्या बात है … आज अमित तो तुझे देख कर पागल हो जाएगा।

मैं- अच्छा, तू खुद इतनी हॉट राहुल के लिए बनकर जा रही है तो मुझे तो डर है कहीं सिनेमा हॉल में ही तुझे खा न जाए वो।
रजनी- काश … ऐसा हो पाता. और मेरी तरफ देख कर वह मुस्कराने लगी।

अमित की कॉल आई कि वो दोनों कॉलोनी के बाहर खड़े हैं, हम आ जायें।
मैं और रजनी बाहर निकल आई।
मैं- यार, आज तू तो पटाखा लग रही है।
रजनी- तू भी कौन-सा कम लग रही है … आज अमित तो पागल हो जाएगा।
मैं शरमाती हूँ …

रजनी- इतना भी मत शरमा, आज मज़े लेने ही हैं। फिर हम पहुँच गये, वो दोनों हमारा इंतज़ार कर रहे थे।
अमित- वाह, आज तो एकदम पटाखा लग रही हो।
मैं शरमाती हुई- थैंक यू।
और हम चल पड़े।

मूवी हॉल में पहुंचे, अमित ने पहले से बुक कर रखी थी। सीट दो कोनों में ली गयी थी, दो सीट लास्ट रॉ के एक साइड, दूसरी दूसरे साइड।
अमित- आओ नेहा, हम उस तरफ चलते हैं।
मैं उसके पीछे एकदम लास्ट रॉ के लास्ट सीट पर आ गयी और रजनी व राहुल दूसरी तरफ.

मूवी कुछ ख़ास नहीं थी और मेरा ध्यान तो रजनी व राहुल पर ही था। कुछ देर बाद मैंने देखा अंधेरे में रजनी ने जैकेट खोल दिया था और राहुल उसको बांहों में ले चुका था। फिर मैंने ध्यान देना ज़रूरी नहीं समझा क्योंकि अमित का भी एक हाथ मेरे कंधे पर था और मैं कुछ बोल नहीं रही थी जिससे उसकी हिम्मत बढ़ी और उसने मुझे कमर से पकड़ लिया। मैंने उसके हाथ को पकड़ लिया।
अमित- क्या हुआ नेहा?
मै- कुछ नहीं!
अमित- तुम्हें अच्छा नहीं लगा?
मैं- ऐसी बात नहीं है।

मेरे इतना बोलते ही वो फिर से हाथ कमर पर रख कर सहलाने लगा और मुझे अच्छा महसूस हुआ.
अमित- नेहा, जब से तुम्हें देखा है तब से बस तुम्हारे बारे में सोचता हूँ।

अमित मेरी गर्दन पर जीभ फेरने लगा जिससे मैं पागल होने लगी. वह साथ ही मेरे कानों को भी चूसने लगा, मेरे शरीर में अजीब-सी सिरहन होने लगी. उसकी इन सब हरकतों से मैं गर्म होने लगी. मैं अब बस अमित के कंट्रोल में थी. उसने मुझे अपनी ओर खींच कर मेरे मुलायम होंठों पर अपने होंठ रखे और मैं कुछ भी रोकने की स्थिति में नहीं थी. वह मेरे होंठों को चूसे जा रहा था जिससे मैं खो सी गयी थी और अमित की तरफ खुद ही झुकती चली गयी। अब अमित ने मुझे अपनी तरफ खींच कर गोद में ले लिया मुझे. मैं सामने स्क्रीन पर देख रही थी।

अमित- नेहा एक बात बोलूँ, तू जब से कॉलेज आयी है तब से सिर्फ तुझे ही चाहता हूँ ।
मैं- मुझे पता है इसलिए तो मैं आई हूँ यहाँ।
अमित – उफ्फ … मेरी जान।
यह कहकर वह मेरे बूब्स को मसलने लगा और मैं कसमसाने लगी.
मैं – अमित, कोई देख लेगा …
अमित- कोई नहीं देख रहा, वो देख रजनी और राहुल कितने मज़े कर रहे हैं।

मैंने उनकी तरफ देखा तो रजनी और राहुल एक दूसरे को चूम रहे थे और रजनी के हाथों में राहुल का लण्ड था। इसी बीच अमित ने मेरी चूत पर पेंटी के ऊपर ही सहलाना शुरू कर दिया और मैं भी मदहोश हो गयी।
फिर अमित ने मुझे सीधा किया और मेरे होंठों को चूसने लगा. इस बार मैं भी उसका पूरा साथ दे रही थी. वो अपने हाथों को नीचे लाकर मेरी गांड को दबाए जा रहा था जो मुझे और ज्यादा उत्तेजित कर रहा था। मैं भी उसे चूमे जा रही थी. तभी अमित ने मुझे अलग किया और अपनी पैंट खोल कर लण्ड बाहर निकाल लिया और मेरी तरफ इशारा किया. मैं समझ गई वो क्या चाहता है और मैं उसके लण्ड को चूसने लगी जो 7 इंच लम्बा था। मैं उसको पूरा मुँह में ले कर चूस रही थी. तभी अमित ने मुझे सीट पर लेटा कर मेरी पैंटी निकाल दी और चूत को अपने जीभ से चाटने और छेड़ने लगा।
मेरे मुंह कामुक सिसकारियाँ निकलने लगी थीं.

मैं- आह … अमित … उम्म … और चूसो … उम्म … बेबी अह्ह …
मैं अपने चरम पर थी. फिर से मुझे वैसे ही गोद में ले लिया. उसके लण्ड का स्पर्श मुझे बहुत उत्तेजित कर रहा था।

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