कॉलेज टीचर ने मुझसे अपनी चूत की प्यास बुझवायी

हम दोनों उस फ्लैट में चले गए. हम थोड़ा फ्रेश हुए. फिर उन्होंने अपने घर और मैंने अपने घर फोन कर दिया कि आज घर नहीं आएंगे … फ्रेंड के यहां हैं. फिर हमने होटेल से खाना ऑर्डर किया और यूं ही एक दूसरे से गरमगरम बातें करते हुए हंसी मजाक करते रहे.

कुछ ही देर में खाना आ गया. पहले हम दोनों ने खाना खाया. फिर हम हॉल में टीवी देखने लगे. टीवी में मस्त रोमांटिक मूवी आ रही थी. उसे देखते देखते हम दोनों को भी मज़ा आने लगा.

फिर धीरे धीरे मेरा हाथ उनके मम्मों पर चला गया और ब्लाउज के ऊपर से ही मैं मैम के मम्मे मसलने लगा. मैम ने अपना मेरे लंड पे रख दिया और वे पैंट के ऊपर से ही मेरा लंड मसलने लगीं. इसके बाद चुदास बढ़ने लगी तो मैंने उनका ब्लाउज खोल दिया. उन्हें प्यार से चूमने लगा. धीरे धीरे कपड़े उतरने लगे. मैंने मैम की साड़ी भी उतार दी, अब मैं उन्हें लाल रंग की ब्रा और पेंटी में देख कर पागल सा हो गया था.

तभी मैम ने कहा- चलो बेडरूम में चलते हैं.
मैंने उन्हें गोद में उठा लिया और बेडरूम में ले आया. उनका फूल सा बदन मुझे बड़ा मस्त लग रहा था. मैम भी मेरे गले में बांहें डाले मुझे चूम रही थीं.

मैंने कुछ देर यूं ही अपनी गोदी में लिए मैम के होंठों को चूमा. फिर मैम को बेड पर लेटा कर उन्हें होंठों पर किस करने लगा. धीरे धीरे मैं उनको चूमते हुए उनकी नाभि पे आया. वो एकदम से सिहर उठीं और मैम ने मेरे सर पर हाथ रख कर मुझे सहलाना शुरू कर दिया था.

फिर मैं नाभि से और नीचे आ गया. उनकी पेंटी पूरी गीली हो चुकी थी. मैंने पेंटी की इलास्टिक में उंगलियां फंसा कर चड्डी को नीचे खींच दिया. मैं मैम की चूत की महक ले रहा था और मेरी गर्म सांसें उनकी चूत पर लग रही थीं.

मैम ने मेरा सिर पकड़ कर अपनी चूत पर लगा दिया. पहले मुझे चूत का स्वाद थोड़ा अजीब सा लगा, फिर मज़ा आने लगा.

कोई दो मिनट में कंचन मैम से रहा नहीं गया और उन्होंने उठ कर मेरी पेंट और चड्डी उतार दी. मेरा खड़ा लंड उनको नमस्ते करने लगा तो लंड को हाथ में ले के मैम उसे आगे पीछे करने लगीं.

मैं अभी कंचन मैम के हाथों का मजा ले ही रहा था कि अचानक से उन्होंने मेरे खड़े लंड को अपने मुँह में ले लिया. मैं तो जैसे सातवें आसमान में उड़ने लगा था. मुझे ऐसा लगा कि आज तो बिन मांगे मुराद पूरी हो रही थी.

कुछ ही देर बाद हम दोनों 69 की अवस्था में आ गए और हम एक दूसरे के सामान को रगड़ने चूसने लगे.

लंड चूत की चुसाई मस्ती से चलने लगी. हम दोनों पूरी तन्मयता से एक दूसरे के लंड चूत को चूसे जा रहे थे. कुछ ही देर में कंचन मैम अकड़ने लगीं और उन्होंने अपना पानी छोड़ दिया.

वो दो पल रुक कर फिर से मेरा लंड चूसने लगीं. थोड़ी देर बाद जब मैं झड़ने ही वाला था, तो मैंने उनसे कहा- मेरा होने वाला है.
कंचन मैम ने लंड को मुँह से चचोरते हुए ही इशारे से कहा कि मेरे मुँह में ही झड़ जाओ.

कुछ ही देर में कंचन मैम के मुँह में ही झड़ गया. फिर हम दोनों बाथरूम गए. हमने एक दूसरे को साफ किया. उधर लंड को साफ करते करते कंचन मैम ने फिर से मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगीं.

दस ही मिनट में मेरा वापस लंड खड़ा हो गया. मैं भी उनके बोबे दबाने लगा, उन्हें भी मज़ा आने लगा. हम दोनों फिर से बेडरूम में आ गए. बेड पे आकर मैंने अपना मुँह उनकी चूत पे रखा और जीभ को अन्दर तक डाल कर घुमाने लगा.

अब कंचन मैम ने कहा- यार अब रहा नहीं जाता … जल्दी से अन्दर डाल दो.
मैंने मैम की टांगें फैला दीं और अपना लंड हाथ से हिला कर चूत की फांकों में फेरा. मैम ने नीचे से गांड उठा कर इशारा दिया तो मैंने अपने लंड का टोपा उनकी चूत पे रख कर जोरदार धक्का दिया. लंड एकदम से घुसा तो मैम की चीख निकल गयी.

मैंने झट से उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए. मैम ने मुझे अपनी बांहों में कस लिया तो मैंने एक और धक्का दे दिया. इस बार मेरा पूरा लंड चूत में अन्दर तक घुस गया. कंचन मैम की आंख से आंसू आ गए.
मैंने पूछा, तो उन्होंने बताया कि दो साल से सेक्स नहीं किया है इसलिए दर्द हो रहा है.
हम दोनों वापस किस करने लगे. मैं चुम्मी के साथ में धक्के भी लगाने लगा.

थोड़ी देर बाद उसे भी मज़ा आने लगा और वो कमर हिला के साथ देने लगी. चूंकि मैं एक बार झड़ चुका था तो अबकी बार मुझे टाइम लगना स्वभाविक था. इस बीच वो दो बार झड़ गयी थी. मैं धक्के लगाता रहा. पन्द्रह बीस धक्के के बाद जब मेरा होने वाला था, तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी.

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