एक ने दिल तोड़ा, दूसरी ने चूत से जोड़ा

चूत पर मेरे हाथ के स्पर्श ने उसको गनगना दिया था. अब वो भी गर्म होने लगी थी. मैंने हाथ फेरा तो महसूस किया कि उसकी चूत पर हल्के हल्के छोटे छोटे से बाल थे. उसने बताया कि वो अपनी झांटों को डिजायन में ट्रिम करके रखती है.

हम आगे बढ़ते, उसके पहले ही मेरी निगाह आस पास गयी, तो देखा सामने 4-5 मजदूर जैसे लोग खड़े थे. उनको देख कर हमारी तो गांड फट गयी.
हम दोनों अलग हो गए तो उसमें से एक बोला- अरे करो करो, हमको तो देखने में ही बहुत मज़ा आ रहा है.
मैंने सोनी से कहा- डरो नहीं और चलो यहां से.
मैं उसका हाथ पकड़ कर उसको वहां से बाहर ले आया. मजदूरों की हिम्मत न हुई कि वे हमको रोक पाते.

दो दिन बाद मेरे घरवाले कानपुर चले गए. वो दूसरे दिन शाम को आने वाले थे. मैंने सोनी को कॉल किया और उसको अपने घर मिलने बुला लिया. मैं खुद उसको लेने उसके घर के पास गया और उसको लेकर अपने घर आ गया.

उसको अपने कमरे में बैठा कर मैं उसके लिए पानी लाया और कंप्यूटर पर ट्रिपल एक्स मूवी चला दी.
उसने बोला- प्लीज़ इसे बंद करो, इसको देखने से अच्छा है कि हम खुद ये करते हैं.

इतना सुनते ही मैंने कंप्यूटर पर ‘तुम मिले …’ फ़िल्म के रोमांटिक गाने लगा दिए.

फिर मैंने उसको अपनी गोद में बैठा कर चूमना शुरू कर दिया. धीरे धीरे हम दोनों के हाथ एक दूसरे के शरीर पर चलने लगे और हमारी जीभ एक दूसरे के मुँह का जायज़ा लेने लगीं.

मैंने एक हाथ से उसकी जीन्स का बटन खोला और उसकी पेंटी समेत जींस को नीचे घुटने तक खिसका दिया. उसकी नंगी चूत देख कर मेरा मन वहां चूमने का होने लगा. मैं उसको चित लिटा कर उसकी बुर की फांकें खोल कर जीभ से चूत को चाटने लगा.
वो मस्ती में अपना सर झटक रही थी और दोनों हाथों से मेरा सर अपनी चूत के अन्दर दबा रही थी.

लगभग 6-7 मिनट तक चूत को चूसने चाटने के बाद मैंने अपना सर निकाला और उसके होंठ चूमने लगा.

इसके बाद मैंने उसकी कुर्ती और ब्रा निकाल दिए और उसकी छोटी छोटी चूचियों को चूसने लगा. उसने भी मेरी टी-शर्ट और लोवर को उतार दिया और जॉकी के ऊपर से ही मेरा लंड सहलाने लगी.
मैंने उसके पूरे शरीर पर चूम चूम कर उसको गर्म कर दिया था.

फिर मैं अपना लंड पकड़ कर उसकी टांगों के बीच आया.
उसने बोला- ऐसे अन्दर मत डालो, कंडोम भी नहीं है.
उसकी इस बात का ख्याल था मुझे, इसलिए मैंने पहले से ही कंडोम ले लिया था.

मैंने बिस्तर के गद्दे के नीचे से कंडोम निकाल कर अपने लंड पर चढ़ा लिया. कंडोम चढ़ा लंड देख कर उसकी आंखों में चमक आ गयी.
मैंने प्यार से उसकी चूत पर लंड फेरा और आराम से अन्दर डालने लगा.

मैंने सोचा था कि इसकी चूत में दर्द जैसा कुछ होगा, लेकिन मेरा पूरा लंड सरसराता हुआ चूत की जड़ तक पहुंच गया. जब मेरे लंड ने उसकी चूत की तलहटी को छुआ, तब मुझे पता चला कि ये तो साली खेली खायी लौंडिया है.

खैर.. जो भी हो, उस वक़्त तो मेरे ऊपर चूत चुदाई का भूत सवार था. मैंने उसकी चूचियों के निप्पल चूसते हुए लंड अन्दर बाहर करना शुरू किया. उधर उसने भी अपने हाथ मेरी पीठ पर कस लिए और फिराने लगी.

मैंने उसके निप्पल छोड़ कर उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया और धकापेल चुदाई करने लगा.

सच में दोस्तो, वो मेरा पहला सेक्स था और उसमें बस आनन्द ही आनन्द था. कुछ देर बाद मैंने चुदाई की गति बढ़ा दी और वो भी एक छिपकली की तरह मुझसे चिपक गयी. हम पसीने से तरबतर हो गए थे और चरम पर पहुंचने ही वाले थे.

फिर वो मौका भी आया और उस परम आनन्द के मारे मेरी आंखें बंद हो गईं. मेरे स्खलन का क्या मस्त एहसास था. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं हवा में उड़ रहा हूँ. मैं इतना हल्का महसूस कर रहा था.

झड़ने के बाद मैं कुछ देर मैं उसके ऊपर ही पड़ा रहा. फिर हम उठे और बाथरूम जाकर खुद को साफ़ किया. हमने कपड़े पहने और मैंने उसे सीने से लगा लिया. मेरी आंखों से कृतज्ञता के आंसू छलक गए, जो वो देख नहीं पायी. उसके बाद मैंने उसको वहीं पर छोड़ा, जहां से लिया था.

हम उसके बाद भी कई बार मिले, पर चुदाई नहीं कर पाये. कभी जगह की कमी की वजह से, तो कभी किसी और वजह से.

आखिरी बार उससे मेरी बात शादी के बाद हुयी थी. उसने अपना पहले वाला वो नंबर ही बंद कर दिया था. मैं आज भी उसको याद करता हूँ और ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि वो जहां भी हो, खुश हो.

यह थी मेरी पहली चुदाई की कहानी. उसके बाद भी मैंने बहुत सी भाभियों को चोदा और अभी भी मौका मिलने पर चोदता हूँ. वो कहानियां फिर कभी जब आपकी सराहना या उपालम्भ प्राप्त होंगे.. तब आपसे साझा करूंगा.
आपका मित्र शुभ

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