गाँव की देसी गर्लफ्रेंड की बुर चुदाई

मैंने उसे उसके दुपट्टे पर लेटने के लिए कहा तो वह लेट गई। मैं उसके पूरे शरीर पर किस करने लगा और अपनी एक उंगली उसकी बुर में डाल कर आगे पीछे करने लगा।
थोड़ी देर बाद उसकी बुर से पानी निकलने लगा। वह मुझसे अपनी बुर में लंड डालने के लिए कहने लगी।

अब मैंने अपनी जेब से कंडोम निकालकर अपने लंड पर लगाया। मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रखकर अपना लंड उसकी बुर पर सेट करके धक्का मारा। मेरा आधा लंड उसकी बुर में चला गया।
एकदम से उसकी आंखों से आंसू निकल आए और वह दर्द से छटपटाने लगी, मुझे अपने से दूर करने लगी. तो मैं उसके होठों को चूसने लगा।

कुछ देर बाद जब उसे थोड़ा आराम मिला तब मैंने फिर से एक जोरदार झटका दिया।

अब मेरा पूरा लंड उसकी बुर में चला गया और वह दर्द के मारे चिल्लाने लगी और अपने नाखून मेरे पीठ पर गढ़ाने लगी। मैं कुछ देर वैसे ही उसके ऊपर लेटा रहा.

जब उसे थोड़ा आराम मिला तो मैं अपना लंड धीरे-धीरे उसके बुर में आगे पीछे करने लगा. अब उसे भी मजा आने लगा था. वह भी अपना कमर हिलाकर मेरा साथ देने लगी, मुझे जोर से धक्का लगाने के लिए बोलने लगी।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी।

बीस पच्चीस धक्के के बाद वह झड़ गई. थोड़ी देर बाद मैं भी झड़ गया।

कुछ देर तक मैं उसके ऊपर लेटा रहा। थोड़ी देर बाद मैं अपना लंड उसकी बुर से निकाला तो देखा कि कंडोम फट चुका था। जिसे देख कर वह डर गई और रोने लगी और कहने लगी- अगर वह प्रेगनेंट हो गई तो अपनी जान दे देगी।
मैंने उसे बहुत समझाया कि ऐसा कुछ नहीं होगा, मैं सुबह तुम्हें दवा लाकर दे दूंगा। उसे खा लेना कुछ नहीं होगा।

उसके बाद हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहने। थोड़ी देर वहीं पर रूक कर बातें की और अपने घर आ गए।

सुबह उठकर मैंने जल्दी से मेडिकल स्टोर से जाकर दवा लेकर सौम्या को दे दी।
दवा खाने के बाद जब तक उसका पीरियड नहीं आया, तब तक वह परेशान रही।

पीरियड आने के बाद खुश होकर मुझे कॉल करके बताया कि उसके पीरियड आया है।
इसके बाद नॉर्मल रहने लगी।

मैं अपनी अगली देसी सेक्स स्टोरी में बताऊंगा कि कैसे मैंने उसकी गांड मारी और उसने अपनी और सहेलियों को मुझसे चुदवाया।
आप लोगों को मेरी देसी चुदाई कहानी कैसी लगी, मुझे मेल करके जरूर बताइएगा।

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