गाँव की गोरियाँ देसी छोरियां

सुजाता को मैं मन ही मन में हर पोजीशन में … झुकाकर … लिटाकर … उसकी गांड में … उसके मुंह में … ऐसे सोच सोच कर मुठ मार रहा था।
मुझे क्या पता था वहां मेरे अलावा कोई और भी था।
वो थी सीमा…

सीमा मेरे खेत में घास लेने आई थी तो वो सीधे हमारे मक्की के खेत में आ गई थी. उसने मुझे मुठ मारते हुए देखा.
मैं मेरा मोटा लंबा लंड आंखें बंद करके हिला रहा था, उसने देख लिया तो उसके मन में भी मुझसे चुदने की इच्छा जागृत हो गयी … तभी उसने मेरे पास दबे पांव आकर मेरे लंड को पकड़ लिया और उसे सहलाने लगी।
मैंने एकदम घबराकर आंखें खोलकर देखा तो सीमा ने मेरे लंड को पकड़ा हुआ था।

मैं समझ गया कि साली की कामवासना उठान पर है, आज तो ये चुद कर ही जायेगी. मैं चुपचाप खड़ा हुआ और उसे अपने दोनों हाथों से पकड़कर अपने सामने किया. फिर उसकी सलवार का नाड़ा पकड़ कर खींच दिया तो उसकी सलवार सर्र से नीचे गिर गयी. खोलकर सलवार को दूर कर दिया। अब थी उसकी चड्डी उसे भी निकालकर साइड में फेंक दिया।

तब मैंने सीमा को नीचे बैठाया और मेरा लंड उसके मुँह में दिया और वो बिना किसी आनाकानी के चूसने लगी। उसके बाद फिर मैंने उसे घोड़ी बनाया और उसके चूत पर रखकर झट से मेरा लण्ड को अंदर किया, वैसे ही उसके मुँह से एक चीख निकली लेकिन फिर भी वो खुद अपने मुंह पर हाथ रखकर चुपचाप मेरे लण्ड को अंदर बाहर करने में मदद करने लगी।
मैं भी सीमा की देसी चूत को जोर जोर से चोदने लगा।

फिर मैंने उसे जमीन पर लिटा लिया और उसके ऊपर आकर चूत में लण्ड डालकर कर जोर जोर से चोदने लगा। कुछ ही समय बाद मेरे लण्ड ने सारा वीर्य उसके चूत में ही छोड़ दिया।
वो खड़ी होकर बोली- रेक्स, आज पहली बार तुमने खूब मजा दिया… उस विनोद का लंड तो छोटा पतला है, वो इतना मजा नहीं दे पाता है।
मैंने कहा- क्या तुम पहले चुद गई हो?
सीमा बोली- हाँ… बहुत बार!

मुझे आश्चर्य हुआ कि मुझसे भी आगे तो ये लड़कियाँ हैं।
जिस लड़के का नाम उसने लिया था विनोद … वो तो मेरा दोस्त था लेकिन उस कमीने ने कभी बताया नहीं था इस देसी चुदाई के बारे में!

कुंवारी बुर को चोदा
एक दिन सुबह ही मैं अपने कमरे के खिड़की के पास खड़ा था तो मैंने देखा कि सीमा सुजाता के साथ खेतों की ओर जा रही थी. मैं सीमा को पहले ही चोद चुका था, आज फिर मेरी तमन्ना जाग उठी कि फिर से एक बार सीमा के साथ खेत में सेक्स का खेल खेलना है. यह बात दिमाग में आते ही मेरा लंड खड़ा होकर बाहर आने को फड़फड़ाने लगा था.
मैंने अपने लंड को हाथ से पैंट के ऊपर से सहलाया. मेरा अंडरवियर तक गर्म हो गया था. कुछ भी हो सीमा को आज ही चोदना है.

मैं जल्दी से सीमा और सुजाता के पीछे पीछे कुछ दूरी रखकर जाने लगा था. उनसे छुपकर उनका पीछा करने लगा था. वो दोनों सुजाता के खेत पर पहुंचीं और एक इमली के पेड़ के नीचे खड़ी हो गईं.
आज ही सुबह सुजाता के मम्मी पापा किसी रिश्तेदार की शादी में गए हुए थे. तब ये दोनों खेतों में आई … पर क्यों?
सवाल मेरे दिमाग में घूम ही रहा था कि मैंने देखा राहुल, मेरा एक और दोस्त वहां आ गया था. अब मुझे स्पष्ट पता चल गया कि आज यहां क्या होने वाला है. राहुल भी सीमा को मिलने या यों कहें कि चोदने आया था. पता नहीं कितने यार थे इस सीमा के, एक विनोद, दूसरा मैं, तीसरा ये राहुल… सीमा थी ही चालू… यह समझ कर मेरे दिल को बड़ी ठेस पहुंची कि क्या सोचा था, क्या हो गया.

फिर मैं सुजाता को आज चोदने की सोचने लगा. प्लान मेरे दिमाग आने लगे थे कि कैसे उसे चुदवाने के लिए राजी करना है. मैंने देखा कि सीमा और राहुल साथ वाले नाले के पास को चली गई थी. उधर बहुत ऊंची झाड़ियां थीं. उसमें अगर कोई खड़े होकर भी चुदाई करे, तो भी बिल्कुल नजर नहीं आएगा. सुजाता वहां से मेरे पास वाले नीम के पेड़ की नीचे आकर खड़ी हो गई और कुछ सोचकर उसने अपना सलवार का नाड़ा खोल दिया और अपना बांयाँ हाथ अन्दर डालकर चूत सहलाने लगी थी.
इस वक्त उसकी आंखों में वासना का खुमार चढ़ा हुआ साफ़ दिख रहा था.

मुझे यही मौका सही लगा और मैंने दबे पांव जाकर उसे पीछे से कमर में हाथ डालकर अपनी बांहों में जकड़ लिया. मेरे अचानक इस हमले से वो एकदम से घबरा गई और अपने आपको मुझसे छुड़वाने की कशमकश करने लगी थी. वो अच्छा हुआ कि मैंने अपना एक हाथ उसके मुँह पर रख दिया था, नहीं तो वो चिल्लाने ही वाली थी.

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