गाँव की गोरियाँ देसी छोरियां

वो छटपटाते हुए छूटने का प्रयास कर रही थी. मैंने उसे चूमा और चुप रहने का कहा, मैंने कहा- शांत रहो.. कुछ नहीं कर रहा हूँ.
उसने मेरी आवाज पहचान ली थी और शांत खड़ी हो गई.
जब उसने मुझे देखा तो वो चुप हो गई.

मैंने उसके मुँह पर से हाथ हटाया और दूध सहलाते हुए कहा- तुम बहुत सुंदर हो.
सुजाता- सच में?
मैं- हां.
सुजाता- तुम यहाँ कब आये थे?
मैं- जब तुम अपनी चुत को सहला रही थीं.. तब आया था.
सुजाता- तुमने देखा था मुझे?
मैं- हाँ.. पर पूरा नहीं देख पाया था इसलिए पूरा देखने के लिए आया हूँ.
सुजाता- ठीक है, पर पहले एक कसम खाओ कि किसी को बताओगे नहीं.
मैं- तुम मेरी जान हो… कई दिन से तुम्हारे ख्यालों में रहता हूँ. आज खुले में मिली हो जान.. मैं कैसे ये सब किसी से कह सकता हूँ.
सुजाता- रेक्स सुनो, अभी मेरे साथ सीमा भी आई है.. और वो राहुल के साथ में है!

मैं- उन्हें तो अभी टाइम लगेगा, अभी तो वे कपड़े ही खोल रहे होंगे. तुम चाहो तो आज हम अपना खेल खेल सकते हैं.
सुजाता- लेकिन मुझे डर लग रहा है कि कोई आ ना जाए. मुझे कुछ न हो जाए.
मैं- डरो मत.. मैं आराम से करूँगा और कोई नहीं देखेगा.. आओ चलो मेरे साथ.

मैंने उसे अपने दोनों हाथों से अपनी बांहों में उठा लिया और उसी झाड़ी में ले चला.. जहां राहुल सीमा अपने सम्भोग में लीन हो रहे थे.

हम उनसे थोड़ी दूरी पर ही चुदाई का शुभ काम शुरू करने वाले थे. वहां से वो दोनों दिखाई दे रहे, लेकिन हम दोनों उन्हें नहीं दिखने वाले थे.
हालांकि वे देख भी लेते तो क्या कर लेते. हम सब काम एक ही तो कर रहे थे.

सुजाता थोड़ी सी घबराई हुई थी. मैं उसे बांहों में लेकर उसके मम्मों को सहलाने लगा. वैसे ही उसने मुझसे और चिपक कर कसकर पकड़ लिया.

अब तो मेरा लंड बाहर आने को उतावला हो गया था और मैंने उसे बाहर निकाल कर सुजाता के हाथ में थमा दिया. उसने मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर महसूस किया और फिर उसे बड़े ध्यान से देखने लगी, वो कहने लगी- आज पहली बार किसी का हाथ में पकड़ा है.
मैंने उससे कहा- अब देख लिया हो, तो इसे प्यार भी करो न.

फिर उसने नीचे बैठ कर मेरे लंड को सहलाते हुए चूम लिया.

सुजाता ने लंड को हिलाते हुए पकड़ा और कहा- यह तो बहुत बड़ा है.. मेरे अन्दर कैसे जाएगा. मेरी चुत तो फट ही जाएगी.
मैं- मेरी जान चिंता मत करो.. मैं बड़े प्यार से और आराम से चोदूंगा.

मैंने कुछ देर तक सुजाता से अपना लंड चुसवाया. उसको भी लंड से खेलना अच्छा लग रहा था. कुछ देर बाद मैंने सुजाता की सलवार को घुटने तक करके घोड़ी बना दिया. अब मैं उसके पीछे खड़ा होकर अपने लंड को उसकी बुर पर रगड़ने लगा.

उसकी बुर अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी.. एकदम चुदने के लिए तैयार थी.

मैंने पहले अपनी एक उंगली उसकी सील पैक बुर के अन्दर कर दी.. और अभी अन्दर बाहर करने ही वाला था कि उसके मुँह से ‘आह.. उह…’ की सिसकारियां आने लगीं. कुछ ही देर में चूत की गर्मी और अधिक भड़क उठी और उसकी बुर ने बहुत ज्यादा प्रीकम छोड़ कर चूत को चिकना और लिसलिसा कर दिया था.

अब वो चुदाई के लिए पूरी तरह तैयार थी. मैंने उंगली हटा कर अपने लंड को बुर की फांकों में फंसाया तो वो लंड की गर्मी से समझ गई कि लंड बुर में जाने वाला है. उसने अपनी टांगें और अधिक फैला ली थीं. चूंकि उसको चुदास चढ़ चुकी थी और आने वाले पल का जरा भी अहसास नहीं था. वो बस मस्त हुए जा रही थी.

मैंने हल्का सा दबाव बना कर लंड अन्दर धकेला, तो वो कराह उठी. मैंने उसे सहन करने को कहा और एक जोर का झटका लगा दिया. मेरा आधा लंड उसकी बुर में घुस चुका था.. उसकी आंखों से आंसू टपक पड़े और बुर से खून निकलने लगा था.
यह उसका पहला बार था. उसकी झिल्ली टूट चुकी थी. वो दबी आवाज में कराहते हुए कहे जा रही थी- आह.. बहुत दर्द हो रहा है.. बस्स करो.. मैं मर जाऊंगी. निकाल लो प्लीज़.

लेकिन मैं अब रुकने वाला नहीं था, मैंने पूरी ताकत से एक और झटका दिया और पूरा लंड बुर में समा गया. न चाहते हुए भी उसके मुँह से चीख निकल गई. जो उन दोनों ने सुन ली. राहुल और सीमा उधर सामने चुदाई के खेल में लगे थे. सुजाता की चीख से उन दोनों की कामक्रीड़ा में व्यवधान आया और वो दोनों हमारी ओर गौर और आश्चर्य से देखने लगे.

मैंने उनके देखने पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. मैंने अपने लंड को सुजाता की चुत में अन्दर बाहर करना जारी रखा. अब तक दस बारह चोटें लग चुकी थीं जिससे सुजाता को भी दर्द कम हो गया और वो भी आगे पीछे करने लगी थी.

Pages: 1 2 3 4 5

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *