हनीमून पे वाइफ़ स्वैपिंग

दोस्तो, मैं आपकी चहेती सीमा सिंह.
जिन लोगों ने मेरी पहली कहानियाँ
पढ़ीं हैं वो तो मुझे अच्छी तरह से जानते पहचानते हैं, जिन्होंने नहीं पढ़ीं, वो पढ़ कर देखें और मेरी कामुकता की ऊँचाई देखें कि जब मेरी चूत में आग लगती है तो कितनी लगती है।
हाँ, यह बात अलग है कि आग तो हर वक़्त लगी ही रहती है।
खैर अब मुद्दे पर आती हूँ, आज आपको मैं अपनी एक ऐसी बात बताने जा रही हूँ, जिसे मेरे और मेरे पति के अलावा और कोई नहीं जानता।
आप भी सुनिए।

जब मेरी और धीरज की शादी हुई तो मैंने सोचा कि शादी के कुछ दिन बाद हनीमून पे जाएंगे।
मगर इन्होंने बताया- अभी नहीं, हनीमून पर जाने का प्रोग्राम अभी कुछ दिन बाद का है।

पता चला कि इनके एक दोस्त की शादी हमसे एक महीना पहले हुई थी, वो भी अभी हनीमून पर नहीं गया, और एक दोस्त की शादी 10 दिन बाद थी।
इन तीनों दोस्तो का प्रोग्राम था कि अपनी अपनी शादी के बाद हनीमून पर एक साथ जाएंगे।
एक तो तीन दोस्तों का साथ हो जाएगा और दूसरा तीनों की बीवियाँ भी आपस में दोस्त बन जाएँगी।

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तो हमारी शादी के करीब 25 दिन बाद हम तीनों युगल अपने हनीमून के लिए दिल्ली से मनाली के लिए चल पड़े।
मैं सीमा, मेरे पति धीरज, इनका दोस्त कमल, उसकी बीवी ऋतु, दूसरा दोस्त किशोर और उसकी बीवी कविता।
हम सब के सब 23 से लेकर 28 साल की उम्र के थे, सो सब हम उम्र थे।

सबसे बड़ा किशोर 28 का और सबसे छोटी ऋतु 23 की, बाकी सब इसके बीच, कोई 24 का, कोई 25 की, 26 का 27 की. सब के सब किशोर की ईनोवा में बैठ कर निकल पड़े।
हम तीनों लेडीज़ के हाथों में चूड़े, मेहंदी।
अब सब अच्छे घरों से थे तो सफर में हम तीनों लेडीज़ के भी जींस पहनी थी।

सारे रास्ते खाते पीते मस्ती करते जा रहे थे। सफर लंबा था तो तय यह हुआ था कि हर कोई बाँट बाँट के गाड़ी चलाएगा, ताकि एक को ही थकावट न हो।
इसका एक और फायदा यह था कि हर जोड़े को पिछली सीट पर बैठे बैठे मज़े लेने का मौका मिल रहा था।

जो गाड़ी चला रहा था वो तो सामने देख रहा था, पिछले दो जोड़े आपस में बिज़ी रहते। एक दूसरे के सामने ही लिप किसिंग, बोबे दबाना, गंदे जोक्स, सब चल रहा था।
मगर हर कोई अपनी पार्टनर के साथ ही कर रहा था, किसी ने भी अपने दोस्त की पार्टनर के साथ कोई भी छेड़खानी या बदतमीजी नहीं की।

मनाली पहुँचे, होटल में तीन कमरे साथ साथ लिए।
सबसे पहले जो काम होटल में पहुँच कर हुआ वो था सेक्स।
सबने कमरे के अंदर घुसते ही रूम लॉक किया और सबसे पहले अपनी अपनी बीवी की बजाई।
इसका पता साथ वाले कमरे से आने वाली चीख़ों से लग गया, सेक्स के दौरान कविता बहुत शोर मचाती है।

उसके बाद सब तैयार होकर बाहर आए, शाम को बाज़ारों में घूमे, बाहर ही खाना खाया, रात को हम तीनों लेडीज़ की टाँगें फिर ऊपर उठाई गई।
अगले दिन सब आस पास के नज़ारे देखने गए।
मगर इस दौरान भी सब एक दूसरे के सामने अपनी अपनी बीवियों से चूमा चाटी करते रहे।
और अब तो हम लेडीज़ की शर्म भी उतर गई थी, किसी भी लड़की ने अपने पति को उसके दोस्तों के सामने किस देने में या फिर और कहीं हाथ लगवाने या और कोई हरकत करने पर कोई ऐतराज नहीं होता था।

हमारा करीब एक हफ्ते का प्रोग्राम था, 2 दिन तो सब ठीक चला, इस दौरान हम सबने खूब खाया, पिया, मीट, दारू और सिगरेट किसी चीज़ का परहेज नहीं किया।
मतलब हम सब एक दूसरे के इतना करीब आ गए कि एक दूसरे से मुँह से लेकर शराब या सिगरेट पी लेते थे।

हाथों में मेहंदी, कलाई में लाल चूड़े, मांग में सिंदूर, गले में मंगलसूत्र और हाथ में पेग और सिगरेट।
सब कुछ एक साथ ही चल रहा था।
जैसे हम सब स्वर्ग में जी रहे हों।

मगर एक और चीज़ भी थी, जो हम सब में कॉमन हो रही थी, वो थी बीवियाँ बदल कर फोटोज़ खींचना, और इसमें मर्दों ने तो कुछ ज़्यादा ही बेशर्मी दिखाई, वो होंठ चूमने और बोबे पकड़ कर फोटो खींचने की ज़िद करने लगे।
मगर इस बात के लिए किसी भी लड़की ने हाँ नहीं कही।

मगर जब पतियों ने ज़बरदस्ती की तो किसी लड़की ने कोई बहुत ज़्यादा विरोध भी नहीं जताया और ऐसे ही हर मर्द का हरेक औरत के बदन पे अधिकार सा हो गया।
अब मेरे बोबे हम तीनों लड़कियों में सब से बड़े थे, तो मेरे बोबे सब से ज़्यादा दबाये गए, मेरे चूतड़ों को सबसे ज़्यादा सहलाया गया।
अब तो हम सब भी इस बात का बुरा नहीं मानती थी कि अगर कोई भी मर्द किसी भी औरत को बाहों में भर लेता, या मज़ाक में उसके सीने या फिर बदन पे और कहीं छू लेता।

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