कच्ची कली कचनार की

और मैं उसकी चूची को मसल रहा था इसलिये वो चुदवाने के लिये तड़प रही थी।

अब मैंने लंड का जोर लगाकर कोमल की बुर में घुसाया तो मेरे लंड का सुपारा अंदर चला गया। अब मैंने एक जोर का झटका लगा दिया और कोमल दर्द के मारे जोर से चिल्लाई- आआहह चाचू … मर गयी मैं!
इतने में चीख सुनके उसकी मम्मी दरवाजे पे आके बोली- क्या हुआ कोमल?
मैंने कहा- कुछ नहीं भाभी, कोमल बराबर नहीं पढ़ रही थी तो मैंने पीट दिया।
वो बोली- हां, इसको पीट पीट के पढ़ाओ देवर जी।
मैंने कहा- ठीक है, आप सो जाओ।
तो भाभी अपने रूम में चली गयी।

अब मैंने अपना पूरा लंड उस कच्ची कली की बुर के पूरा अंदर पेल दिया। कोमल की चूत से खून का फव्वारा छूट गया और वो दर्द से छटपटाने लगी।
मैंने उसके मुंह पर हाथ रख दिया ताकि आवाज बाहर ना जा सके।

मैं बोला- जान, थोड़ी हिम्मत रख, पहली बार थोड़ा दर्द होता ही है।
अब मैं थोड़ी देर लंड को अंदर रख के उसकी चूचियों को सहलाने लगा।

वो अपनी बुर से इतना खून निकला देख के घबरा गयी।
मैंने कहा- कुछ नहीं, तेरी बुर की सील टूटी है इसलिये इतना खून निकला है, अभी दो मिनट में खून निकलना रुक जाएगा और तेरा दर्द भी खत्म हो जाएगा, सब ठीक हो जायेगा।

अब मैं एकदम धीरे धीरे अपने लंड को उसकी ताजी फटी चूत के अंदर बाहर करने लगा।

थोड़ी देर मैं कोमल को भी मजा आने लगा। अब उसने मुझे झकड़ लिया और बोली- चाचूजान, आपका लंड तो बहुत बड़ा है, मेरी बुर का भोसड़ा बना दिया।
मैं बोला- मेरी भतीजी जान, अब तो तू मेरी रंडी बन चुकी है, मैं तुझे रोज चोदूँगा।
कोमल बोली- मैं तो कबसे तड़प रही थी चुदवाने के लिए … आखिर आज मेरी खवाहिश पूरी हो गयी।

और वह जोर से उछल उछल कर लंड अपनी चूत में लेने लगी और आआहहहह ईईई उउउ सीईईई करने लगी।

मैं जोर जोर से उस कमसिन जवान लड़की की चूत चुदाई कर रहा था और उसके साथ लिप किस कर रहा था. मैं उसकी संतरे जैसी कोमल गोरी चूचियाँ दबाकर मसल रहा था। वो एकदम कमसिन नवयुवती और मैं चालीस साल का मुस्तंडा।

कोमल बहुत गर्म हो चुकी थी। उसकी टाइट बुर में मेरा लंड गचागच घुस रहा था। पूरा रूम में चुदासा माहौल हो गया था।
मैं बोल रहा था- ओ मेरी रंडी ले मेरा लंड … और ले और ले। आआह ईईई ईईई आआहह आआह आआइइ आआईईई!

इतने में कोमल की बुर का का पानी छूट गया और वो पस्त हो गयी।
अब मैंने चुदाई की स्पीड बढ़ा दी- आआहह कोमल … मेरी जाआनन ओओओं … जाआआन ओओओ … मेरी रंडी आआहहह आआहह!
और मेरे लंड ने भी पानी छोड़ दिया। मैंने उसकी बुर को अपने वीर्य से भर दिया.

कोमल भी मेरी तरफ देख कर रंडी के जैसे मुस्कुराने लगी।
मैंने वो प्लास्टिक जो नीचे बिछाई थी, उसको हटा दिया और उसकी बुर को बराबर साफ कर दिया।

कोमल बोली- चाचू जान बहुत मजा आया।
मैंने कहा- अब ऐसा मजा तुझे मैं रोज चोद कर दूँगा।

मैं थोड़ी देर मैं फिर से अपने दोस्त की बेटी की चूत चुदाई के लिए तैयार हो गया.

अब मैं बिस्तर पर लेट गया, मैंने अपने लंड को हाथ से पकड़ा और कोमल को उसकी चूत मेरे लैंड के सुपारे पर रख कर अपने ऊपर बैठने को कहा. उसने ऐसा ही किया और मैंने अपने कूल्गे उचका कर नीचे से अपना लंड चूत के अंदर पेल दिया।

कोमल भी मेरा साथ देने लगी और मजे से चुदने लगी। अबकी बार मैंने उसको अलग अलग पोजीशन में बहुत देर तक चोदा. इस बीच कोमल की बुर 2 बार पानी छोड़ चुकी थी।

मेरा भी पानी निकलने वाला था तो मैंने लंड निकाल कर कोमल के मुख में डाल दिया और वो लंड को चूस चूस के लंड रस निकालने लगी।
मैंने आआह हहह आआह हहह करके पूरा लंड कोमल के मुंह में खाली कर दिया। कोमल पूरा वीर्य पी गयी और लंड चाट चाट के पूरा साफ कर दिया।

फिर वो मेरे सीने पे सर रखके लेट गयी और बोली- हाय चाचू, आपके लंड में तो बहुत ताकत है. मुझे तो मजा आ गया चाचू आपका लंड अपने अंदर लेकर!
मैं बोला- मेरी जान, मैं तो कब से तुझे चोदना चाहता था, पर डरता था कि तू बुरा ना माँ जाए।

अब हम लोग रोज रात में चुदाई का मजा लेने लगे। वो प्रेगनेट ना हो जाये इसके लिये उसके लिए ‘सहेली’ गोलियाँ लाकर रख ली थी, मैं उसे रोज गोली खिला देता था। अब कोमल मेरे साथ बहुत खुश थी.

कुछ दिन बाद उसने बताया कि वो लव लेटर किसी ने नहीं दिया था बल्कि मुझे फंसाने के लिये उसने खुद लिखा था।
मैंने उसे कहा- तू बहुत बड़ी कमीनी निकली.
वो बोली- चाचू, कमीनी नहीं … रंडी … मैं आपकी रंडी हूँ.

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