धान के खेत में दो रसीली चूतों की धुनाई

आंखें बंद करते ही महरून भीगे ब्लाउज में उस औरत के मोटे चूचे मेरे ख्यालों में आकर आंखों के सामने ऊभर आए। मैंने झट से पैंट की चेन खोली और लौड़े को एक बार अंडरवियर के ऊपर से ही सहलाया और इसने खड़ा होने में एक मिनट का कुछ ही हिस्सा लिया। मैंने उस औरत के चूचों के बारे में सोचते हुए लौड़े को अंडरवियर से बाहर निकाला और लंड को हिलाने लगा। हाय, उसके मोटे चूचे, हाय! उसका भीगा ब्लाउज, हाय! उनको दबा दूं। चूस लूं …“आआआअह्हह्हह……..ईईईईईईई…….ओह्ह्ह्…….आहहहहहह……म्म्म्म्म्म्….” करता हुआ मैं वहीं पर मुट्ठ मारने लगा। और 2 मिनट में ही लंड ने थूकना शुरु कर दिया।
मैं दीवार के सहारे लगकर ऐसे ही खड़ा रहा और कुछ पल के बाद शांत हुआ। और वहां से निकल गया। घर जाकर थोड़ा टाइम पास किया। लेकिन 2 घंटे के अंदर ही लौड़े ने फिर परेशान करना शुरु कर दिया।
बोला- एक बार और चल ना खेत की तरफ।

मैंने बहुत समझाया लेकिन कमबख्त नहीं माना। शाम होने वाली थी। मैं घर से दोबारा निकल पड़ा। मैं सीधा खेतों की तरफ चला जा रहा था। काश..वो मोटे चूचों वाली वहीं मिल जाए। काश…उसकी चूत के दर्शन हो जाएं। काश…वो पट जाए और मुझसे अपनी चूत चुदवाए। वासना की मीठी मनभावन तरंगे मेरे कदमों की रफ्तार को सहारा दे रही थीं। कुछ ही देर में मैं खेत के पास पहुंचने ही वाला था।
लेकिन ये क्या, ये लोग तो गांव की तरफ चले आ रहे हैं। मेरे अरमानों पर पानी फिर गया। अब क्या…बुर तो हाथ से निकल गई। मैंने सोचा, कोई बात नहीं, अभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। मैं आगे चलता रहा। वो सब कच्ची पगडंडी पर चलते हुए गांव की तरफ आ रहे थे और मैं खेतों की तरफ जा रहा था। 5-6 औरतें थीं, मैं अपने वाली को ढूंढ रहा था। थोड़ा ध्यान दिया तो पता चला कि वो लाइन में सबसे पीछे वाली है।
मैंने चोर नज़रों से यहां-वहां देखने के बहाने बीच-बीच में उसकी तरफ देखना जारी रखा। थोड़ा पास आया तो पता चला वो भी मुझे देख रही थी। अब मेरी हिम्मत थोड़ी बढ़ गई और मैंने उसको घूरना शुरु कर दिया। वो भी मेरी तरफ देखकर हल्के से मुस्कुरा रही थी। मैंने उसके चूचों की तरफ भी देखा । वो साड़ी के पल्लू के नीचे दबे हुए ऊपर नीचे हिल रहे थे। वो मेरे और पास आती जा रही थी। बाकी औरतों ने घूंघट डाला हुआ था लेकिन उसने खोला हुआ था।
धीरे-धीरे वो मेरे करीब से गुज़री…मैंने उसको देखा और उसने मुझे। वो मेरी नज़रों में नज़र मिलाकर देख रही थी। जैसे कह रही हो- मैं तो तैयार हूं। मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे। चूत का इंतज़ाम हो गया लगता है। वाह रे गिरीश, क्या किस्मत पाई है तूने। इतने मोटे चूचों वाली चिड़िया हाथ लगी है। मैंने उसकी तरफ देखते हुए आंख मार दी और वो भी मुस्कुरा दी। बस, अब तो मुझे यकीन हो गया कि ये वाली तो चुदकर ही रहेगी। मैं आगे बढ़ गया। मन ही मन अपनी कामयाबी पर इतरा रहा था। आगे चला तो देखा सामने से मेरे दो दोस्त भी आ रहे थे। मेरे मुस्कुराते हुए चेहरे को देखकर बोले- क्या बात है गिरीश, काफी खुश लग रहा है।

मैंने एक बार तो सोचा, कि इतने दिनों बाद मुर्गी फंसी है, अकेले ही चट कर जाता हूं, लेकिन फिर अपनी किस्मत का गुणगान करते हुए बता ही दिया कि अभी अभी एक मोटे चूचों वाली से नैन-मटक्का करके आ रहा हूं। पूरी माल है। चुदने के लिए तैयार है बस। वो भी मुझे शाबाशी देने लगे। बोले, वाह यार, तू तो बड़ा खिलाड़ी है। हमें भी दिला दे ना। 6 महीने से चूत के दर्शन ही नहीं हुए हैं।
मैंने कहा- पहले मैं तो मत्था टेक लूं, फिर तुम भी दर्शन कर लेना।
हम सारे दोस्त हंसने लगे और गांव की तरफ वापस बढ़ने लगे। अंधेरा घिरता हुआ आ रहा था। हम गांव की सीमा से थोड़ी ही दूर थे। हमने देखा कि दो औरतें वापस खेतों की तरफ चली आ रही हैं।
सोचा कि शाम का समय है शायद शौच वगैरह करने जा रही होंगी। क्योंकि गांव में अक्सर महिलाएं खेतों या खुले में रात के अंधेरे में ही जाती हैं। जैसे ही हम पास पहुंचे मैंने देखा कि ये तो वही औरत है जो कुछ देर पहले धान की कटाई के खेत से गई थी। लेकिन उसके साथ ये दूसरी औरत कौन है…?
मैंने अपने दोस्तों के कान में चुपके से फुसफुसाया -अबे..ये तो वही है। मोटे चूचों वाली। मेरे दोनों दोस्त भी उनको घूरने लगे।
वो दोनों हमारे पास से गुजरीं लेकिन उन्होंने हमारी तरफ देखा नहीं। क्योंकि हम तीन लोग थे। इसलिए वो हमें नज़अंदाज़ करके निकल गईं। मैंने पीछे मुड़कर देखा तो मेरे वाली मुझे मुड़कर देख रही थी और हल्के से मुस्कुरा रही थी। मेरे दिल पर छुरी चल गई। मैंने अपने दोस्तों से कहा- यार ..ये तो पूरी लाइन दे रही है। वो बोले- चल, हम भी चलें क्या इनके पीछे..?
वैसे भी अब कौन आने वाला है खेतों में…अगर बात बन गई तो मज़ा आ जाएगा।

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