धान के खेत में दो रसीली चूतों की धुनाई

मैंने कहा- देख लो सालों…कभी मरवा दो।
वो बोले- डरता क्यों है, हम हैं ना तेरे साथ, कुछ नहीं होगा।
मैंने कहा- ठीक है, हम भी उनके पीछे-पीछे चल पड़े। जल्दी ही वो खेत आ गया जहां पर वो कटाई कर रही थीं। हमें देखते हुए वो खेत के अंदर घुस गईं। हम भी उनके थोड़ा ही पीछे पगडंडी पर चले आ रहे थे। खेत के अंदर जाकर वो हमारी तरफ मुंह करके खड़ी हो गईं। उन्होनें हमें देखते हुए अपनी साड़ी उठाई उसको जांघों तक लाकर नीचे बैठ गईं। ये सब करते हुए वो दोनों ज़रा भी नहीं शरमा रही थीं। हम तीनों की हवस ने भी उनकी चूत की गर्मी को महसूस कर लिया और खेत में उतर गए। वो ऐसे ही बैठी हुई थीं। पास जाते ही वो दोनों पीठ के बल नीचे लेट गईं और साड़ी को उठा लिया। हमने भी कुछ न सोचा और मैं अपने वाली के पास जाकर बैठ गया और मेरे दोनों दोस्त दूसरी औरत के पास जाकर बैठ गए। मैंने पूछा- क्या नाम है छमिया। वो बोली- रनिया और ये है मेरी सहेली झुम्पा।

मैंने कहा- तो क्या इरादा है। वो बोली- इरादा तो तोहार दिन में ही देखत रही मैं। तभी तो इही बखत आई हूं।
मैंने कहा- ई बात है का।
कहते हुए मैंने उसकी जांघों पर हाथ फेरना शुरु कर दिया। मेरी शुरुआत देखकर मेरे दोस्तों ने झुम्पा के साथ भी ऐसी हरकतें करनी शुरु कर दीं। हम तीनों जवान लौंडे थे, इसलिए ज्यादा देर अपने आप पर काबू नहीं रख पाए। मैंने तो फटाक से उसकी चूत पर अपना हाथ रगड़ना शुरु कर दिया। मैंने झुम्पा की तरफ देखा तो मेरे दोस्तों ने उसको नंगी ही कर लिया था। और अपने कपड़े उतारने में लगे हुए थे। मैंने रनिया के मोटे चूचों को दबाते हुए उसके होठों को चूसना शुरु किया और एक हाथ से उसकी चूत को मसलना जारी रखा। मैंने अगले ही पल अपनी पैंट की चेन खोली और अपना खड़ा लौड़ा रनिया कि बुर पर रगड़ते हुए उसके ब्लाउज को उतरवा दिया।
रनिया के मोटे सांवले चूचे मेरे हाथों में थे और लंड उसकी चूत में जाने के लिये मचल रहा था। मैं ज्यादा देर खुद को रोक नहीं पाता था। इसलिए मैंने सोचा, इससे पहले कि मेरा लंड मेरे अरमानों पर थूके मुझे इसको गुफा में डाल देना चाहिए। मैंने तुरंत रनिया की चूत में लंड को उतार दिया और उसके चूचों में मुंह डालकर उसको चोदने लगा। उसके मुंह से कामुक सिसकियां निकलना शुरु हो गईं। “उई…..उई….उई……माँ…..ओह्ह्ह्ह माँ…….अहह्ह्ह्हह…….” करती हुई वो मेरे लंड से चुद रही थी। मैंने दूसरी तरफ देखा तो मेरे एक दोस्त ने झुम्पा की चूत में लंड डाल रखा था तो दूसरे ने उसके मुंह में।

वो दोनों भी कामुक सिसकियां लेते हुए उसके नंगे बदन से खेल रहे थे। आह…कितना मज़ा आ रहा था यार! एक चूत में मेरा लंड गया हुआ था और साथ ही दूसरी चूत को मैं चुदते हुए देख रहा था। इस वक्त कामदेव की कृपा दिल खोलकर बरस रही थी हम पाचों पर। मैंने रनिया की चूत में लंड के धक्के तेज़ कर दिए और उसकी सिसकी दर्द के साथ-साथ आनंद का आभास भी करवाने लगी…“ओह्ह माँ……ओह्ह माँ….उ उ उ उ उ…..अअअअअ……. आआआआ……” करती हुई अपनी चूत चुदवा रही थी। मैं आनंद में मस्त था। मेरे साथ ही मेरे दोनों दोस्त झुम्पा की चीखें निकलवा रहे थे। माहौल इतना कामुक हो गया कि मैंने अपनी भावनाओं पर नियंत्रण खो दिया और रनिया की चूत में वीर्य की धार निकल पड़ी।

मैं तो कुछ ही देर में शांत हो गया लेकिन मेरे दोनों दोस्त अभी झुम्पा को मसलने में लगे हुए थे। मेरे उठते ही एक दोस्त ने झुम्पा के चूचों पर लंड लाकर मुट्ठ मारना शुरु कर दी और दूसरे ने चूत में धक्कों की स्पीड बढ़ा दी। मिनट भर के अंदर ही वो दोनों भी झड़कर उठ गए। हम सबने अपने कपड़े ठीक किए और फटाफट खेत से निकल गए। उसके बाद तो उन दोनों कई बार हमारे प्यासे जवान लौड़ों को अपनी चूत का पानी पिलाया।

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