मां को चुदते देखा

उसके मुंह से सिसकारियां निकलते ही मां ने भी अपने हाथ को उस आदमी के पीठ पर घुमाना शुरू कर दिया। दुसरे हाथ से वो उसका शर्ट भी निकाल रही थी। यहां उन दोनों को किसी के आने का डर नही था, तो दोनों ही पूरी तरह से बेशर्म होकर एक-दूसरे के बदन से खेल रहे थे।

अगले ही पल मां ने उस आदमी का शर्ट उतार दिया, अब मां उसकी छाती पर अपने हाथ घुमाने लगी। और बीच बीच मे उसके निप्पल अपनी उंगलियों में पकडकर खींच देती, जिससे उसके मुँह से दर्द की सीत्कारे निकल जाती।

वो आदमी भी अगले ही पल मां के निप्पल को अपने दातों के बीच पकडकर खींच देता था।

अब मां ने अपना हाथ सीधे ले जाकर उसकी पैंट के ऊपर से ही उसके लंड पर रख दिया। तो उसने भी मां की साडी के ऊपर से ही अपना हाथ चुत पर रख दिया।

एक बार को तो उसने पूरी चुत को ही अपनी मुट्ठी में भींच सा लिया, जिस वजह से मां ने उसे अपने से चिपका लिया। तभी उस आदमी ने अब मां की साडी को धीरे धीरे ऊपर ऊठाना शुरू कर दिया, और साडी को मां की जांघों तक लाकर रख दिया।

अब मां की गोरी चिट्टी जांघे नग्न अवस्था मे खुली थी। मां ने भी उस पर कोई ऐतबार ना दिखाते हुए, उसका हाथ अपने हाथ मे पकडकर उसे अपनी साडी के अंदर घुसेड दिया। उसे भी तो यही चाहिए था, उसने तुरंत ही मां की साडी को निकाल ही दिया।

साडी अलग करने के अगले ही पल उसने मेरी मां को खडी करके पेटीकोट का नाडा भी खोल दिया।

अब पेटीकोट भी जमीन पर गिर चुका था, और मां पूर्ण रूप से नंगी हो चुकी थी। मां को इस हालत में देखकर मुझे भी कुछ कुछ होने लगा था, मेरा भी लंड खडा होने लगा था। मां के चुचे काफी बडे लग रहे थे, उनमें अभी भी कसावट थी, वो अभी भी शान में खडे थे।

मां ने अपने शरीर पर अनचाहे बाल रखे नही थे, तो उनकी चुत के दीदार सीधे ही होने लगे थे। अब उस आदमी ने मां को वहीं पर सोफे पर लिटा दिया और मां के दोनों पैरों को अपने कंधों पर लेटे हुए फैला दिया।

मां के दोनों पैर अलग करते हुए वो खुद उन दो पैरों के बीच आ गया। दो पैरों के बीच आते ही उसने अपना मुंह मां की चुत पर रख दिया। अब मां उससे अपनी चुत चटवा रही थी, और वो भी मजे से चुत चुसाई कर रहा था।

वो आदमी चुत चुसाई करते हुए मां के उरोज दबाकर मजे भी ले रहा था। और बीच बीच मे अपने लौडे को भी सहला रहा था। कुछ देर मां की चुत चूसने के बाद, वो आदमी उठ गया और मां के सामने खडा हो गया।

तो मां ने भी उसकी पैंट उतार दी और चड्डी के ऊपर से ही उसके लौडे पर अपना मुंह लगा दिया। कुछ ही पलों में मां ने उसकी चड्डी भी नीचे खिसकाते हुए उतार दी।

चड्डी नीचे खिसकाते ही उसका लंड एक झटके से ऊपर निकल आया। उसका लंड काफी लंबा और मोटा था। इस आदमी का लंड देखकर मुझे फैजान अंकल का लौडा भी छोटा लगने लगा था।

उसका लंड बाहर आते ही उसने अपने हाथ मे लेते हुए मां के मुंह मे घुसा दिया। अब मां भी उसे किसी लॉलीपाप की तरह चूस रही थी।

पहले तो मां ने उसके लंड पर अपनी जीभ घुमाई, फिर उसके टोपे को अपने मुंह मे भरते हुए कामुक अंदाज में चूसने लगी। जैसे ही मां ने उसका लंड चूसना शुरू कर दिया, उसने आहें भरना चालू कर दिया।

मां ने अभी लंड चूसना शुरू ही किया था कि, कुछ देर में ही उसका बॉस वहां आ पहुंचा। बॉस को देखते ही मां ने उस आदमी के लौडे को अपने मुंह से बाहर निकाल लिया। और उठकर बॉस के गले मिलने चली गई।

उसके बॉस ने भी अपनी बाहें फैलाते हुए उसका स्वागत किया। बॉस ने मां को गले लगाते हुए कहा, “आज मेरे आने से पहले ही शुरू हो गए, कुछ देर रुक जाते।”

तो मां ने अपनी चुत की तरफ इशारा करते हुए कहा, “यह तुम्हारी मुनिया में बहुत खुजली हो रही थी, इसलिए हमने शुरू कर दिया। अब तुम आ गए हो, तो तुम ही संभालो इसे।”

तो बॉस ने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर मां की चुत के होठों को फैलाकर देखा। और फिर अपने हाथ मे थोडा थूक लेकर उसे मां की चुत पर मल दिया।

उसी के साथ बॉस ने मेरी मां की चुत में अपनी एक उंगली डाल दी। तो मां ने भी बडी अदा के साथ अपना हाथ उनके लंड पर रखकर पैंट के ऊपर से ही बॉस के लंड को सहलाने लगी।

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