मामी की गांड चोद कर सुहागरात मनायी

तभी मैंने फिर से थोड़ा लंड को बाहर निकाल के एक जोर का धक्का मारकर पूरा लंड उनकी गांड में घुसा दिया, जिस कारण उनकी गांड के अन्दर की दीवारों को चीरता हुआ मेरा लंड जड़ तक घुस गया.

इस बार हल्की सी आवाज़ से मामी चीख निकल पड़ी- आहह्ह्ह उह्ह्ह्ह..

मामी ने कसकर बेडशीट पकड़ ली और अपनी आँख बंद कर लीं. मैंने देखा कि मामी की आँख में से पानी निकल गया.

फिर में थोड़ी देर वैसे ही रहा. जैसे ही मामी थोड़ी नॉर्मल हुईं, तो मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए. अब उनको भी मज़ा आ रहा था. वो मादक कराह लेते हुए सिसकारने लगी थीं- हाईईईई रे.. हाई.. इसमें तो चूत से भी ज़्यादा मज़ा आता है.. और कसकर पेल मेरे राहुल, हाईईई रे.. बहुत मजाआअ आ रहा है.. सीईईईई हाईई.. चोदो.. सीईईईई और कसकर.. हायईईई.. उईईईई माँ.. आआह.. मजा आ गया रे..

अब मैं उनको बस धकापेल चोदता ही जा रहा था. वो ‘उफ्फ्फ… स्स्स्सस..’ करती जा रही थीं.

मामी जी की गांड का उद्घाटन हो चुका था. इसके बाद क्या हुआ, यह अगले भाग में बताऊंगा.

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कहानी जारी रहेगी.

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