मौसी की बेटी की चूत चुदाई की वो हसीन रात

कुछ देर ऐसे ही सहलाने के बाद अर्चना के निप्पल कड़े होकर तन गए और अर्चना ने भी थोड़ी हरकत की. इस वजह से मेरी तो फट के हाथ में आ गयी कि कहीं मेरी बहन जाग तो नहीं गयी?
फिर वी मेरी तरफ पूरी तरह से मुड़ गयी, मैं वैसे ही डर के मारे पड़ा रहा और यह देखने लगा कि कहीं वो जागी हुई तो नहीं है.

कुछ देर के बाद जब मुझे यह यकीन हो गया कि वो नींद में ही है, तब जाकर कहीं मेरी जान में जान आयी। अब हुआ यह कि उसके पूरी तरह से करवट लेने की वजह से मेरा हाथ उसकी चूचियों के नीचे दब गया था,

मैंने बड़ी मुश्किल के बाद वहां से अपना हाथ निकाला।

थोड़ी देर शांत रहने के बाद मैंने हल्के से अपना हाथ फिर से उसकी दूसरी चूची के ऊपर रखा और हल्के हल्के सहलाने लगा। कुछ देर सहलाने के बाद मैंने धीरे-धीरे अपने हाथों का दबाव अर्चना की चूचियों के ऊपर बढ़ाया और दबाने लगा.

तभी अचानक मेरी बहन का हाथ मेरे हाथ के ऊपर आया, मेरी तो फिर से गांड फट गयी… डर के मारे मेरी जान निकली जा रही थी. अब तो मैं गया!
कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ!

तभी अर्चना उठकर बैठ गयी और मुझसे बोली- ये क्या कर रहा है?
मैं चुप रहा, डर के मारे तो जैसे मेरी जबान ही कट गयी हो!
अर्चना ने दुबारा पूछा तो मैं डरते हुए उससे माफी मांगने लगा और गिड़गिड़ाते हुआ उससे बोला- माफ कर दो दीदी… गलती हो गयी! मैं अब से कभी सपने में भी ऐसा नहीं करूँगा! करना तो दूर, सोचूंगा तक नहीं! बस एक बार माफ कर दो!

इस पर वो बोली- चुप हो जा… भैया जाग जाएंगे! और तू डर मत, मैं किसी से नहीं बोलूंगी लेकिन एक शर्त पर!
मैंने पूछा- कैसी शर्त?
तो अर्चना ने पूछा- तेरी कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं?
मैंने ना में सिर हिलाया तो अर्चना बोली- तभी ये सब कर रहा है!
तो मैं भी थोड़ा खुलते हुए बोला- दीदी, क्या करूँ, कोई होती तो ये नौबत न आती!

इस पर मेरी बहन मुस्कुराई और बोली- अच्छा बेटा, तो क्या नौबत आती? हाँ?
इस पर मैं हंसते हुए बोला- तब तो गर्लफ्रेंड के साथ ही सारी नौबत आती और सब उसके साथ ही होता।

फिर अर्चना ने पूछा- कभी कुछ किया है?
मैंने ना में सिर हिलाया तो उसने हंसते हुए कहा- मेरी तरह ही कुंवारा निकला तू तो… अच्छा तो अब मेरे साथ करेगा?
इस पर मैंने अनजान बनते हुए पूछा- क्या?
तो वो बोली- वही जो अपनी गर्लफ्रेंड के साथ करता!

मेरी तो खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा, मैंने जल्दी से हाँ में सिर हिलाया और उसे पकड़ कर चूमने चाटने लगा.
तो दीदी मुझे दूर करके बोली- इतनी हड़बड़ाहट किस बात की है? मैं भागी नहीं जा रही! और ऐसे ही करेगा सब ऊपर से? कपड़े तो निकाल ले।

लेकिन तभी हमें ख्याल आया कि हमारा बड़ा भाई हमारे साथ सोया हुआ है तो मैंने अर्चना को उसके कमरे में चलने को कहा. हम दोनों दूसरे कमरे में चले गए और मैंने तुरंत अपने कपड़े उतार दिए और अर्चना ने अपने!
फिर मैं अपनी बहन के नंगे बदन के ऊपर चढ़ गया और पागलों की तरह उन्हें किस करने लगा और उसकी एक चूची को बायें और दूसरी चूची को दायें हाथ में जकड़ कर जोर जोर से दबाने लगा जिससे अर्चना को दर्द हो रहा था।
वो बोली- आराम से कर… दर्द होता है! यहीं हूँ मैं!

कुछ देर ऐसे चूमने और दबाने के बाद मैं अपनी बहन की चूची को चूसने लगा और एक हाथ से दूसरी चूची दबा रहा था। कुछ देर बारी बारी से दोनों चूचियों को चूसने के बाद में उसके पैरों के बीच आ गया.

वैसे तो मुझे चुदाई का कोई अनुभव नहीं था, ना ही उसको… लेकिन मुझे सब पता है क्योंकि मैं लगभग हर दिन अन्तर्वासना की कहानियां पढ़ता हूँ और सेक्स की वीडियो देखता हूं।
फिर मैंने अपनी बहन की पैंटी पकड़ कर नीचे सरकाई और निकाल कर उसकी चूत को सूंघने लगा.
वाह… क्या खुशबू थी… मेरी बहन की चूत की खुशबू ने मुझे और पागल बना दिया, मैंने उसकी चूत को चाटना चूमना शुरू किया और उसके मुँह से ‘आह… उम्म… आह… की आवाज़ की सिसकारियां निकलने लगी.

धीरे धीरे मेरी बहन भी मेरी तरह काफी गर्म होने लगी और काफी तेज सिसकारियां लेने लगी और मेरे सिर को पकड़ के अपने चूत पे दबाने लगी. कुछ देर बाद उसकी चूत के सब्र का बांध टूट गया और उसकी चूत से उस बांध का पानी बहने लगा.
मैंने बहन की चूत चाट चाटकर साफ की.

उसके बाद मैंने उसको बोला मेरा लन्ड चूसने को!
लेकिन वो मना करने लगी. काफी देर मनाने के बाद भी जब वो नहीं मानी तो मैं उसे समझाने लगा, कुछ देर समझाने के बाद वो मान गयी और आधे मन से उसे मुँह में लेकर चूसने लगी.

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