मेरे हनीमून की यादें

शोभा के होंठ मेरे होंठ से जुड़े हुए थे। पहले तो वो एकदम सकपकायी पर फिर संभल गयी और ज़ोर से मेरे होंठ चूमने लगी। शायद उसे भी मजा आने लगा था और उसने अपने मूक सहमति दे दी।

जॉन ने शोभा की ड्रेस में नीचे से हाथ घुसाया और ऊपर की तरफ उठा दिया ड्रेस। अंदर से शोभा बिलकुल नंगी थी, पैंटी भी नहीं पहनी थी।

अब सिर्फ मैं कपड़ों में बचा था। जैसे ही मैं अपने कपड़े उतारने के लिए खड़ा हुआ, जॉन शोभा पलट कर उसके होंठ चूसने लगा। यह देख कर मेरा लिंग उत्तेजना से फटने लगा। शोभा की गांड मेरी तरफ थी और वो जॉन की बांहों में थी।
मैं उत्तेजना में शोभा की गांड पर जीभ फेरने लगा।

अब शोभा एक हाथ जॉन के गले में डाली हुए थी और एक हाथ से मुझे अपनी गांड के छेद की तरफ धकेल रही थी। मैंने दोनों हाथों से उसके नितम्ब फैलाये और उसके गांड के छेद में अपनी जीभ सरका दी।
क्या अद्भुत अनुभूति थी।

थोड़ी देर गांड चाटने के बाद में खड़ा हुआ तो जॉन भी आगे की तरफ आ गया। शोभा सोफे से नीचे की तरफ उतर कर घुटने के बल बैठ कर बारी बारी से हम दोनों के लंड को चूसने लगी। कभी बॉल्स चाटती कभी लंड।
ऐसा लग रहा था कि मैं किसी पोर्न फिल्म का किरदार हो गया हूँ। शोभा अपनी जीभ का बहुत अच्छा इस्तेमाल कर रही थी।

जब मुझसे रहा नहीं गया तब मैंने शोभा को उठा कर सोफे पर पटका और उसकी चूत चाटने लगा। जॉन ने अपना लंड शोभा के मुँह में डाल दिया। जॉन थोड़ी देर में शोभा के मुँह में ही झड़ गया और पराये मर्द के पानी को पूरा गटकने के बाद शोभा भी पानी छोड़ने लगी।

दोनों थोड़ा शांत हुए तो शोभा ने मेरे लंड को हाथ में लेकर हिलाया। तभी एकदम से जॉन नीचे झुक कर मेरा लंड चूसने लगा।
पहले तो मुझे बहुत अजीब सा लगा। पर मैं अपने चरम पर था, कुछ ही मिनट में मेरा पानी निकल गया और जॉन उसे पूरी तरह से चूस कर पी गया।

हम तीनों ने फिर से अपने पेग बनाये और चियर्स किया।
तब जॉन ने बताया कि वो बाईसेक्सुअल है। मतलब उसे चूत मारना भी पसंद है और गाँड मरवाना और लंड चूसना भी।

पेग खत्म होते होते जॉन फिर से शोभा के निप्पल्स दबाने लगा।
शोभा ने कहा- बैडरूम में चलते है।

हम तीनों बैडरूम में पहुंचे और शोभा पर कुत्तों के जैसे टूट पड़े। मैंने शोभा की चूत में लंड टिकाया तो शोभा ने कहा- पहले जॉन का लंड डलवाओ।
मैंने कहा- फिर मेरा क्या होगा?
जॉन बोला- मैं शोभा की चूत ठंडी करता हूँ, और आप मेरी गांड मार लो।

जॉन ने अपनी गांड चिकनी कर रखी थी। मैंने सोचा कि चलो ये भी अनुभव कर लेते हैं। और वैसे भी अपने को तो मस्ती करनी है।

जॉन ने शोभा की चूत में लंड पेला और मैंने जॉन की गांड में लंड घुसाया। अब मेरे धक्के से जॉन हिल रहा था और उसकी वजह से शोभा की चूत में जॉन का लंड अंदर बाहर हो रहा था। जॉन की गांड पकड़ कर मैं ज़ोर से पेलने लगा।

थोड़ी देर बाद शोभा बोली- मेरी गांड में भी खुजली हो रही है।
तो हमने अपनी जगह बदली। जॉन नीचे लेटा और शोभा उसकी तरफ मुँह करके उसके लंड पर बैठ गयी। शोभा की गांड मेरी तरफ थी तो मैंने अपने लंड उसकी गांड में डाल दिया। दोनों तरफ के हमले से शोभा दर्द और आनंद के मारे चीख पड़ी।

बाद में हम तीनों लगभग एक साथ झड़ गए। बहुत मजा आया।
शोभा से पूछा तो उसने भी कहा- ये हनीमून तो यादगार हो गया। इसे जीवन में कभी नहीं भूल सकती.
और मेरे गले लग गयी। जॉन भी आकर हमारे गले लग गया।

उसके बाद हमने एक राउंड और लगाया और सो गए।

सुबह जॉन को दिल्ली निकलना था, फिर मिलने का वादा करके वो निकल गया।

उसके जाने के बाद बीती रात की चुदाई को याद करके एक बार और चुदाई करी।

दिन में थोड़ा घूमने के बाद अगले दिन हम भी अपने घर को निकल पड़े एक अनूठा अनुभव को दिल में समेट कर!

दोस्तो, आप कमैंट्स और मेल करके अपने सुझाव भेजते रहिये। नयी कहानी और अनुभव के साथ जल्दी ही मिलेंगे।
आपका अपना
वीर सिंह रसिया

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