मेरी प्यारी दीदी मुझसे चुद गई

मैंने देखा तो वह पेंटी थी, वह भी पूरी गीली. मुझे विचार आया कि साला बूढा सच में निशा की चुत में लंड घुसा कर चोद रहा था.. तो उसने विरोध क्यों नहीं किया. इसका मतलब ये हुआ कि निशा उसके लंड को अपनी चुत में लेकर लंड की सवारी गाँठ रही थी. उसको इस बुड्डे के लंड से चुदने में मजा आ रहा था. मुझे हैरानी इस बात की भी थी कि उसने मेरी बहन की पैंटी कैसे उतार दी!

अब मैंने ये सोचा, तो मुझे भी कुछ होने लगा. इधर निशा के गोद में बैठने से अब मेरा लंड खड़ा होके झटके मार रहा था. उसके चूतड़ बहुत ही मुलायम थे, जो मेरी जांघों पे टच कर रहे थे.

मुझे लगा कि अब सब लोग सो गए हैं. मैंने धीरे से निशा की स्कर्ट उठानी शुरू की. पर उसके बैठने की वजह से गांड के नीचे दबी होने से पूरी नहीं उठ पाई. मैंने थोड़ा जोर लगा कर खींचा, तो निशा थोड़ा ऊपर हुई और स्कर्ट पूरी उठ गई.

मैंने निशा को फिर थोड़ा उठा के अपना लंड पेंट से बाहर निकाल लिया. उसके बैठते ही उसकी गर्म चुत का अहसास लंड पे हुआ. चूत पानी से पूरी भीगी गई थी.. पर उसके बैठने की वजह से लंड फिर से दब गया.

मैंने उसको थोड़ा झुकाया तो निशा उस आदमी की गोद में सर रखके सो गई.. जिससे उसकी गांड थोड़ी ऊपर उठ गई और चुत मेरे सामने आ गई. मैंने चुत पे हाथ लगाया तो वह खुली हुई थी और फड़क रही थी.

मैंने लंड के टोपे पे थूक लगाया और चुत के छेद पर रख दिया. एक हाथ से लंड पकड़े रखा और दूसरे से निशा की कमर को थोड़ा पीछे खींचा. चुत पे दबाव बनाया तो छेद फैलने लगा और टोपा अन्दर घुस गया. उधर शायद निशा ने भी अपनी चुत को लंड पर अडजस्ट सा किया था.

अब मैंने दोनों हाथों से कमर को पकड़ लिया और निशा को जोर से लंड पे खींचा तो चिकनाई की वजह से पूरा लंड चुत में उतर गया. उसको शायद चुत में दर्द हुआ तो वह पूरा लंड घुसते ही बैठके खड़ी सी हो गई.. और फिर लंड को चूत में लेकर सो गई.

मैंने आधा लंड बाहर निकाल कर फिर अन्दर पेल दिया. अब मुझको बहुत मज़ा आ रहा था तो मैं उसकी चुत को गपागप चोदने लगा.

कुछ देर बाद मैंने झटके तेज कर दिए तो कोहनी लगने से बाजू में बैठा हुआ एक आदमी जग गया. पर मेरा अभी पानी निकलने वाला था तो मैंने चोदना चालू रखा.

थोड़ी देर बाद निशा की चुत ने पानी छोड़ दिया, जिसने मेरे लंड को भिगो दिया. बाजू वाला आदमी मेरी और देखके मुस्कुराया और अपना लंड मसलते हुए निशा की गांड पे हाथ फेरने लगा.

दस-पंद्रह धक्के मारके मैंने भी अपना पानी चुत में छोड़ दिया. मैंने उसका स्कर्ट सही किया और अपना लंड पैन्ट में अन्दर कर लिया और अपनी बहन निशा को फिर सही से गोद में बिठा लिया.

थोड़ी देर बाद अहमदाबाद आ गया और हम उतर गए.

निशा ने एक अंगड़ाई ली और बोली- बड़े शरारती हो, ठीक से सोने भी नहीं देते.
“अब घर चल कर ठीक से सुला दूँगा.”
निशा ने मेरे लंड को पकड़ कर हिलाया और कहा- अब तो ठीक से लूँगी इसको अपने अन्दर.. दोगे न?

मैंने सुनसान देख कर उसको अपनी बांहों में भर लिया और पूछा- उस आदमी से मजा नहीं आया था क्या?
“अरे उसने तो पेला ही था कि तुमने अपने लंड पर बिठा लिया था.”
मैं हंस पड़ा.

उसके बाद मैंने उसको कई बार चोदा है. दोस्तो, आपको मेरी कहानी कैसी लगी जरूर बताना.. मैं आपके मेल का इंतजार करूँगा.

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