मीठा मीठा मौसम

मैं सोनू के बूब्स को मसलने और चूसने लगा। धीरे धीरे मैं नीचे उसके पेट पर आ गया, उसकी नाभि को जीभ से गुदगुदाने लगा। वो मस्ती से सिहर रही थी। मैंने उसकी जीन्स का बटन खोल दिया, जीन्स के साथ मैंने उसकी पेंटी भी घुटनों तक नीचे कर दिया।

दिन में उजाले में पिंकी को ऐसे निहारना मेरे लिए एक फैंटेसी पूरी होने जैसा था। उसकी पिंकी पे हल्के हल्के बाल थे। मैंने पिंकी को प्यार से छुआ; सोनू सिहरने लगी थी। मैंने पिंकी को हल्के से चूम लिया। मैं पिंकी को ताबड़तोड़ किस कर रहा था। सोनू मेरे बालों को कस के पकड़े हुए थी।

मैं खड़ा हो गया और सोनू के होंठों को चूमने लगा। पप्पू महाराज दोबारा मेहनत के लिए तैयार हो चुके थे। मैंने सोनू को उसकी एड़ियों पर थोड़ा उठाया, पप्पू को पिंकी से हेलो करवाया।
सोनू ने अपने हाथों से पप्पू को पिंकी के दरवाजे के सामने खड़ा कर दिया; उसके चेहरे पर कसक देखते ही बन रही थी।

मैंने सोनू से धीरे धीरे नीचे होने को कहा। पप्पू धीरे धीरे पिंकी के दरवाजे में घुसने लगा; फिर एक साथ पप्पू पूरा पिंकी के अंदर चला गया। हम उस दिन कंडोम नहीं लेकर आये थे। मैंने सोनू से पूछा- अगर तुम्हें सेफ नहीं लग रहा तो रहने देते हैं।
सोनू ने मुंह से कुछ नहीं बोला लेकिन पप्पू पर पिंकी का दबाव और कसाव दोनों बढ़ा दिए।

फिर हौले हौले मैंने धक्के लगाने शुरू किए। मैं साथ ही उसके होंठों पर और गर्दन पर चूम रहा था। सोनू तड़प रही थी।
मैंने सोनू के बूब्स को मसलना शुरू किया; अपने पेट से उस के पेट को रगड़ रहा था।

कुछ देर बाद मैंने सोनू को दीवार के सहारे डॉगी स्टाइल में झुका दिया और पीछे से पप्पू को पिंकी के घर में घुसा दिया। मैं पप्पू के फारिग होने तक उसे इसी पोज़ में ऐसे ही धक्के देता रहा। फारिग होने के बाद पप्पू बाहर आ गया।

कुछ देर हम दोनों यूँ ही एक दूसरे को हग किये खड़े रहे। फिर मैंने सोनू की पेंटी और जीन्स ऊपर की। उसके बटन बंद किये। तब तक वो अपनी ब्रा बन्द कर चुकी थी। मैंने सोनू का टॉप ठीक किया। फिर मैंने अपनी पेंट ऊपर की और सोनू ने मेरी शर्ट के बटन लगाए। हम एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे, मुझे नहीं पता सोनू कितनी बार फारिग हो चुकी थी लेकिन उसकी सांसें जोर जोर से चल रही थी और उसकी आंखों में नशा और सुकून दिखाई दे रहा था।

फिर हम कुछ देर उसी दीवार पर बैठे।
हम एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे। उसी पल एक झोंक हवा का आया और हम एक दूसरे में खो कर किस करने लगे। कुछ मिनट के बाद अलग हुए तो सोनू बोली- अब थोड़ी और देर लगाई तो फिर हो सकता है सारी रात यहीं रुकना पड़े, लेकिन प्यास फिर भी नहीं बुझेगी.

मैंने कहा- यह प्यास बुझानी भी किसे है लेकिन हम हौले हौले इस का मजा लूटेंगे।

अब तक हल्की हल्की फुहारें शुरू हो चुकी थी तो हमने वहां से चलना सही समझा। जिस रास्ते से गए थे, उसी रास्ते से वापस आये और बाइक पर बैठ गए।
सड़क पर आकर सोनू बोली- बाइक मैं चलाऊंगी।

मैं पीछे से सोनू को चिपक कर बैठ गया; कसम से बड़ा मजा आया।

शाम होने को थी, सोनू को मैंने जहाँ से पिक किया था वहीं उतार दिया। फिर मैं भी घर आकर सो गया।

दोस्तो, यह था एक किस्सा मेरी जिंदगी की कहानी का!

मेरी पिछली कहानियों
मेरी स्टूडेंट ने मुझे दुनिया दिखाई
सर्दी की रात का गरम अहसास
पर मुझे काफी मेल आये और मुझे काफी अच्छा लगा कि सभी ने सराहा। सबसे ज्यादा खुशी है कि किसी भी पाठक ने मुझ से सोनू से जुड़ी कोई जानकारी या फोन नंबर नहीं मांगा। मैं इसके लिये सभी का शुक्रिया अदा करता हूँ।

थोड़ा सा दुख इस बात का भी है कि किसी भी लड़की या महिला का मेल नहीं आया। मुझे ऐसा लगता है कि लड़कों की इमेज ऐसी बना दी गई है कि जैसे उन्हें सिर्फ सेक्स चाहिए होता है और वो लड़कियों को बदनाम कर के खुश होते हैं।

सभी महिला पाठिकाओं से मेरा अनुरोध है कि ऐसा नहीं है। हजार में से कोई एक दो लड़के ऐसे होते होंगे वरना सभी लड़के लड़कियों को सम्मान की नजर से देखते हैं।
बाकी सब नौजवां उम्र की चुहलबाजियाँ होती है बस … दिल से सब साफ होते हैं।

एक बात जो मैं हमेशा कहता हूँ, दोहराना चाहता हूँ..
“नाम रिश्ते का चाहे कुछ भी हो,
तलाश सिर्फ सुकून की होती है…”

Pages: 1 2 3