मम्मी और दादाजी की चुदाई

शाम को गौरव आया. वह अपने दादाजी को कॉलोनी के पार्क में घुमाकर लाया.

रात को सभी ने खाना खाया और अपने अपने कमरे में चले गए. रात के लगभग 11:00 बजे रहे थे, पर प्रीति को आज नींद नहीं आ रही थी. उसे अपने पति राजेश की याद आ रही थी. उसे महसूस हो रहा था कि जिस तरह वह अपने पति को याद कर रही है, उसी तरह मीठानंद भी अपनी पत्नी को बहुत याद करते होंगे.

प्रीति ने अपने कपड़े उतारे और हरे रंग का गाउन पहन लिया. गाउन के नीचे सिर्फ काले रंग की ब्रा और काली ही पैंटी पहन रखी थी. उसे नींद नहीं आ रही थी, इसलिये वह हॉल में आ गई.

उसने देखा कि दादाजी के कमरे की लाइट जल रही है. प्रीति ने सोचा कि क्यों न दादाजी से कुछ बातें करूं ताकि उसका मन हल्का हो जाए और जल्दी से नींद आ जाये. यह सोचकर वह मीठानंद के कमरे की तरफ चली गई. प्रीति ने दरवाजा खटखटाया.
मीठानंद ने दरवाजा खोला तो प्रीति को देखकर चौंक गए. मीठानंद केवल अपने कच्छे में ही थे. उनका भरा पूरा बदन देखकर प्रीति दंग रह गई. उनकी चौड़ी छाती और बालों से भरा सीना उसे अच्छा लगा. साथ ही उनके चेहरे पर रौबदार मूंछें खूब जम रही थीं.

मीठानंद भी प्रीति को देखते ही रह गए. प्रीति का सुंदर सा चेहरा, उसके बिखरे बाल और गदराया सा बदन. मीठानंद ने आज पहली बार अपनी बहू को इतने करीब से देखा तो देखते ही रह गए. अजीब सा नशा दोनों की आंखों में छा गया.

प्रीति कहां तो उनसे बातें करने आई थी और उनके मजबूत शरीर को देखकर उनकी दीवानी हो गई. उसकी आँखों में वासना का खुमार भरने लगा जोकि मीठानंद को साफ़ नजर आने लगा. मीठानंद भी आज अपने बहू की खूबसूरती के आगे अपने आपको काबू में नहीं रख पा रहे थे. प्रीति कुछ बोल ही नहीं पाई तो मीठानंद की जबान भी जैसे चिपक गई हो.

तभी मीठानंद ने न जाने क्यों अपनी बांहें पसार दीं.. उधर प्रीति को भी कुछ समझ में नहीं आया और वह मीठानंद की बांहों में जाकर उनसे चिपक गई. मीठानंद ने भी प्रीति को अपनी बांहों में भर लिया. उनका एक हाथ प्रीति के बालों में तो दूसरा हाथ उसकी पीठ पर घूम रहा था. पांच मिनट तक दोनों एक दूसरे के साथ ही चिपके रहे. उनके जिस्म की गर्मी एक दूसरे के बदन में फैल रही थी.

प्रीति ने अपना सिर हिलाया. मीठानंद ने प्रीति के बालों को पकड़ा और प्रीति के नर्म और गर्म रसीले होंठों को अपने होंठों के बीच दबा लिया. प्रीति भी मीठानंद के होंठों को चूसने लगी. दोनों एक दूसरे को इस तरह चूस रहे थे, जैसे बरसों से प्यासे हों. प्रीति ने अपनी जीभ मीठानंद के मुँह में डाल दी, जिसे मीठानंद मजे लेकर चूसने लगे. मीठानंद ने अपनी जीभ प्रीति के मुँह में डाल दी. दोनों ने एक दूसरे को बहुत देर तक चूसा और दोनों ने एक दूसरे के होंठों को जी भरकर चूसा. तभी प्रीति ने अपना गाउन की डोरी को ढीला किया और उसे अपनी बांहों से ढीला करते हुए नीचे गिरा दिया.

अब प्रीति केवल ब्रा और पैंटी में ही अपने ससुर के सामने खड़ी थी. प्रीति ने दादाजी को बिस्तर पर लेटाया और उनके ऊपर सवार हो गई. प्रीति ने मीठानंद के माथे पर, गालों पर और फिर होंठों पर चुम्बन जड़ दिये. वह उनके गालों और गर्दन पर अपने भीगे होंठ फिराने लगी. प्रीति ने अपने सिर को नीचे किया और मीठानंद के छाती के एक दाने को अपने मुँह में भर लिया. मीठानंद सिसक उठे. प्रीति ने अपने होंठ मीठानंद के बालों से भरी छाती पर फिराई और नाभि को चूमने लगी.

प्रीति ने अपने एक हाथ से मीठानंद के कच्छे का नाड़ा खोला और पूरा नंगा कर दिया. उनका मोटा और लंबा लौड़ा प्रीति के हाथ में आ गया. प्रीति उसे सहलाने लगी. सहलाते सहलाते ही प्रीति ने उसे अपने मुँह में भर लिया. मीठानंद बिन पानी की मछली के समान तड़पने लगे. उनके होंठों से सिसकारियां निकलने लगीं.

फिर तो 5 मिनट तक प्रीति उनके लौड़े को अपने रसीले होंठों से चोदती रही. मीठानंद ने प्रीति के मुँह में ही सारा माल उड़ेल दिया. प्रीति ने सारा रस पी लिया और मीठानंद के अंडुए और झांटों पर जीभ फिराने लगी. प्रीति ने अपना काम कर दिया था. वह मीठानंद के बगल में लेट गई.

“प्रीति बेटी, तुमने तो सचमुच मुझे वो आनन्द दिया है, जो मेरी पत्नी भी नहीं दे सकी. उसने तो कभी सेक्स में पहल ही नहीं की थी और तुमने तो मेरे निप्पल को चूसा ही, साथ ही मेरे लौड़े को मुँह में लेकर सारा वीर्य भी चाट गई. तुम जैसी काम की देवी को अपने आगोश में पाकर मेरा जीवन धन्य हो गया है.”
इस तरह मीठानंद ने अपनी बात कही.

प्रीति ने जवाब दिया- आपका खुशी देखकर मैं भी खुश हूँ बाउजी. पर पूरी खुशी तब होगी जब आप मुझे चोदकर पूरा मजा दोगे.
मीठानंद- तुम मुझे बाउजी मत बुलाओ प्रीति.. तुम मुझे सिर्फ मीठानंद ही कहो. तुमसे शारीरिक संबंध बनाकर मैं बाउजी कहने लायक नहीं रह गया हूँ.

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