मेरी पहली चुदाई चाचा की लड़की के साथ

कुछ पल रुक कर मैं अपने थूक से उसकी गांड के छेद को रसीला करता रहा. फिर लंड को धीरे धीरे गांड में अन्दर बाहर करने लगा. मैंने धीरे धीरे पूरा लंड उसकी गांड में अन्दर तक डाल दिया.

कविता की आँखों से आंसू आने लगे, पर शायद वो भी ये ही चाहती थी. मैं भी नहीं रुका, इतना मजा मुझको जिंदगी में कभी नहीं आया था. अब लंड तेजी से अन्दर बाहर होने लगा. मेरे हर झटके के साथ कविता के चूतड़ भी हिल रहे थे और कविता की कामुक सिसकारियां निकल रही थीं ‘हां रवि … अहा … रवि पूरा डालो अह … आआह … आई लव यू रवि …’

उसकी मस्ती को देख कर मेरा लंड और ज्यादा कड़क होकर अन्दर बाहर हो रहा था. कविता भी अब मजे में अपनी गांड मरा रही थी. उसकी चूत पानी पानी हो रही थी. मैंने लंड कविता की गांड से निकाल कर पीछे से ही उसकी चुत पर लगाया और अन्दर डाल दिया. मुझे मालूम था कि चूत में लंड जाते ही ये फिर से चिल्लाएगी, इसलिए मैंने पहले ही अपने हाथ से उसकी आवाज रोक ली, जो बहुत तेज निकली थी.
वो मुझको गालियां देने लगी- साले बहनचोद … फाड़ दी अपनी बहन की चूत बहनचोद कहीं के … कुत्ते … एक दिन में ही दोनों तरफ से फाड़ दिया.

मैं कुछ देर रुका रहा और उसकी चीखों को अनसुना करके अपने लंड पर चूत की गर्मी का मजा लेता रहा. कुछ देर रुकने के बाद मैं धीरे धीरे लंड को अपनी बहन कविता की चूत में अन्दर बाहर करने लगा.
अब उसको भी मजा आने लगा और वो बोलने लगी- अअअह … उहम्म … उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह … उम्मम्म रवि डालो … और तेज और तेज करो … अह मजा आ रहा है.

मैंने भी मन भर कर झटके मारे और बीस मिनट बाद वो झड़ने लगी. उसने मेरे लंड पर ही अपना सारा माल निकाल दिया. उसकी चूत पिघली, तो मेरा भी होने वाला था. मेरी भी रफ्तार बढ़ने लगी और उसे जोरों से चोदने लगा. उसकी हिलती मोटी गांड मेरा और मन खराब कर रही थी.

मेरा होने वाला था, मुझे भी पहली चुदाई के कारण ज्यादा कुछ नहीं पता था कि पानी कहां निकलना है. मैंने बिना सोचे समझे तेज धक्के मारते हुए लंड का सारा माल उसकी चुत में ही निकाल दिया.
कुछ पल बाद मैं कविता से अलग हुआ और कपड़े पहने. कविता ने भी पहन लिए बिना एक दूसरे से बोले हम लोग तैयार हो गए.

फिर मैं वहां से जाने लगा. तो मैंने उससे पूछा- पहले चूत और गांड किससे मरवाई थी?
कविता ने घबरा कर मेरी तरफ देखा और बोली- आपके बड़े भाई से.

मैं उसकी गांड और चूत मारते समय ही समझ गया था कि ये साली खेली खाई है. शुरू में ही जब उसने ‘तू भी …’ कहा था, शक तो मुझे तभी हो गया था कि इसकी किसी ने पहले ही ले ली है.
मैंने उससे पूरी कहानी जाननी चाही तो उसने मुझे बाद में बताने की कही. वो कहानी सारी उसने मुझको दूसरे दिन बताई, जो मैं आपको अगली बार बताऊंगा.

दोस्तो मेरी सच्ची कहानी कैसी लगी. मुझे जरूर बताना.

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