पैसों के लिए चुदी

अब मुझे इंतजार था, अगले दिन का। एक कुंवारी चुत फाडने का मौका जो मुझे मिल रहा था। मैने अगले दिन दसवीं तक के बच्चों को दस मिनट पहले ही छोड दिया, और अब सुरेखा के आने का इंतजार करने लगा था। ठीक पांच बजे सुरेखा मेरे घर आ गई। सुरेखा के घर मे आते ही मै दरवाजे के पास गया और घर का दरवाजा इस तरह से बंद किया कि, अगर कोई दरवाजा खोलना चाहे, तो आराम से खुले, लेकिन आवाज भी आए दरवाजा खोलने की। अगर कोई आए, तो हमे आवाज से पता चले कि कोई आ रहा है।
दरवाजा बंद करने के बाद मैने सुरेखा को वहीं आंगन में खडे खडे अपनी बाहों में ले लिया। सुरेखा ने भी अपनी बाहें फैलाकर मेरा स्वागत किया। फिर मै उसे उठाकर अंदर कमरे में ले गया। अपने बेडरूम में जाने के बाद, मैने उसे नीचे उतारा। फिर मै बिस्तर पर बैठ गया, और सुरेखा का हाथ पकडकर उसे भी अपने पास खींच लिया। एक ही झटके में सुरेखा मेरे ऊपर आ गिरी, तो मैंने उसे उसके हाथों से पकडते हुए उसके माथे पर चूमना चाहा। लेकिन तभी वो मुझसे अलग होते हुए बोली, “सर, मै कुछ बताना चाहती हूं।”
तो मैने उसे अपने बगल में बिठाया, और वो बोलने लगी, “अभी मुझे पैसों की जरूरत है, इसलिए मै यह आपके साथ करने को तैयार हुई। आप ही पहले आदमी हो जो मुझे छू रहा है। आप मेरी ओर आकर्षित थे, तो मुझे यही सही लगा। बाकी आप बताइए, आपको क्या लगता है?”
कुंवारी चुत बहुत मुश्किल से मिलती है, और यहाँ इतनी आसानी से मिल रही थी, तो मै कैसे मना कर सकता था। थोडी देर सोचने के बाद फिर मैने कहा, “ठीक है, तुम्हे कितने पैसे चाहिए, मुझे बताओ मै तुम्हारी सहायता करूंगा।”
उसके कहे अनुसार मैने पहले ही दो हजार निकालकर उसके हाथ मे थमा दिए। तो वो भी खुश हो गई, और पैसे अपनी जेब मे रखने के बाद मेरे गले लग गई। मैने भी उसे अपनी बाहों में जकड लिया, जिससे उसकी चुचियां मेरी छाती में गडने लगी थी। अब मैने उसके मुंह को हल्का ऊपर की ओर उठाते हुए उसके होठों पर अपने होंठ रखकर उन्हें चूसने में लग गया। उसके होठों में कुछ जादू सा था, एक तो मक्खन से मुलायम होंठ ऊपर से इतने रसीले थे कि, एक बार चूमने के बाद छोडने का मन ही नही करेगा।

मै उसे बाहों में लेकर उसके होंठ चुम रहा था, वो भी मेरा साथ दे रही थी। फिर मैने धीरे से अपने हाथों को उसके बदन पर घुमाना चालू कर दिया। सुरेखा ने भी इस बात का विरोध नही किया, तो अगले ही पल मैने अपना एक हाथ उसके चूचियों पर रख दिया। और दूसरा हाथ उसके गले के पास रखकर उसे बिस्तर पर लिटाने लगा। थोडी ही देर में वो बिस्तर पर लेट चुकी थी और मै उसके बगल में बैठा हुआ था।
अब मै उसके बगल में बैठे बैठे ही उसके उरोजों को मसल रहा था। वो भी पूरी मस्ती के साथ मजे ले रही थी। मै बीच बीच मे अपने हाथों से उसके निप्पल को भी मसल देता था। अब तक हम दोनों ही अपने पूरे कपडे पहने हुए ही थे। मैने कपडों के ऊपर से ही उसकी एक चूची को अपने मुंह मे लेने की कोशिश की, लेकिन उसमें मै नाकामयाब रहा।
आगे की कहानी अगले भाग में लिखूंगा। आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी, कमेंट में बताइए। धन्यवाद।

Pages: 1 2