सहेली की शादी में मेरी चुत चुद गई-1

चूंकि सामने वाली सीट पर वो औरत सो रही थी, तो अब मुझे ही बैठना था. फिर रात के 10 बज गए, तो मैंने अपने बैग से खाना निकाला और खाने लगी. मेरे खाने के बाद उस आदमी ने भी खाया.

फिर उसने बोला कि मैं नीचे चादर बिछा कर सो जाता हूँ, आप आराम से ऊपर अपनी सीट पर लेट जाओ.

मैं मान गयी.

उसने अपने बैग से चादर निकाल कर दोनों सीट के बीच वाली जगह में बिछाया और सो गया. मैं भी लेट गयी. कुछ देर बाद मुझे दारू पीने का मन हुआ, तो मैंने अपना पर्स खोला उसमें से एक छोटी बोटल वाइन की निकाल ली. फिर पानी और एक गिलास लेकर चुपके से बाथरूम में जाकर दारू पीने लगी.

अभी मैंने दो पैग ही पिए थे कि तभी दरवाजे पर दस्तक हुई. मैंने दरवाजे की झिरी से झांक कर देखा, तो बाहर टीटीई था.

उसने आवाज देकर बोला- आप अपना टिकट दिखाएं.
मैंने बोला- सर टिकट बैग में है, अभी दिखाती हूँ.

तभी शायद उसको दारू की महक आ गयी और उसने सख्ती से दरवाज़ा खोलने का कहा.

मैंने दरवाजा खोला, तो उसने देखा कि बेसिन पर दारू की बोटल रखी थी.
उसने बोला- आपको मालूम नहीं है कि यहां दारू पीना मना है.
मैं कुछ नहीं बोली.

उसने फिर बोला- आप मेरे साथ चलो, अगले स्टेशन पर मैं आपको जीआरपी के हवाले करूंगा.
उसकी इस सख्त बात को सुनकर मैं एकदम से डर गयी और उसको समझाने लगी, लेकिन उसने मेरी एक नहीं सुनी.

अब मुझे जल्दी ही कुछ करना था क्योंकि अगला स्टेशन आने वाला था. मैंने उससे बोला- सर आप जो भी बोलोगे मैं करने को तैयार हूँ, लेकिन प्लीज़ मुझे छोड़ दीजिए.
टीटी ने मेरे मम्मों को ललचाई नजरों से देखा और कहा- सोच लो, कुछ भी करोगी आप?
मैं समझ गई कि मादरचोद चुदाई से ज्यादा क्या करेगा. तो मैंने भी स्माइल देते हुए कह दिया- जी हाँ … आप जो भी चाहोगे, मैं करूंगी.
टीटीई- ठीक है, फिर आप मेरे साथ मेरे कोच में चलो. और जो बोलूँगा, वो आपको करना होगा. मैं इसी शर्त पर जाने दूँगा.
मैं- ठीक है.

अब मैं समझ गयी कि मुझे इससे चुदना होगा, जिसके लिए मुझे कोई दिक्कत नहीं थी. लेकिन साला मुझे अपने साथ ले जा रहा था, जो कि चिंता का विषय था. क्योंकि अगर इसको चोदना था, तो ये मुझे यहीं बाथरूम में चोद सकता था.

फिर मैंने सोचना बंद कर दिया और उसके साथ चल पड़ी.

उसने पहले बाथरूम में जाकर मेरी बोतल में थोड़ी बची दारू देखी और बोटल उठा ली. बाकी चीजों को उसने फेंक दिया और बोतल को अपनी पॉकेट में रख कर आगे चल दिया. मैं भी उसके पीछे पीछे चल दी.

वो कुछ डिब्बे पार करते हुए अपने कोच में आया, जहां पहले से एक आदमी मौजूद था.
दूसरे आदमी ने उससे पूछा- क्या हुआ?
तो उस टीटीई ने अपनी जेब से दारू की बोटल निकाल कर उसे दिखाई और बोला- ये मैडम कुछ भी करने को तैयार हैं.

ये सुनकर दूसरा वाला आदमी खड़ा हुआ और मेरे पास आया. उसने बेझिझक मेरी चुचियां दबानी शुरू कर दीं और मजा लेने लगा. मैं चुपचाप खड़ी रही. उसे हरकत करता देख कर टीटीई पीछे से मेरे लोवर के ऊपर से ही मेरी गांड दबाने लगा.

तभी पहले वाले ने मेरी टी-शर्ट को उतार कर साइड में रख दिया. मेरी तनी हुई चुचियां बस ब्रा से बाहर आने को बेताब थीं. हुआ भी यही … अगले ही पल उसने मेरी ब्रा को भी निकाल दिया और मेरी दोनों चुचियों को कसके दबाने और मसलने लगा. उसके बाद वो एक दूध को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.

उसी समय पीछे से टीटीई ने मेरा लोवर मय पैंटी के उतार दिया.
अब उन दोनों के सामने मैं अब पूरी नंगी खड़ी थी.

दूसरे वाले ने अपने सारे कपड़े उतारे और वो सीट पर सीधा होकर पीठ के बल लेट गया. उसने मुझे अपने पास बुलाया और अपना काला मोटा 7 इंच का लंड मुझसे मुँह में लेने को कहने लगा. मैं भी कुतिया बन कर उसका लंड चूसने लगी.

तभी पहले टीटी ने मेरी गांड के छेद पर थोड़ा सा थूक लगाया और अपना 7 इंच का लंड मेरी गांड में पेल दिया. मैं समझ ही न सकी कि मादरचोद ने बिना थूक लगाए मेरी गांड में लंड पेल दिया. मुझे थोड़ा सा दर्द हुआ, मगर मैं एक चुदक्कड़ पंजाबन हूँ इसलिए उसका लौड़ा लील गई और मज़े लेकर उससे अपनी गांड मरवाने लगी.

कुछ देर यूं ही चुदने के बाद जो पट्ठा मुझे अपना लंड चुसा रहा था, उसने मुझे अपने लंड पर बैठा लिया और मेरी चूत में अपना लंड डाल कर मुझे चोदने लगा. इससे पहले कुछ देर तक पीछे वाले टीटी ने भी मुझे पीछे से चोदा था … जो अब मेरी गांड से लंड निकाल कर मुझे लंड चुसवाने लगा.

इसके बाद वो फिर से मेरे पीछे आया और मेरी गांड में फिर से लंड पेल दिया. अब मेरे दोनों छेद में दो लंड घुस गए थे और मैं भी खूब उचक उचक कर चुदवा रही थी.

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