ठंडी रात में बस में मिली चूत की गर्मी

अब उसका मुँह मेरे पेट के पास था और इस वजह से उसके स्तन मेरे दोनों घुटनों पर दब गए. मेरे शरीर में एक करंट सा दौड़ने लगा. उसे ये महसूस हुआ और वो फिर से नीचे खिसक गई. उसके स्पर्श से मैं गरम हो गया. अब मैं सोचने लगा कि इसका फायदा कैसे उठाया जाए. एक तरफ उसके मर्द पीकर सो रहे थे और हम दोनों की नींद उड़ गई थी.

मेरे दिमाग में एक आईडिया आया. मैंने उससे कहा कि तुम्हारे पास कोई चादर होगी, वो ओढ़ लो. बच्चे को ठंड लग जायेगी, बेचारा बीमार हो जाएगा.
उसने कहा कि उसके पास चादर नहीं है.
फिर मैं चुप रहा. दो मिनट के बाद फिर उसे भी और बच्चे को भी ठंड लगने लगी.

इस बार वो चुपके से मेरे करीब खिसक गयी. अब वो मेरे पैरों के बीच में चिपक गयी थी. मैंने धीरे से उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे जगाया और उसके कान के पास जाकर कहा कि बच्चे को ठंड लग रही है, तो उसे मेरे शॉल से लपेट दो, मेरी शॉल बड़ी है, कोई दिक्कत नहीं होगी. उसका बच्चा ठंड से उससे चिपक कर सो रहा था. वो दूध पीने के लिए उसकी छाती को खोलने की कोशिश कर रहा था.
उसने कहा- ठीक है.

मैंने उसके पूरे बदन पर शॉल डाल दी. इससे मैं और वो दोनों शॉल से ढक गए थे. अब उसने अपनी छाती खोल के बच्चे को दूध पिलाना शुरू किया, बच्चे के दूध चूसने की आवाज मेरे कानों में आ रही थी. मैं बहुत गर्म हो गया और मेरा लौड़ा पेंट में तंबू बना रहा था. मैंने धीरे धीरे अपनी पैंट को घुटनों तक उठाया. अब तक उसका बच्चा भी सो गया था. बस के धक्के से उसके खुले स्तन मेरी पिण्डलियों से टकरा रहे थे. वो भी सो रही थी. उसका और मेरा सिर्फ मुँह शॉल से बाहर था. बाकी पूरा क्लोज था. उसके नरम थन मेरे पैर से लग रहे थे, उसमें से दूध भी आ रहा था, जो मुझे गीला लग रहा था.

मैंने अब आगे बढ़ने का काम किया. मैंने अपनी पैंट की जिप खोली और लौड़े को बाहर निकाल लिया. फिर मैंने अपना सिर आगे की सीट पर टिकाया और सोने का नाटक करने लगा.

फिर धीरे से मैंने उसके एक स्तन पर हाथ रखा. उसका 36 का स्तन गर्म और मुलायम लगा. मैंने धीरे से दूध दबाया. वो सो रही थी या सोने का नाटक कर रही थी, पता नहीं. एक बार और आराम से उसके स्तनों पर हाथ फेरते हुए पूरा दूध पकड़ कर आराम से दबाया.

इस बार वो जग गई, उसने मुझे देखा मैं तुरंत सोने का नाटक करने लगा और हल्की आंखों से देखने लगा कि वो क्या करती है. उसने उसके मर्दों की तरफ देखा, सब सो रहे थे.

अब उसने अचानक अपने हाथ कंधे पर लिए और अपना सर शॉल के अन्दर ढक लिया. उसके दोनों हाथ मेरे हाथों पर आ गए थे. उसने मेरे हाथ अपने स्तनों से हटा दिए. मैं पागल हो रहा था, मेरा लौड़ा कड़क हो गया था. मैंने उसके दोनों हाथ जो मेरे घुटनों पर थे, उसको पकड़ कर अपनी जांघों के बीच लौड़े को ना छुए, ऐसे रख दिये.

उसने कुछ नहीं बोला.

मैंने महसूस किया कि मेरे हाथ निकलने पर भी उसने अपना ब्लाउज बंद नहीं किया था. मैं कुछ देर शांत रहा, लेकिन मेरा लौड़ा उछाल मार रहा था. शायद उसे ये महसूस हुआ, उसकी उंगली धीरे से मेरे लौड़े को टच कर गयी. मेरी तो जान जा रही थी. मैंने धीरे से अपने दोनों घुटने पास लाने शुरू कर दिये, उससे उनके स्तन मेरे घुटनों में दब गए. अब उसने 2 से 3 उंगलियां मेरे लौड़े के पास लाकर उसे छू लिया. मैं दोनों घुटने अन्दर कभी बाहर कर रहा था, शायद उसने मेरा लौड़ा देख लिया क्योंकि अब उसका सर मेरे पेट के सामने उठा हुआ था. मैंने अपना लौड़ा तो पहले ही खोल कर रखा था, मुझे अपने लौड़े के ऊपर उसका हाथ महसूस हुआ. उसने मेरे हथियार को पकड़ लिया और धीरे धीरे ऊपर नीचे करने लगी. अब मैंने भी उसके चेहरे से अपना हाथ फेरते हुये धीरे से उसके गालों से होते हुये उसके होंठों पर अंगूठा टिका दिया. उसके होंठ खुल गए. मेरा अंगूठा उसके मुँह में घुस गया. वो उसे चूसने लगी.

मैं अब अपना दूसरा हाथ उसके स्तनों पर फेरने लगा. वो गरम हो गयी थी और लौड़ा जोर से ऊपर नीचे कर रही थी. अब मैंने अपना अंगूठा उसके मुँह से बाहर निकाल लिया, उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपने दूसरे स्तन पर रख लिया.

अब मैं कहां रुकने वाला था, मैंने अपना सर फिर से सामने वाली सीट पर लगाया. तो मेरा लौड़ा उसके मुँह के सामने आ गया था. वह समझ गयी और उसने लौड़ा मुँह में भर लिया और धीरे से चूसने लगी.

मैं तो जैसे स्वर्ग में था, क्योंकि मेरी बीवी ने आज तक कभी मेरा लंड मुँह में नहीं लिया था. मैंने भी उससे कभी जबरदस्ती नहीं किया था. ये मेरा पहला अनुभव था. मैं उसके मम्मे दबा रहा था, पूरा दूध निकलकर मेरे हाथ गीले हो गए थे और उसके स्तनों पर चिकनाई आ गई थी. वह लंड चूस रही थी, मैं दूध दबा रहा था.

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