ठंडी रात में बस में मिली चूत की गर्मी

मैंने उत्तेजना में अपना मुँह बंद कर लिया था. वह अब जोर से लंड चूस रही थी, मेरा हाथ भी उसके स्तन जोर से दबा रहा था. अचानक वह उठी, उसने अपने मर्दों को देखा. वो खड़ी हो गयी. अब मेरा शॉल उसके स्तनों पर नहीं था. उस चांदनी की रोशनी में भी मुझे उसकी भरपूर गोलाईयां दिख गईं.

मुझे समझ नहीं आया कि ये अचानक खड़ी क्यों हो गई, जबकि नीचे उसका बच्चा सो रहा था. उसने अब झट से मेरी तरफ पीठ की.. और अपनी साड़ी ऊपर उठाई. शॉल को फिर से ओढ़ लिया और मेरे लौड़े को पकड़कर अपनी चूत पर सैट किया, आराम से अन्दर डाला और आगे की सीट पे झुकाव किया.

मैं समझ गया और मैंने भी पीछे से उसकी चूत में झटके देना शुरू किया. मुझे डर भी लग रहा था और रहा भी नहीं जा रहा था. पांच मिनट के बाद मेरा माल बाहर आ गया. वह भी सिकुड़ गई, मेरा वीर्य उसकी जांघों के सहारे चुत से बाहर आ गया. वह उठी और अपनी साड़ी से चूत को पौंछते हुए उसे नीचे की और फिर नीचे बैठ गयी.

अब मैंने नीचे झुककर उसे एक किस किया और थैंक्यू बोला. तभी उसने अपना हाथ अपने स्तनों पर रखकर मेरे चेहरे पर अपना दूध उड़ाया और हंस दी.

मैंने उंगली से चेहरे के ऊपर का दूध पी लिया. उसने अपना ब्लाउज बंद कर दिया. वो मेरे सोये हुए लौड़े को सहला रही थी. उतने में उसका बच्चा फिर जग गया. मैंने अपना लौड़ा अन्दर किया और चैन लगा कर सो गया.

सबेरे जब नींद खुली तो उन लोगों का स्टॉप आ गया था. उसके साथ के मर्दों को जबरदस्ती जगाना पड़ा कि भैया उतरो, स्टॉप आ गया है.

मैंने कभी बाहर की औरत से सम्बंध नहीं बनाये, लेकिन पत्नी अगर आपको बहुत दिनों तक लिफ्ट नहीं दे, तो मन भटकता है. हर औरत सेक्सी लगती है. मैं तो आज पैसे देकर भी चुदाई करने वाला था. अपने नसीब को कोस रहा था, पर उसके घर में देर है.. अंधेर नहीं.

जाते समय उसने मुझे स्माइल दी, आज वो मुझे अपनी बीवी से भी सुंदर लग रही थी. मेरा मचलता मन उसने शांत किया था.

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