ट्रेन मे मिली दीक्षा की चूत

इतने मे ही वो आदमी आ गया जिस सीट पर वो बैठी हुई थी. मैं उन दोनो को अपनी सीट पर कर लिया. वो आदमी तो आते ही सो गया और दीक्षा खिड़की वाली सीट के उप्पर बैठी हुई और दिशा मेरे दूसरी साइड बैठी हुई थी. मैं अपनी किस्मत को देख हैरान हो रहा था क्योकि मेरे दोनो और खूबसूरत परियाँ बैठी हुई थी.

मैं बहोत हिम्मत करके दीक्षा के पॅट्टो पर हाथ पहरना शुरू कर दिया. उसने मुझे कुछ नही कहा और जब उसने मुझे एक सेक्सी सी स्माइल करी तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई. मैने उसके कंधे पर हाथ रखा और उसके बूब्स को सहलाने लग गया. मुझे बहोत मज़ा आ रहा था. क्योकि दिशा मेरे कंधे पर अपना सिर रख कर सो गई थी.

उसके टॉप मे से उसके दोनो बूब्स सॉफ सॉफ दिख रहे थे. मेरा लंड एक दम खड़ा हो गया. मैं दिशा को धीरे धीरे गरम कर रहा था ताकि मैं उसे चोद सकु. जब मुझे लगा की दीक्षा के मूह से गरम गरम साँसे आने लग गई है मतलब की वो गरम होना शुरू हो गई है.

तभी सला टी.टी आ गया और उन दोनो से फाइन माँगने लग गया. मैने उसे साइड मे ले जा कर बात करी. और कहा की ये दोनो अगले स्टेशन पर ही क्लास 3 मे चली जाएगी. पर साले इंडिया वाले सारे के सारे कुत्ते है उसने फिर भी मुझसे 500 रुपए ले ही लिए. अब मुझे दीक्षा को चोद कर अपने 500 रुपए पूरे करने थे.

इसलिए मेरे माइंड मे एक आइडिया आया. मैने दिशा से कहा की जब नेक्स्ट स्टेशन आएगा. तो आप नीचे जा अपनी सीट देख लेना और दीक्षा को फोन कर देना. फिर मैं दीक्षा के साथ आप का समान ले कर आप के पास आ जाऊंगा. मेरी बात दिशा को ठीक लगी उसने एक दम हाँ कह दिया और दीक्षा मुझे देख कर मुस्कुराने लग गई. शायद वो मेरा प्लान अच्छे से समझ चुकी थी.

रात के 1 बज चुके थे जैसे ही ट्रेन रुकी तो दिशा नीचे उतर कर अपनी सीट देखने चली गई. मैं और दीक्षा ट्रेन के डोर पर खड़े थे. ठंड काफ़ी थी इसलिए हमे ठंड लग रही थी. मैने उसे पीछे से हग किया हुआ था. तभी दिशा का फोन आ गया की उसे अपनी सीट मिल गई है. मुझे बहोत अफ़सोस हुआ की अब तो दीक्षा गई मेरे हाथ से.

पर भगवान मेरे साथ था तभी ट्रेन चल पड़ी. और दीक्षा ने फोन करके कह दिया की वो नेक्स्ट स्टेशन पर आएगी तेरे पास. बस फिर क्या मैने झट से ट्रेन का डोर बंद किया. और उसको अपनी बाहों मे भर लिया. और जान कर कापने का नाटक करने लग गया. दीक्षा ने तभी मुझे अपनी बाहों मे ले लिया. और मुझे किस करने लग गई.

उसने मुझे करीब 20 मिनिट तक किस किया और मुझे गरम करने लग गई. मेरे हाथ अब उसके बूब्स पर आ गये थे. जिसे मैं ज़ोर ज़ोर से दबाने लग गया. मैने देखा की सब सो रहे है. मैने वहीं पर दीक्षा को नीचे बिठा दिया और अपना लंड बाहर निकाल कर उसे अपना लंड चुसवाने लग गया.

उसके मूह की गरमी से मैं भी गरम होने लग गया. मुझे सच मे बहोट मज़ा आ रहा था. उसके बाद मैने उसे अपनी सीट पर ले आया और उप्पर वाली सीट पर उसे चड़ा दिया. मैने ट्रेन की लाइट बंद कर दी. और खुद भी उप्पर चड़ गया मैं अपने साथ एक कंबल ले आया था.

सीट पर आते ही मैने उसे अपने नीचे ले लिया और उसके होंठो को पागलो की तरह चूसने लग गया. फिर मैने उसका टॉप उप्पर कर दिया और ब्रा मे से उसके दोनो बूब्स को बाहर निकाल लिया. उसके दोनो बूब्स को पागलो की तरह चूसने लग गया. उसके मूह से आहह आह की मस्ती भरी आवाज़ें आने लग गई. मुझे लगा की अब तो मैं गया तभी मैं उसके होंठो पर अपने होंठ रखे.

और उसके कान मे धीरे से कहा की शोर मत करो अगर कोई उठ गया ना तो वो भी तुम्हारी चूत मारेगा. फिर मैने अपना लंड बाहर निकाला और उसकी जीन्स एक तंग से बाहर निकाल ली. मैने जोश मे आ कर उसकी पैंटी भी फाड़ दी. और अपना थूक उसकी चूत पर लगा कर अपना लंड उसकी चूत मे डाल दिया.

उसको दर्द हो रहा था पर वो चिल्ला भी नही सकती थी. इस लिए उसने मेरे कंधे पर अपने दाँत गाड़ दिए. मुझे इस दर्द मे बहोत मज़ा आ रहा था. मैं ट्रेन के धक्के के साथ अपने धक्के शुरू कर दिए थे. मैं बड़ी तसल्ली से उसकी चूत मार रहा था. उसने धीरे से मेरे कान मे कहा की आप का लंड तो सच मे बहोत बड़ा है.

फिर क्या था मुझे उसकी बात सुन कर जोश आ गया और ज़ोर-ज़ोर से उसकी चूत को चोदने लग गया. मैने उसकी चूत को करीब 30 मिनिट तक चोदा और फिर मैं उसके उप्पर ऐसे ही लेट गया. कंबल मे हम दोनो को नींद कब आई पता तक नही चला

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