ट्यूशन वाली भाभी ने मज़े से चुदवाया

अब तो मैं रोज भाभी को घूरता रहता. भाभी भी पढाते – पढ़ाते मेरे लंड को घूरती रहती. कभी – कभी किताब गिरने के बहाने वह मेरे लंड को छू भी देती थीं. इस पर मुझे कुछ अजीब सा महसूस होता और फिर मैं सीधा बैठ जाता.

एक दिन मैं स्कूल नहीं गया था. उस दिन भैया ने मुझसे कहा, “राहुल, मैं एक जरूरी काम से नागपुर जा रहा हूँ. क्या तुम आज रात को मेरे घर पर रुक सकते? मैं तुम्हारी भाभी को अकेले नहीं छोड़ना चाहता.”

उस दिन मेरी तो जैसे लॉटरी लग गई थी. फिर मैंने उन्हें कहा, “क्यों नहीं भैया, आप निश्चन्त होकर जाओ. मैं भाभी का ख्याल रखूंगा.” यह सुन कर भैया ने मेरा धन्यवाद किया और कहा कि खाना तुम अब से भाभी के साथ ही खाना. इस पर मैंने कहा कि ठीक है. फिर वह चले गए.

उसके बाद मैं अपने कमरे में आ गया. वहां पर थोडी देर आराम करने के बाद मैं भाभी के रूम गया. वहां कोई नहीं था. तभी भाभी नहा कर बाहर आ गईं. हाय.. क्या गोरा बदन था उनका! जैसे ही मैंने उन्हें देखा, मेरा लंड खडा हो गया.

तभी अचानक पानी पर पैर पड़ने से भाभी फिसल गईं और उन्हें गांड में चोट लग गई. अब उनसे उठा भी नहीं जा रहा था. तब मैंने उठने में उनकी मदद की. वह उस समय तौलिए में थी.

उनके बदन को छू लेने से मेरा लंड और सख्त हो गया. फिर मैंनै भाभी को बिस्तर पर लिटा दिया. तभी भाभी को और तेज दर्द होने लगा. इस पर उन्होंने एक तरफ इशारा करते हुए मुझसे कहा – राहुल, वहाँ बाम रखा है, मुझे दे दे प्लीज..

फिर मैंने बाम भाभी को दे दिया तो वह लगाने लगीं. खुद से करने में उन्हें तकलीफ हो रही थी तो उन्होंने मुझसे कहा, “राहुल, क्या तुम मुझे बाम लगा दोगे? मेरा हाथ नहीं पहुंच रहा है.”

इस पर मैंने बाम लिया और भाभी की कमर पर लगाने लगा. मेरी तो आवाज ही बंद हो गई थी. तभी भाभी ने कहा – थोड़ा और नीचे.

अब मैं भाभी की गांड पर बाम लगाने लगा. मुझे कुछ परेशानी हो रही थी. इस पर मैंने उनसे पूछा तो उन्होंने कहा कि तौलिए को निकाल दो. फिर मैंने तौलिए को भाभी से अलग कर दिया. अब भाभी पीछे से पूरी नंगी थी. मैं बाम लगाने लगा. इसके साथ ही मेरा लंड भी झटके लगाने लगा.

अब भाभी की आँखें अपने आप बंद हो गई और धीरे – धीरे उनके मुंह से सिसकारी निकलने लगी. उनके मुंह से निकल रही ‘उम… आह…’ की आवाज पूरे कमरे में गूंजने लगी थी. जिससे अब मेरी हालत खराब होने लगी.

थोड़ी देर बाद मैंने हिम्मत की और अपनी एक उँगली भाभी की गांड में डाल दी. इस पर उन्होंने जोर से सिसकारी ली और मेरी तरफ देखा. इस पर मैंने भाभी को अनदेखा कर दिया और धीरे – धीरे उँगली अन्दर – बाहर करने लगा.

अब भाभी की सिसकारियाँ तेज होने लगी थीं और मेरी भी हालत खराब होने लगी. फिर मैंने उन्हें पीठ के बल लिटाया और धीरे – धीरे उनके होंठों को चूमने लगा. भाभी कुछ देर तक मेरा विरोध करती रहीं लेकिन फिर धीरे – धीरे वो भी मेरा साथ देने लगी.

अब कभी मैं भाभी के निचले होठ को चूसता तो कभी ऊपर वाले को. भाभी भी मेरा साथ देती रही और अचानक भाभी ने एक हाथ से मेरे लंड को कपड़ों के ऊपर से ही पकड़ लिया और दबाने लगी. अब मैं भी एक हाथ से उनकी चूत को सहलाने लगा.

भाभी काफी उत्तेजित हो गई थीं. तभी उन्होंने जोर से सिसकारी ली और कहने लगी, “प्लीज राहुल, ओर तेज करो…” अब मैं भाभी की चूची को दोनों हाथों से दबाने और चूमने लगा. मैं भाभी की एक चूची को दबाता और एक को चूसता.

लगभग 15 मिनट तक उनको चूसने के बाद मैं धीरे – धीरे नीचे आने लगा और फिर मैंने भाभी की चूत को जैसे ही किस किया, वैसे ही भाभी की जोर से चीख निकल गई और उन्होंने कहा कि ऐसा मत करो! लेकिन मैंने उनकी एक ना सुनी. मुझे उनकी चूत का स्वाद कुछ नमकीन सा लगा लेकिन मैं चाटता रहा. मैं पहली बार चूत चाट रहा था, मेरा मन कर रहा था कि मैं दिन भर उनकी चूत को चाटता रहूं.

दोस्तों, भाभी की चूत पर एक भी बाल नहीं थे. शायद उन्होंने कुछ देर पहले ही साफ किये थे. तभी भाभी ने कहा – राहुल, अब और सहन नहीं होता, डाल दो अपना लंड मेरी चूत में.

इतना सुनना था कि मैं खड़ा हो गया और एक – एक करके उनके सारे कपड़े उतारने लगा. इसके बाद मैं खुद भी नंगा हो गया. भाभी ने मेरे लंड को देखा जो 9 इंच लम्बा और काले नाग की तरह खडा था. इसके बाद भाभी ने एक हाथ से मेरे लंड को पकड़ा और आगे – पीछे करने लगी.

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