बस में जवान लड़के ने आंटी की चूत गीली कर दी- 2

मेच्योर लेडी सेक्स कहानी में पढ़ें कि भीड़ भरी बस में एक लड़का मेरे जिस्म के स्पर्श का मजा ले रहा था. मुझे भी अच्छा लग रहा था तो मैंने उसका पूरा साथ दिया. हैलो मैं संजना … मेच्योर लेडी सेक्स कहानी के पिछले भाग बस में जवान लड़के ने छेड़ा तो आंटी को मस्ती सूझी में आपने पढ़ा था कि एक 19-20 साल का नौजवान मेरे जैसी अधेड़ उम्र वाली महिला के अन्दर दबी हुई वासना की आग को भड़का रहा था. चलती बस में उस लड़के ने मेरे जिस्म के हर अंग को झनझना दिया था. उसी मेच्योर लेडी सेक्स कहानी का अगला भाग पेश है. यह कहानी सुनें. ऑडियो प्लेयर 00:00 00:00 आवाज बढ़ाने या कम करने के लिए ऊपर/नीचे एरो कुंजी का उपयोग करें। पतली रूबिया के कपड़े के ब्लाउज से कसा हुआ मेरा कंधा और उसका कंधा एक दूसरे से कुश्ती कर रहे थे. कंधे से कोहनी तक दोनों के हाथ सटे हुए थे. इस अवस्था में और कामुकता तब बढ़ी, जब मैंने अपना बायां हाथ उसके कंधे के ऊपर से उसकी सीट पर रख दिया. जैसे ही मेरा हाथ सीट पर पड़ा, उसका दायां कंधा, मेरे बाएं बोबे पर इतना दबाव देते हुए लगा कि खरबूजा के आकार का मेरा बायां बोबा, तन कर आम बन गया. बस उम्र का फ़र्क ये पड़ा कि इस आम से रस नहीं टपका. कंधा मेरे बोबे में धंसाए उसका दायां हाथ मेरी जांघ पर तैरने लगा. बीच बीच में साड़ी से ढकी मेरी सुरंगी नाभि में वो अपनी उंगली घुसा रहा था. उसकी आधी उंगली मेरी नाभि में घुसी जा रही थी. वो अपनी पूरी उद्दंडता से कभी नाभि में उंगली आगे-पीछे कर रहा था, कभी उसमें उंगली घुमा रहा था. मैं उसका हाथ पल्लू से ढककर उसको पूरा सहयोग कर रही थी. कुछ पल बाद वो वापस मेरी मांसल जांघों पर हाथ फिराने लगा. उसने अपनी गोद में बैग रखा हुआ था, तो उसके लिंग के भाव को ना तो मैं देख पा रही थी … ना ही कोई और. पर उसके लिंग का भाव मैं अपने मन में जरूर भांप रही थी. मैंने उसके हाथ को अपने साड़ी के पल्लू से ढका और सब्जी का थैला इस तरह स कर लिया कि उसका सारा भार मेरी दाईं जांघ पर आ गया था और पहली वाली तरफ से हल्का हुआ थैले का कपड़ा, उसके हाथ को ढक रहा था. मेरी इन सब लीपापोतियों से उसका आत्मविश्वास ओर उसकी वासना सातवें आसमान पर थी. मेरी जांघ पर उसका बहकता हाथ मुझे इस कदर कामुक कर रहा था कि मुझे अपने दाएं हाथ में साड़ी का पल्ला लेकर मुख के भाव छुपाने पड़ रहे थे. पर ये भाव में सिर्फ बस की भीड़ से छुपा पा रही थी, उससे नहीं. शायद मेरी सिसकारी में इतनी आवाज तो आने लगी थी कि मेरे मुख से 6-7 इंच दूर उसके कान तक जा रही थी. इसी का उत्तर था कि उसका हाथ हर सेकंड पहले से ज्यादा दबाव से मेरी मांसल जांघ को मसल रहा था. उसने अपनी जांघों पर खड़ा रखा हुआ बैग आड़ा कर दिया. अब मेरे थैले और उसके बैग के बीच जरा सी ही जगह थी. अगले ही पल उसने बैग की चैन खोलने के बहाने अपना दायां हाथ मेरे ऊपर इतना चढ़ा दिया कि उसकी कोहनी के ऊपर की भुजा मेरे दोनों विशाल वक्षों के बीच धंस रही थी और कोहनी मेरे वक्षों के नीचे चुभ रही थी. कोहनी के नीचे से लेकर कलाई तक उसका हाथ मेरे नंगे पेट पर पूरे दबाव से चिपक रहा था. तभी उसकी उंगलियों ने बैग की चैन खोली और उसमें से अपना फोन निकाला. चैन लगाकर उसने हाथ मेरे शरीर पर रगड़ कर हटाया. उसकी भुजा से लेकर कलाई तक मेरे वक्ष से नंगे पेट तक रगड़ा. इस बार उसने अपनी हथेली का पूरा दाब, साड़ी पर लगे क्लिप को दबाते हुए मेरी योनि के ऊपरी पाट को मसलते हुए निकाला. इन सब हरकतों को भीड़ की नजर से देखें, तो ये स्थिति बहुत आम और विवशतापूर्ण थी. पर हम दोनों ही इनका अनुभव कर पा रहे थे कि ये कितनी कामुक थी. मेरा बदन अब तपने लगा था और इस तपन में उसका सटा हुआ शरीर और अगन बढ़ा रहा था. किसी का भी ज्यादा ध्यान ना देने का प्रमुख कारण हम दोनों का उम्र अंतराल भी था. वो भले ही हष्ट-पुष्ट लंबा पूरा था, पर मेरे अधेड़ उम्री मांसल गदराए शरीर के सामने वो मेरा बच्चा ही प्रतीत हो रहा था. उस पर शायद कोई उम्र का जोर समझ कर शक भी कर ले, पर मेरे सिर के काले बालों के बीच से निकले उजले श्वेत बालों को देखकर कोई यह नहीं सोच सकता था कि इन छोटी छोटी मादक हरकतों का आनन्द जो कर रहा था, उससे ज्यादा आनन्द जिसके बदन पर ये हरकतें की जा रही थीं, वो ले रही थी. उसकी सीट पर रखे मेरे बाएं हाथ की कांख में उगे घने बालों में अब पसीना चू रहा था. जो मेरे ब्लाउज के कपड़े से निकल कर उसकी कमीज़ को नम कर रहा था. इस सुंगध से दोनों की मादकता बढ़ रही थी. ये पूरी भीड़ के लिए पसीने की बदबू थी, पर फिलहाल हम दोनों में यह मादक सुगंध एक असीम ऊर्जा भर रही थी.

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