आखिरकार परीक्षा अच्छी रही

kamukta, antarvasna मुझे एक बार अपने एग्जाम के लिए दिल्ली जाना था, मैं सरकारी प्रतियोगिता की तैयारी कर रहा था उसी दौरान मैंने एक सरकारी पद के लिए आवेदन किया था और जब मैंने उसमें आवेदन किया तो एग्जाम के लिए मुझे दिल्ली जाना था दिल्ली में मुझे मेरे मामा के घर पर जाना था क्योंकि दिल्ली में मैं ज्यादा किसी को नहीं जानता था, मैंने अपना रिजर्वेशन अपने पापा से कहकर करवा दिया था, मेरे पापा स्कूल में क्लर्क हैं, उन्होंने मुझे कहा कि मैं तुम्हारा रिजर्वेशन करवा दूंगा। जब उन्होंने मरा रिजर्वेशन करवाया तो उस दिन वह घर पर आए और मुझे कहने लगे गौतम तुमने अपनी परीक्षा की पूरी तैयारी तो कर ली है? मैंने उन्हें कहा पिताजी इस बार तो मुझे पूरी उम्मीद है यह कहते हुए वह कहने लगे बेटा तुम जल्दी से बस कोई सरकारी नौकरी ज्वाइन कर लो जिससे कि मुझे भी थोड़ा मदद मिल जाए।

मेरे पिताजी के ऊपर काफी कर्च हो चुका था क्योंकि उन्होंने मकान बनाने के लिए बैंक से लोन लिया था और उसकी किस्त भरने के लिए उन्हें बहुत दिक्कत होती, उन्होंने मेरी पढ़ाई का खर्चा भी उठाया इसलिए मैं भी चाहता था कि जल्दी से मैं कोई परीक्षा उत्तीर्ण कर लूं ताकि उन्हें भी थोड़ी बहुत मदद मिल जाए। जिस दिन मुझे दिल्ली जाना था उस दिन मुझे घर से निकलते वक्त काफी देर हो गई मुझे लगा कि कहीं मेरी ट्रेन ना छूट जाए इसलिए मैं जल्दी से स्टेशन पहुंच गया लेकिन मैं घर पर अपने पिताजी के दिए हुए पैसे भूल चुका था, मैंने सोचा कोई बात नहीं अब दिल्ली पहुंच कर ही उन्हें फोन करूंगा, मेरे पास थोड़े बहुत पैसे पड़े थे। मैं जब ट्रेन में बैठा हुआ था तो मेरे पिताजी ने मुझे फोन किया और कहने लगे बेटा तुम समय पर स्टेशन पहुंच तो गए थे, मैंने उन्हें कहा जी पिताजी मैं समय पर स्टेशन पहुंच गया था, मैं उनसे फोन पर बात ही कर रहा था तभी एक लड़की सामने से आई उसके हाथ में किताब थी उसने इधर उधर कहीं नहीं देखा और सीधा ही वह मेरे सामने वाली सीट में बैठ गई मैं उसे बड़े ध्यान से देख रहा था उसने बड़े बड़े चश्मे लगाए हुए थे मैं सोचने लगा कि इसे कैसे पता चला कि इसकी सीट यहीं पर है क्योंकि उसका ध्यान ना तो इधर-उधर था और ना ही वह किसी की तरफ देख रही थी। मैंने उससे पूछा मैडम आपका सीट नंबर क्या है? उसने मुझे बताया मेरा सीट नंबर 23 है।

मैंने देखा तो वह बिल्कुल सही सीट पर बैठी हुई थी उसके बाद वह दोबारा से किताब पढ़ने पर लग गई, मैंने उससे ज्यादा बात नहीं की। मेरे बिल्कुल बगल में एक परिवार बैठ चुका था उन्हें भी दिल्ली जाना था वह अंकल मुझसे पूछने लगे बेटा तुम्हें कहां जाना है? मैंने उन्हें कहा अंकल मुझे दिल्ली जाना है, दिल्ली में मेरी परीक्षा है। जब मैंने यह बात उन अंकल से कहीं तो वह लड़की भी मेरी तरफ देखने लग गई, उसने मुझसे पूछा तुम्हारा एक्जाम सेंटर कहां पर है? मैंने उसे बताया कि मेरा एग्जाम सेंटर राजीव चौक के पास है। मैंने जब उसे यह बात बताई तो वह कहने लगी मैं भी उसी परीक्षा के आई हूं और मेरा सेंटर भी वहीं पर है, मैंने उससे हाथ मिलाते हुए अपना इंट्रोडक्शन दिया, उसने मुझसे कहा मेरा नाम अनुष्का है वह किताब से बाहर आ चुकी थी और मुझसे बात करने लगी। मैंने उससे पूछा क्या तुमने यह पहली बार फॉर्म भरा है? वह कहने लगी हां मैंने पहली बार ही किसी काम के लिए फॉर्म भरा है इससे पहले मैंने कोई भी फॉर्म नहीं भरा था। वह मुझसे पूछने लगी क्या आप पहली बार एग्जाम दे रहे हैं? मैंने उसे कहा नहीं मैंने तो इससे पहले भी कई बार ट्राई किया लेकिन मेरा कहीं भी कुछ नहीं हुआ परन्तु इस बार मुझे उम्मीद है कि शायद यह परीक्षा मैं निकाल लूंगा और यहां मेरा सिलेक्शन हो जाएगा, वह कहने लगी चलो ये तो बहुत अच्छी बात है कि आपको अपने पर पूरा भरोसा है। मेरा सफर उस दिन बहुत अच्छा कटा, जब हम लोग दिल्ली पहुंच गए तो अनुष्का मुझे कहने लगी आप यहां कहां रुके हैं? मैंने उसे बताया कि मैं अपने मामा जी के पास यहां रुकने वाला हूं। वह कहने लगी मैं भी अपनी मौसी के घर पर रुकने वाली हूं, यह कहते हुए मैंने उसे कहा चलो फिर हम लोग कल मिलते हैं, मैं भी स्टेशन के बाहर आ गया और वहां से मैं अपने मामा जी के घर चला गया, अनुष्का भी अब जा चुकी थी। मुझे अंदर से तो बहुत टेंशन हो रही थी क्योंकि मुझे किसी भी हाल में यह परीक्षा निकालनी हीं थी, जब मैं अपने मामा जी के पास पहुंचा तो वह कहने लगे गौतम बेटा तुम्हें आने में कोई तकलीफ तो नहीं हुई? मैंने कहा नहीं मामा जी मेरा तो सफर बहुत अच्छे से कट गया। वह मुझसे कहने लगे तुमने इस बार तो अच्छे से तैयारी की है, मैंने उन्हें कहा जी मामा जी मैंने इस पर बहुत अच्छे से तैयारी की है।

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