अमेरिका में गोरी की चूत मिली

मेरे दोस्तो, मेरा नाम समीर मलहोत्रा है. आप लोग मुझे प्यार से सैम बुला सकते हैं. उम्र 20 साल कद 5 फुट 11 इंच. दिखने में स्मार्ट हूँ लेकिन थोड़ा शर्मीला हूँ. शायद यही कारण है कि मैं इतने दिनों तक वर्जिन रहा.
अन्तर्वासना पर यह मेरी पहली कहानी है, आशा करता हूँ कि यह सेक्स कहानी आप सभी को पसंद आएगी.

मैंने इस कहानी में वही लिखा है, जो मेरे साथ अभी कुछ दिन पहले ही हुआ है. ये कोई बहुत पुरानी कहानी नहीं है. ये आज से लगभग 25 दिन पहले शुरू हुआ था.

हम 3 भाई बहनों में मैं सबसे छोटा हूँ. मेरे बड़े भैया इंजीनियर हैं तथा यूएसए में जॉब करते हैं. पिछली बार जब वो घर आए थे, तो मैंने कहा कि मुझे भी यूएसए देखना है. पहले मैंने घर वालों को मनाया, फिर भैया को मनाया. मम्मी को चिंता थी कि जाते टाइम तो भैया के साथ चला जाएगा.. लेकिन वापस कैसे आएगा, वो भी अकेला.

लेकिन जैसे तैसे मैंने सबको मनाया और मुझे भैया के साथ भेजने के लिए तैयार किया.

सब सोच रहे थे कि मुझे यूएसए घूमने जाना है, लेकिन बात कुछ और थी. मैंने सुना था कि इधर के देशों में लड़कियां बड़े खुले विचारों वाली होती हैं तथा बड़ी आसानी से चुदाई को मिल जाती है. इसी लिए जिस दिन से भैया की नौकरी लगी थी, उसी दिन से किसी और का तो पता नहीं, लेकिन मैं बड़ा खुश था कि भैया के साथ यूएसए जाने का मौका मिलेगा और चुदाई भी मिल सकती है.

आखिर मैं अब यूएसए जा भी रहा था भैया के साथ.

मेरे भैया न्यूयॉर्क में रहते हैं. हम वहां पहुंच गए थे, भैया के साथ घूमना फिरना भी हो रहां था लेकिन यार मैंने जैसा सोचा था ना.. वैसा कुछ भी नहीं था. यहाँ आए हुए मुझे 10 दिन हो गए थे, लेकिन चुदाई तो दूर, अभी तक तो एक भी लड़की से हाय हैल्लो तक नहीं हुई थी.

मैं घूम घूम कर भी परेशान हो गया था. इसलिए अब मैं कहीं घूमने भी नहीं जाता था. भैया जॉब पर जाते और मैं घर पे ही पड़ा रहता था. कभी कभी बाहर सड़कों पर घूमने निकल जाता था. कुल मिलाकर दिन बड़े बोरियत से निकल रहे थे और वापस जाने में अभी भी 20 दिन थे.

एक दिन भैया को किसी बुक स्टोर से कोई किताब लानी थी तो उन्होंने मुझसे फोन पर कहा कि ला देगा क्या?
मैंने कहा- ठीक है.

भैया ने गूगल मैप्स पे बुकस्टोर का एड्रेस भेज दिया.. और मैं किताब लाने चल दिया.

मैं स्टोर में पहुंच गया और मुझे किताब भी मिल गयी. वो बुक स्टोर किसी लाइब्रेरी जैसा था. काफी बड़ा था और लाइब्रेरी की तरह उसमें किताबें जमी हुई थीं. मैंने सोचा कि घर जाकर वैसे भी बोर ही होना है, अब यहाँ आ ही गए हैं तो क्यों ना पूरा बुकस्टोर घूम लिया जाए.

यार अन्तर्वासना की कहानियां पढ़ पढ़ कर मुझे ऐसा लगने लगा था कि पता नहीं, कब और कहां चूत मिल जाए.

तो इसी चक्कर में मैंने बुकस्टोर के चक्कर लगाने शुरू कर दिए. वहां एक एडल्ट सेक्शन भी था, जिसमें एडल्ट मैगजीन एडल्ट बुक्स वगैरह थीं. तो मैं उधर जाके एक मैगजीन खोल के पढ़ने लगा.

मैगजीन का नाम याद नहीं शायद प्लेबॉय थी. उसमें एक लड़की का बड़ा सा पोस्टर था, जो उसके पन्नों के बीच में मोड़ के लगा हुआ था, जैसे किसी किसी लोकल गाइड बुक में शहर का बड़ा सा नक्शा घड़ी किया हुआ लगा होता है, जो खुल के बहुत बड़ा हो जाता है

तो मैं उस फोटो को पूरा खोल के देखने लगा. ये किसी बड़ी हॉट सी लड़की की फोटो थी. एकदम क्लीन शेव चूत और लगभग 36 सी साइज़ के बोबे तने हुए थे.

मेरे तो देखकर ही मुँह में पानी आ गया और मैं ख्यालों में ही उस लड़की के बोबे दबाने लगा. मेरा लौड़ा चड्डी में टाइट होने लग गया था और थोड़ा थोड़ा गीला भी होने लगा था.

मैं इतने बड़े साइज़ की फोटो को देख कर ख्यालों में ही उसे चोद रहा था कि तभी अचानक किसी ने पीछे से मेरे कंधे पे हाथ रखा. मेरी तो फट के चार हो गई यार.. मुझे यहाँ काफी देर हो गयी थी. मैंने सोचा कहीं भैया तो नहीं आ गए.

जल्दबाजी में पोस्टर को बंद करने और मैगजीन को बंद करने के चक्कर में वो हाथ से छूट कर नीचे गिर गयी.

तभी किसी ने पीछे से बोला- एवर हैड दैट इन रियल? (कभी सच में भी कुछ किया है?)

मतलब तो आप सब समझ ही गए होंगे. लाल मुँह और फटती हुई गांड के साथ मैंने पीछे देखा.
पीछे तो बड़ी हॉट लड़की खड़ी थी यार …

ऊंची हील के जूते, पतली टांगें, स्कर्ट जिसमें से निकलती हुई उसकी गोरी टाँगें बड़ी खूबसूरत लग रही थीं.

मैचिंग कलर का ब्लाउज नुमा टॉप, जो उसकी नाभि के थोड़ा सा ऊपर तक आ रहा था और उसके ऊपर ब्लैक जैकेट. ब्लाउज बीच में से थोड़ा सा कटा हुआ था, जिसमें से उसके बड़े बड़े मम्मों की थोड़ी सी झलक दिख रही थी.
कुल मिलकर एकदम कातिलाना लग रही थी.

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