अँधेरे में बुआ की जगह दादी की चूत खोल दिया

andhere mai dadi ki chudai हेलो दोस्तों, सारे रीडर्स को आशु का प्यार, मैं एक बार फिर हाजिर हूं अपने लाइफ में घटी एक अनोखी घटना लेकर. मगर उस से पहले मैं उन सबका थैंक्यू करना चाहता हूं जिन्होंने मेरी पिछली सारी कहानियों को इतना पसंद किया कि उनका प्यार मुझे ईमेल के जरिए मिला और मुझे एंकरेज किया और कहानी लिखने के लिए, इसलिए मैं अपने बिजी शेड्यूल में से टाइम निकालकर यह कहानी लिख रहा हूं. ऐसे ही मुझे प्यार देते रहिये मैं कभी आप लोगों को निराश नहीं करुंगा.. उस वक्त हम लोग गांव में रहते थे. आप लोगों को पता है या नहीं मैं नहीं जानता फिर भी मैं बताना चाहता हूं कि जो सारी सुविधाएं शहर में होती है वो सब गांव में नहीं होता, जैसे कि हर घर में बाथरूम या प्रॉपर इलेक्ट्रिसिटी.. हमारा एक बहुत छोटा सा गांव है और यहां अक्सर बरसात के दिनों में बिजली चली जाती है और ३-४ दिनों तक नहीं आती. यह जो घटना घटी वह उसी अंधेरे के कारण ही घटी थी.

हमारे घर से ३ घर छोड़ कर एक परिवार रहते हैं, जिसमें तीन बेटियां और पति पत्नी रहते हैं. उस घर में जो पति है वह ५० साल का है और उनका नाम हरिप्रसाद है. पत्नी की उम्र ४८ साल की है उनका नाम राधा है. मे उन दोनों को दादा दादी बुलाता हूं और उनकी तीनों बेटियों को बुआजी बुलाता हूं. सबसे छोटी बेटी का नाम मंजू है वह २७ साल की है मंजू बूआ थोड़ी मोटी है क्योंकि वह रोज गर्भ निरोधक टेबलेट खाती है और रंग सांवला है. आज से एक साल पहले मैंने उनको और उनकी सहेली छाया को चोदना स्टार्ट किया था, मैं हर टाइम इन दोनों के पास होता था. इन दोनों को मेंने लेसबियन सेक्स करते पकड़ा था, वह दोनों नंगे हो कर एक दूसरे की चूत चाट रहे थे और उंगली डाल कर चोद रहे थे. मैं जैसे ही कमरे में घुसा तो यह देखकर मैं डर गया मगर यह दोनों सेक्स के नशे में चूर थे जिस कारण उन दोनों ने मिलकर मुझे नंगा किया और मेरे लंड को चूस कर खड़ा कर के बारी बारी से मुझसे चुदवाया. उस दिन के बाद में आज तक दोनों को चोदता आ रहा हूं लेकिन ८ महीने बाद छाया बुआ की शादी हो गई और वह अपने ससुराल चली गई. मगर जब भी अपने घर आती हैं तो मैं दोनों को मिलकर चोद देता हूं.. छाया बुआ की शादी के बाद में सिर्फ मंजू बुआ को चोदता हूं और वह रोज रात को उन के घर में जा कर चोदता हूं कभी कभी दिन में भी अकेले देख कर चोदता हूं, ऐसा एक साल से हो रहा है. इस बारे में उनकी मां को भी पता है, मगर वह किसी से कुछ नहीं कहती, क्योंकि मैं जब एक दिन रात को मंजू बुआ को चोद के जा रहा था तो मैंने राधा दादी को उनकी मजली बेटी और दामाद को कमरे में चुदाई करते देखते हुए पकड़ा था..

वो उन के कमरे में खिड़की से झांक रही थी, दादी ने जैसे ही मुझे देखा तो वह डर गई, फिर मैंने उनसे कहा कि मैं किसी को नहीं बताऊंगा इस बारे में, मगर फिर भी वह डरती है, कि कहीं ये बात में किसी को ना बता दूं, उनके पति हर वक्त खेत में होते हैं वह एक छोटा सा मकान है, वह दादी को छोड़ कर बाकी सब औरतों की चुदाई करते हैं. उनके खेत में जितने भी औरत मजदूर काम करती हैं सब को चोदते हैं. इस कारण हरी दादाजी ने पिछले १५ सालों से अपनी पत्नी को चोदना तो दूर ठीक से देखा भी नहीं है. तो इस तरह में रोज मंजू बुआ को चोदता था, उन के कमरे में टीवी और वीसीआर है जिसमें हम लोग ब्लू फिल्म देख देख के चुदाई करते हैं. हमें एक अनोखे स्टाइल में चुदाई करते थे. पहले बुआ जी मेरे लंड को चूस क लोहे की रोड जैसे खड़ा कर देती थी, फिर उसके बाद एक बडे जग में ढेर सारा तेल लेते थे, उस में वह मेरे लंड को डूबा देती थी और फिर दोनों हाथों से मेरे लंड को उस जग के अंदर मालिश करती थी. जिस से मेरा लंड और भी तन जाता था, ऐसा १० से १५ मिनट तक करती थी..

फिर मैं उनको बेड पर सुला देता और उनके चूत का मुंह खोलकर उस में तेल डाल देता और उस के बाद में फिर से अपने लंड को तेल में डूबा कर चूत में घुसाता था. चूत तो पहले से भी तेल से लबालब भरा होता था और मेरा लंड तेल में डुबाने के कारण वह भी तेल से भीग जाता था, फिर जब मैं धीरे से तेल भरी चूत में लंड डालता था, तो घुसाते ही चूत में से पचक की आवाज निकलती थी, और मेरा लंड एक बार में ही पूरा चूत में घुस जाता था, उस के बाद में चोदने लगता था.. तेल के कारण चुदाई के टाइम चूत में से ऐसी आवाजे निकलती के हम दोनों उसे सुनकर मदहोश हो जाते थे, इसी तरह जब में गांड में लंड घुसाता था तो उससे पहले गांड के छेद में उंगली डालकर तेल से लबालब भर देता था, और फिर लंड डालकर चोदता था, गांड मारते टाइम भी पचक पचक ऐसी ही आवाज गांड से निकलती थी.

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